इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को कृत्रिम मेधा (एआई) से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा क्षेत्र में नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए इसे ‘बेतुका’ और ‘बड़ी पूंजी के हितों के अनुरूप आपदा का डर दिखाने वाली बातें’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों की सेवाओं की मांग पहले से कहीं अधिक है। ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026 में नीलेकणि ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालीना जॉर्जीवा के एआई को ‘धीरे-धीरे बढऩे वाली सुनामी’ बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी। जॉर्जीवा ने कहा था कि एआई नियमित कार्यों को अपने हाथ में लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मांग खत्म कर सकता है। नीलेकणि ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह सब बड़ी पूंजी के हितों के अनुरूप आपदा का डर दिखाने वाली बातें हैं। वास्तविकता यह है कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों की जरूरत पहले से कहीं अधिक है, क्योंकि किसी कंपनी के कामकाज में बदलाव एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। एआई के लिए कारोबार करने के तरीके पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है। इसके लिए जड़ से लेकर हर स्तर तक बदलाव करने होंगे।’’ उन्होंने कहा कि एआई के दौर में इन्फोसिस जैसी कंपनियों को अन्य कंपनियों को उनके कामकाज में इस तरह के बदलाव करने में मदद करनी होगी।