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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

07-04-2026

फॉरेन कंपनियों ने लीज पर लिया रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस

  •  देश के शीर्ष नौ शहरों में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने के लिए जनवरी-मार्च तिमाही में विदेशी कंपनियों ने रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस पट्टे पर लिए। रियल एस्टेट सलाहकार सीबीआरई ने यह जानकारी दी है। सीबीआरई ने जनवरी-मार्च अवधि के कार्यालय बाजार के आंकड़े सोमवार को जारी किए। इनके अनुसार जीसीसी स्थापित करने के लिए कार्यस्थलों को पट्टे पर लेने से ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष नौ शहरों में कार्यालय को पट्टे पर लेने की कुल सकल दर पांच प्रतिशत बढक़र 2.07 करोड़ स्क्वायर फीट हो गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1.97 करोड़ स्क्वायर फीट थी। ये नौ शहर मुंबई, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोलकाता, अहमदाबाद और कोच्चि हैं। विदेशी कंपनियों ने जनवरी-मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस पट्टे पर लिए जो किसी भी तिमाही में अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। सीबीआरई के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका क्षेत्र के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘‘ जीसीसी के लिए रिकॉर्ड स्तर पर पट्टा गतिविधि यह स्पष्ट संकेत है कि जटिल वैश्विक क्षमताओं वाले कार्यों के लिए भारत पसंदीदा वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि यह मांग किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि ई-कॉमर्स, प्रौद्योगिकी व बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई है। मैगजीन ने कहा, ‘‘ मांग अब केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यम एवं छोटे जीसीसी के साथ-साथ फॉर्च्यून 500 कंपनियां भी इसे बढ़ा रही हैं।’’ सीबीआरई के पट्टा सेवाओं से जुड़े भारत के प्रबंध निदेशक राम चंदनानी ने कहा कि कार्यस्थल लेने वाली कंपनियां हरित प्रमाणित और बेहतर सुविधाओं वाले स्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए तैयार कार्यस्थल रणनीतियां अपना रही हैं...हमें 2026 तक पट्टा गतिविधि मजबूत बने रहने की उम्मीद है।’’ इस नौ शहरों में से बेंगलुरु 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर (22 प्रतिशत) और मुंबई (16 प्रतिशत) का स्थान रहा। 

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फॉरेन कंपनियों ने लीज पर लिया रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस

 देश के शीर्ष नौ शहरों में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने के लिए जनवरी-मार्च तिमाही में विदेशी कंपनियों ने रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस पट्टे पर लिए। रियल एस्टेट सलाहकार सीबीआरई ने यह जानकारी दी है। सीबीआरई ने जनवरी-मार्च अवधि के कार्यालय बाजार के आंकड़े सोमवार को जारी किए। इनके अनुसार जीसीसी स्थापित करने के लिए कार्यस्थलों को पट्टे पर लेने से ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष नौ शहरों में कार्यालय को पट्टे पर लेने की कुल सकल दर पांच प्रतिशत बढक़र 2.07 करोड़ स्क्वायर फीट हो गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1.97 करोड़ स्क्वायर फीट थी। ये नौ शहर मुंबई, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोलकाता, अहमदाबाद और कोच्चि हैं। विदेशी कंपनियों ने जनवरी-मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 91 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस पट्टे पर लिए जो किसी भी तिमाही में अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। सीबीआरई के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका क्षेत्र के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘‘ जीसीसी के लिए रिकॉर्ड स्तर पर पट्टा गतिविधि यह स्पष्ट संकेत है कि जटिल वैश्विक क्षमताओं वाले कार्यों के लिए भारत पसंदीदा वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि यह मांग किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि ई-कॉमर्स, प्रौद्योगिकी व बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई है। मैगजीन ने कहा, ‘‘ मांग अब केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यम एवं छोटे जीसीसी के साथ-साथ फॉर्च्यून 500 कंपनियां भी इसे बढ़ा रही हैं।’’ सीबीआरई के पट्टा सेवाओं से जुड़े भारत के प्रबंध निदेशक राम चंदनानी ने कहा कि कार्यस्थल लेने वाली कंपनियां हरित प्रमाणित और बेहतर सुविधाओं वाले स्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए तैयार कार्यस्थल रणनीतियां अपना रही हैं...हमें 2026 तक पट्टा गतिविधि मजबूत बने रहने की उम्मीद है।’’ इस नौ शहरों में से बेंगलुरु 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर (22 प्रतिशत) और मुंबई (16 प्रतिशत) का स्थान रहा। 


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