भारत में डेटा सेंटर के लिए तेलंगाना सबसे आकर्षक नीतिगत पैकेज देने वाला राज्य बनकर उभरा है। उसे बिजली और नियामकीय प्रोत्साहनों के मामले में मजबूत समर्थन मिला है। वित्तीय शोध और साख निर्धारित करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने बिजली, बुनियादी ढांचे, पूंजी और नियामकीय व्यवस्था से जुड़े व्यापक प्रोत्साहनों के साथ संतुलित नीतियां तैयार की हैं। ‘इंडिया फॉरवर्ड : रीइमैजिनिंग ग्रोथ’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात ने बड़े स्तर के डेटा सेंटर संचालकों (हाइपरस्केलर्स) को आकर्षित करने के लिए बिजली और कारोबार सुगमता के मामले में सबसे लाभकारी प्रावधान किए हैं। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के ‘डेटा सेंटर पॉलिसी अट्रैक्टिवनेस इंडिया’ (डीसीपीएआई) सूचकांक में इन चारों प्रमुख राज्यों को करीब 50 अंक मिले हैं। इस सूचकांक में 11 राज्यों द्वारा 2016 से लागू की गई 19 नीतियों का मूल्यांकन किया गया। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आईटी आधारित सेवाएं (आईटीईएस), डेटा सेंटर और वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) से संबंधित नीतियां शामिल हैं। नीतियों का मूल्यांकन चार प्रमुख प्रोत्साहन श्रेणियों (बिजली, जमीन और पूंजी, परिचालन एवं तकनीकी सहायता तथा नियामकीय व्यवस्था और कारोबार सुगमता) के आधार पर किया गया। दूसरे समूह में 42 से 45 अंक वाले ओडिशा, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं। इस समूह में जमीन और पूंजी से जुड़े प्रोत्साहनों के मामले में आंध्र प्रदेश आगे है, जबकि कर्नाटक में कारोबार सुगमता से जुड़े उल्लेखनीय प्रावधान हैं। इनमें आवश्यक सेवाओं के रखरखाव से संबंधित कानून के तहत संरक्षण भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा और हरियाणा की नीतियां परियोजना के पूरे जीवन चक्र को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रोत्साहन देने पर केंद्रित हैं। तीसरे समूह में 30 से 40 अंक वाले राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। तमिलनाडु पूंजीगत व्यय से जुड़ी सहायता के मामले में मजबूत स्थिति में है, जिसमें अपनी जरूरत के लिए नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचा भी शामिल है। हालांकि, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल दोनों को बिजली क्षेत्र से जुड़े प्रोत्साहनों में अपेक्षाकृत कम अंक मिले हैं। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अनुसार, डेटा सेंटर एक अलग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं और राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा उन्हें लक्षित वित्तीय प्रोत्साहन, आसान मंजूरी प्रक्रिया और भरोसेमंद स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के बीच यह प्रतिस्पर्धा डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े विस्तार के बीच हो रही है। भारत में उद्यमों के लिए साझा और समर्पित डेटा सेंटर सुविधाओं की मौजूदा क्षमता करीब 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले एक दशक में पांच गीगावाट क्षमता के लिए प्रतिबद्धताएं पहले ही की जा चुकी हैं, जबकि छह से सात गीगावाट अतिरिक्त क्षमता की घोषणा हो चुकी है या उसकी योजना शुरुआती चरण में है। रिपोर्ट के अनुसार, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग तथा परिचालन संबंधी बिजली खपत समेत भारतीय डेटा सेंटर की कुल बिजली मांग 2025 से 2035 के बीच सालाना औसतन 18 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढऩे का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वैश्विक सुरक्षा और व्यापार का परिदृश्य एक बार फिर बदल रहा है और ऐसे में भारत की वैश्विक रणनीति में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। यह रणनीति रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत पर आधारित रहेगी, लेकिन कई देशों के साथ व्यापक स्तर पर संबंध बनाए रखने के बजाय अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न विकल्पों का संतुलित इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा सकता है।’’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘देश को कूटनीतिक प्रभाव का अधिकतम इस्तेमाल करने, नए बाजारों और संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करने तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने के व्यावहारिक तरीके तलाशने होंगे।’’