डॉट कॉम दिग्गज गूगल अब खुद डॉट कॉम से डिस्कॉम में घुस रही है। आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने एक बड़ा रेगुलेटरी बदलाव करते हुए गूगल को विशाखापत्तनम में 15 बिलियन डॉलर के डेटा सेंटर हब के लिए बिजली वितरण (डिस्कॉम) लाइसेंस देने का फैसला किया है। गूगल अपनी सहायक कंपनी रेडेन इन्फोटेक के जरिए अदाणी ग्रुप के साथ पार्टनरशिप में है। गूगल आंध्र प्रदेश में रिटेल डिस्कॉम लाइसेंस पाने वाली पहली प्राइवेट कंपनी है जो विशाखापत्तनम में तीन स्थानों पर फैले 1 गीगावॉट डेटा सेंटर कैंपस के लिए खुद ही बिजली खरीदकर उसका डिस्ट्रीब्यूशन करेगी। डेटा सेंटर की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट में 40 से 60 परसेंट केवल बिजली होती है। एआई वर्कलोड के कारण डेटा सेंटर का लगातार चलना जरूरी होता है और इसके लिए लगातार बिजली चाहिए। डिस्कॉम चूंकि लगातार बिजली की गारंटी नहीं दे पाते इसलिए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर कंट्रोल की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। इस लाइसेंस के साथ गूगल के डेटा सेंटर डिस्कॉम के बजाय सीधे जेनको (जेनरेशन कंपनी) और ग्रीन पावर कंपनियों से बिजली खरीद सकेंगे और अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क खुद मैनेज करेंगे। एनेलिस्ट कह रहे हैं कि रेगुलेटरी रिफॉर्म के लिए यह अच्छा टेंपलेट (मॉडल) है। राज्य सरकार घरेलू और किसान को सस्ती बिजली देते हैं और घाटे की भरपाई कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर से करते हैं। बिजली की औसत लागत लगभग 7-8 रुपये होती है लेकिन कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर से 12-13 रुपये तक चार्ज किए जाते हैं। इसे देखते हुए कई इंडस्ट्री अब अपनी खुद की (कैप्टिव) पावर जेनरेशन यूनिट लगाने लगे हैं। गूगल का डिस्कॉम लाइसेंस इस क्रॉस-सब्सिडी को बाईपास करने का तरीका है। इससे बिजली उत्पादकों को (जेनको) को बड़ा बायर मिल गया है जो खुद परचेज कॉन्ट्रेक्ट कर सकता है। आगे और अधिक बड़े बायर डिस्कॉम से अलग हो जाएंगे। हालांकि यदि कोई अन्य कंपनी आंध्रप्रदेश में डेटा सेंटर लगाती है तो उसे डिस्कॉम से ही बिजली लेनी होगी। वर्ष 2030 तक भारत के डेटा सेंटर सैक्टर में कुल 200 बिलियन डॉलर का इंवेस्टमेंट होगा जिससे कैपेसिटी 2030 तक 5 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है।