चीन से भारत में आने वाले फिनिश्ड स्टील के इंपोर्ट में अप्रैल में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीन से तैयार स्टील का इंपोर्ट एक साल पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक बढक़र कम से कम दो वर्ष के पीक लेवल पर पहुंच गया। इससे चीनी स्टील इंपोर्ट पर टैरिफ बढ़ा देने के बावजूद डंपिंग का खतरा बढ़ गया है। अप्रैल में चीन ने भारत को लगभग 2.32 लाख मीट्रिक टन तैयार स्टील एक्सपोर्ट किया। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रॉ-स्टील उत्पादक है। भारत ने दिसंबर में कुछ स्टील कैटेगरी पर तीन वर्ष के लिए इंपोर्ट टैरिफ लगा दिया था। इन शुल्कों से चीन से होने वाले इंपोर्ट में कुछ समय के लिए कमी आई थी, लेकिन अब फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार चीन से आने वाले फिनिश्ड स्टील उत्पादों में सबसे बड़ा हिस्सा हॉट-रोल्ड कॉइल्स का था, जबकि उसके बाद स्टेनलेस स्टील उत्पादों का स्थान रहा। हॉट-रोल्ड कॉइल्स पर इंपोर्ट ड्यूटी लागू है, लेकिन स्टेनलेस स्टील उत्पाद इस शुल्क के दायरे से बाहर हैं। स्टेनलेस स्टील निर्माता कंपनी जिंदल स्टेनलेस के सीईओ तरुण खुल्बे ने कहा कि चीन का सस्ता स्टेनलेस स्टील इंडियन स्टील इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ चीनी स्टील वाया वियतनाम भारत पहुंच रहा हैं। भारत और आसियान के बीच एफटीए के कारण वियतनाम चीन की कंपनियां वियतनाम का फायदा उठा रही हैं। अप्रैल में वियतनाम से भारत को तैयार स्टील एक्सपोर्ट चार गुना बढक़र लगभग 59 हजार टन पहुंच गया। चीन का हॉट-रोल्ड स्टील भारतीय स्टील की तुलना में11 डॉलर से 37 डॉलर प्रति टन तक सस्ता है। कमोडिटी कन्सल्टेंट कंपनी बिगमिंट के अनुसार अप्रैल में भारत फिर से नेट इम्पोर्टर बन गया। हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चीन से भारत को स्टील एक्सपोर्ट 39.4 परसेंट घटकर लगभग 15 लाख टन रह गया था और भारत नेट एक्सपोर्टर बना हुआ था। एनेलिस्ट्स के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत में तैयार स्टील की खपत बढक़र 1.30 करोड़ टन पहुंच गई, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 8.2 परसेंट अधिक है।