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13-04-2026

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बड़ी योजना, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य: रिपोर्ट

  •  भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर कम से कम 100 गीगावाट (जीडब्ल्यू) करने की योजना बना रहा है। यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता के 100 साल पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा हुआ है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में 24 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 8,780 मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) है। इसके अलावा, 6,028 एमडब्ल्यूई क्षमता वाले 8 और रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार, 2030 के शुरुआती वर्षों तक यह क्षमता करीब 22 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसके बाद इसे तेजी से बढ़ाकर 100 गीगावाट के लक्ष्य तक ले जाया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्यारह गुना से अधिक की इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर जैसे स्वदेशी 700 एमडब्ल्यूई प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और ग्रीनफील्ड साइट्स पर आयातित बड़े प्लांट शामिल हैं। साथ ही स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर जैसे 200 एमडब्ल्यूई भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) और 55 मेगावाट इलेक्ट्रिक एसएमआर-55 यूनिट्स पर भी काम किया जा रहा है। इस दिशा में एक अहम उपलब्धि 6 अप्रैल 2026 को हासिल हुई, जब तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 'फर्स्ट क्रिटिकलिटी' प्राप्त की। इसका मतलब है कि इसमें नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो गई है। यह भारत की स्वदेशी परमाणु तकनीक के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत का परमाणु कार्यक्रम एक खास तीन-चरणीय रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना और देश के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाना है। पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से प्लूटोनियम तैयार किया जाता है। दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इस प्लूटोनियम का उपयोग करते हुए अधिक ईंधन पैदा करते हैं। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टरों के जरिए यूरेनियम-233 तैयार कर लंबे समय तक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएफबीआर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन और तरल सोडियम कूलेंट का उपयोग किया जाता है, जिससे यह जितना ईंधन खपत करता है उससे ज्यादा पैदा कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में थोरियम-आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है। 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता वाला यह रिएक्टर लगभग 5 लाख घरों को बिजली सप्लाई करने में सक्षम है। इससे साफ है कि आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा भारत की बिजली जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली है।

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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बड़ी योजना, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य: रिपोर्ट

 भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर कम से कम 100 गीगावाट (जीडब्ल्यू) करने की योजना बना रहा है। यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता के 100 साल पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा हुआ है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में 24 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 8,780 मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) है। इसके अलावा, 6,028 एमडब्ल्यूई क्षमता वाले 8 और रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार, 2030 के शुरुआती वर्षों तक यह क्षमता करीब 22 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसके बाद इसे तेजी से बढ़ाकर 100 गीगावाट के लक्ष्य तक ले जाया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्यारह गुना से अधिक की इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर जैसे स्वदेशी 700 एमडब्ल्यूई प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और ग्रीनफील्ड साइट्स पर आयातित बड़े प्लांट शामिल हैं। साथ ही स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर जैसे 200 एमडब्ल्यूई भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) और 55 मेगावाट इलेक्ट्रिक एसएमआर-55 यूनिट्स पर भी काम किया जा रहा है। इस दिशा में एक अहम उपलब्धि 6 अप्रैल 2026 को हासिल हुई, जब तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 'फर्स्ट क्रिटिकलिटी' प्राप्त की। इसका मतलब है कि इसमें नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो गई है। यह भारत की स्वदेशी परमाणु तकनीक के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत का परमाणु कार्यक्रम एक खास तीन-चरणीय रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना और देश के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाना है। पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से प्लूटोनियम तैयार किया जाता है। दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इस प्लूटोनियम का उपयोग करते हुए अधिक ईंधन पैदा करते हैं। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टरों के जरिए यूरेनियम-233 तैयार कर लंबे समय तक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएफबीआर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन और तरल सोडियम कूलेंट का उपयोग किया जाता है, जिससे यह जितना ईंधन खपत करता है उससे ज्यादा पैदा कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में थोरियम-आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है। 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता वाला यह रिएक्टर लगभग 5 लाख घरों को बिजली सप्लाई करने में सक्षम है। इससे साफ है कि आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा भारत की बिजली जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली है।


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