भारत ने एथेनॉल आधारित फ्यूल की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 48 सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर ई85 एथेनॉल की बिक्री शुरू कर दी है। ई85 में 85 परसेंट एथेनॉल और 15 परसेंट पेट्रोल होता है तथा इसे ई20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 प्रति लीटर सस्ता रखा गया है। सरकार की योजना इस नेटवर्क को दिसंबर 2026 तक 500 पेट्रोल पंपों और 2027 के अंत तक लगभग 5 हजार पंपों तक पहुंचाने की है। इस पहल का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, एथेनॉल की मांग बढ़ाना, स्वच्छ फ्यूल को बढ़ावा देना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है। भारत पहले ही ई20 ब्लेंड का टार्गेट हासिल कर चुका है और अब ई85 तथा ई100 जैसे फ्यूल की ओर बढ़ रहा है। सरकार का अनुमान है कि इस विस्तार से 2030-31 तक देश में कुल एथेनॉल मिश्रण स्तर लगभग 26 परसेंट तक पहुंच सकता है। हालांकि ई85 केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन वाहन निर्माता ऐसे मॉडल बाजार में उतारना शुरू कर चुके हैं। आप जानते हैं 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हीरो मोटोकॉर्प ने दो फ्लेक्स फ्यूल बाइक और मारुति सुजुकी ने फ्लेक्सफ्यूल वैगन आर लॉन्च की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने पिछले दिनों कहा था कि शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर, पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में 50 से 100 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन शुरू किए जाएंगे। पुरी के अनुसार देश का पेट्रोलियम इंपोर्ट बिल लगभग 120 बिलियन डॉलर है और यदि यूरो-6 मानक वाले वेहीकल्स को ई100 के अनुरूप बनाया जाए तो इस बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। पुरी ने कहा कि यदि देश में बनने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से आधे फ्लेक्स-फ्यूल अनुकूल हो जाएं, तो अतिरिक्त 311.8 करोड़ लीटर एथेनॉल की मांग पैदा हो सकती है। इससे किसानों को लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। भारत पहले ही पेट्रोल में 20 परसेंट एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है, जो 2014 में केवल 1.5 परसेंट था। मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के कारण 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के इंपोर्ट की सेविंग से देश को 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है ताकि उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल और अन्य वैकल्पिक फ्यूल का व्यापक उपयोग संभव हो सके। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में ई85 और ई100 जैसे फ्यूल शामिल हैं। इसी तरह सरकार ने ई100 बायोडीजल, हाइड्रोजन-सीएनजी मिक्सचर और डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्सचर को भी शामिल किया गया है।