मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट पर लगभग 360 बिलियन डॉलर (करीब 30 लाख करोड़ रुपये) का इंवेस्टमेंट किया है। नतीजा वित्त वर्ष 2026 में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 13-14 परसेंट (वित्त वर्ष 16) से घटकर 10-10.7 परसेंट पर आ गई। सीआईआई और नाइटफ्रेंक की एक रिपोर्ट ...फास्ट-ट्रैकिंग एमएमएलपीज टू एनेबल मोडल शिफ्ट: इंडियाज मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स ट्रांसफॉर्मेशन...में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016 में जहां यह इंवेस्टमेंट केवल 10 बिलियन डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2026 तक बढक़र 57.6 बिलियन डॉलर हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ग्लोबल लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (एलपीआई) रैंकिंग 2014 में 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) रूट्स पर एमएमएलपी आधारित इंटरचेंज रोड ट्रांसपोर्ट कॉस्ट 43 परसेंट तक घटा सकते हैं। इससे माल लोडिंग-अनलोडिंग में लगने वाला समय 90 परसेंट से अधिक घट सकता है। 11 लाख करोड़ की बंपर सेविंग : पिछले 10 वर्ष में ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए 360 बिलियन डॉलर (करीब 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के कैपेक्स से 1.46 लाख किमी नेशनल हाईवे, 68 हजार किमी रेलवे नेटवर्क, 13 बड़े बंदरगाह तथा देश के टॉप 8 शहरों में लगभग 55 करोड़ वर्ग फुट का ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग स्टॉक उपलब्ध हुआ है। प्रमुख कॉरिडोर पर ट्रक्स की एवरेज स्पीड 2015 में 20-25 किमी से बढक़र आज लगभग 40-45 किमी हो गई है। पोर्ट पर जहाजों का टर्नअराउंड टाइम 4 दिनों से घटकर लगभग 2.1 दिन रह गया है। इस दौरान 1.24 लाख करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट से 2843 किमी का डेडिकेटेड रेलवे फ्रेट कॉरिडोर तैयार हो गया है जिससे दिल्ली से मुंबई कंटेनर ट्रेन 24 घंटे में पहुंच जाती है। वित्त वर्ष 2026 में भारतीय रेल ने लगभग 1.7 बिलियन टन माल की ढुलाई की, इस तरह यह चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा गुड्स ट्रेन सिस्टम बन गया। नाइट फ्रेंक के ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्च इंडेक्स (ओआईआई) के अनुसार भारत का स्कोर वित्त वर्ष 2016 के 0.39 से बढक़र वित्त वर्ष 2026 में 0.62 पर पहुंच गया है। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में हुई करीब 4 परसेंट की सेविंग से देश की इकोनॉमी को हर सार 10.8 लाख करोड़ रुपये से 11.7 लाख करोड़ रुपये की की बचत हो रही है। 215 मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की जरूरत : रिपोर्ट के अनुसार 2047 तक भारत में फ्रेट मूवमेंट बढक़र 28 बिलियन टन तक पहुंच सकता है। यदि रेल से होने वाली माल ढुलाई का केवल 30 परसेंट हिस्सा भी मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) के जरिए रूट होता है तो इन पार्कों को हर वर्ष लगभग 3,162 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कार्गो मैनेज करने की कैपेसिटी चाहिए। इसके लिए देश को करीब 216 अत्याधुनिक एमएमएलपी की आवश्यकता होगी। अभी केवल 129 पार्क चालू हैं जो कुल फ्रेट मूवमेंट का केवल 2 परसेंट ही मैनेज कर पाते हैं। वर्तमान में लगभग 70 परसेंट माल ढुलाई सडक़ मार्ग से की जाती है जबकि रेल की हिस्सेदारी केवल 27.4 परसेंट है। यह स्थिति तब है जब रेल परिवहन की लागत सडक़ की तुलना में लगभग आधी पड़ती है।
