स्थानीय शेयर बाजारों में सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही और दोनों मानक सूचकांक...बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी नुकसान में रहे। दुनिया के अन्य प्रमुख शेयर बाजारों में नरमी तथा कच्चे तेल के दाम में फिर से तेजी से बीएसई सेंसेक्स 719 अंक लुढक़ गया जबकि एनएसई निफ्टी में 244 अंक की गिरावट आई। कारोबारियों के अनुसार, विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 प्रतिशत टूटकर 73,524.26 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 924.4 अंक तक लुढक़ गया था। पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 243.70 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,123 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, निफ्टी 296.55 अंक तक लुढक़ गया था। सेंसेक्स के शेयरों में इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में प्रमुख रूप से गिरावट रहे। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल शामिल हैं। बएसई में सूचीबद्ध शेयरों में से 3,117 में गिरावट आई जबकि 1,249 लाभ में रहे। वहीं 171 के भाव अपरिवर्तित रहे। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लि. के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के अनुसार लेबनान में इजराइल की कार्रवाई के जवाब में ईरान के इजराइल पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत तीन परसेंट बढक़र लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे महंगाई और बाह्य क्षेत्र के दबावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिंस के दाम बढऩे से महंगाई, कमजोर मानसून रहने का अनुमान और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी से निकट भविष्य में चुनौतियां बनी रहने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर, एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों में मुनाफावसूली के साथ ही स्पेसएक्स के आईपीओ से पहले नकदी बढ़ाने के लिए की गई बिकवाली ने जोखिम से बचाव को लेकर वैश्विक धारणा को और मजबूत किया है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, पश्चिम एशिया में तनाव बढऩे के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता आई है। इससे कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। साथ ही, ओवरवेल्यू हो जाने के कारण ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में भी बिकवाली देखी गई है। निवेशक एआई की अगुवाई में तेजी के बने रहने पर सवाल उठाने लगे हैं। वास्तव में मूल्यांकन अधिक होने से निवेशकों के अब अधिक निवेश से बचने के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। हालांकि, इसे रुख में बदलाव कहना अभी जल्दबाजी होगी।

