वो फिल्म नहीं है तुमसा नहीं देखा...गोल्ड के लिए भी कह सकते हैं...ऐसा कभी नहीं देखा। कुछ ही महीने में गोल्ड अपने पीक से 25 परसेंट टूट गया हो। लेकिन एनेलिस्ट कह रहे हैं कि यह गोल्ड की डिमांड में स्ट्रक्चरल शिफ्ट है। प्रेशियस मेटल्स की कन्सल्टेंट कंपनी मेटल्स फोकस ने कहा है कि 2026 गोल्ड डिमांड के लिए इंफ्लेक्शन पॉइंट या कहें तो वॉटरशेड (बड़ा बदलाव) मॉमेंट रहेगा क्योंकि इतिहास में पहली बार कुल डिमांड में फिजिकल इंवेस्टमेंट का शेयर ज्यूलरी से ज्यादा हो सकता है। गोल्ड की प्राइस बढऩे के कारण ज्यूलरी के लिए गोल्ड की डिमांड में डबल डिजिट करेक्शन आया है जबकि इंवेस्टमेंट तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025 में सेफ हेवन डिमांड के कारण गोल्ड में 44 साल की सबसे तेज रैली चली। जनवरी 2026 में गोल्ड रिकॉर्ड 5,595 डॉलर प्रति ट्रॉय आउंस के ऑलटाइम हाई लेवल पर पहुंच गया। मेटल्स फोकस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है 2026 की दूसरी छमाही में गोल्ड में फिर रैली आ सकती है। यदि ईरान वॉर का तेजी से समाधान निकलता है तो 2026 में गोल्ड प्राइस औसत 43 परसेंट बढक़र 4,920 डॉलर प्रति आउंस के लेवल तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में गोल्ड की कुल डिमांड 2 परसेंट घटकर 4,177 टन रहने का अनुमान है और इसका कारण ज्यूलरी परचेज और सेंट्रल बैंकों के गोल्ड परचेज में कमी है। मेटल्स फोकस के अनुसार 2026 में गोल्ड की फिजिकल इंवेस्टमेंट डिमांड 15 परसेंट बढक़र 1,615 टन तक रहने का अनुमान है। चूंकि बैंकों को फ्यूल प्राइस में तेजी और करेंसी मार्केट में अस्थिरता के कारण लगातार फोरेक्स मार्केट में दखल देना पड़ रहा है इसलिए केंद्रीय बैंकों की गोल्ड परचेज 2025 के 848 टन से 15 परसेंट घटकर 2026 में 720 टन रहने का अनुमान है। 2025 में ज्यूलरी के लिए गोल्ड की डिमांड में 19 परसेंट की कमी आई। लेकिन बार और कॉइन आदि फिजिकल गोल्ड में इंवेस्टमेंट डिमांड बढ़ रही है। फिजिकल गोल्ड की इंवेस्टमेंट डिमांड के लिए चीन बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। शेयर मार्केट में अनिश्चितता और रियल एस्टेट सैक्टर में क्राइसिस के बीच चीन के इंवेस्टर सेफ हेवन के रूप में गोल्ड पर दांव लगा रहे हैं।

