कर्नाटक में ईवी की बढ़ती संख्या अब बिजली खपत पर भी असर दिखाने लगी है। अप्रैल और मई के दौरान राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने ईवी के कारण बिजली मांग में करीब 2 परसेंट बढ़ोतरी दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार यह बढ़ोतरी सिर्फ नए वाहनों की वजह से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद ईवी के ज्यादा इस्तेमाल के कारण भी हुई है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन मोबिलिटी को लेकर बढ़ती जागरूकता, पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतें और वैश्विक तेल संकट के चलते ईवी बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही हाईवे और सार्वजनिक स्थानों पर फास्ट-चार्जिंग स्टेशनों की मांग भी बढ़ गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य ऊर्जा विभाग निजी कंपनियों के साथ साझेदारी और समझौते करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत सोलर एनएबल्ड फास्ट-चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। ईवी उपभोक्ताओं को चार श्रेणियों — रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और एलटी (6-सी) — में बांटा गया है, जिन पर अलग-अलग बिजली टैरिफ लागू होते हैं। हालांकि पिछले दो महीनों में सभी श्रेणियों में बिजली मांग बढ़ी है। ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में केंपेगोडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास सोलर-इनेबल्ड ईवी चार्जिंग स्टेशन मौजूद है। पूरे कर्नाटक में सरकारी और निजी कंपनियों को मिलाकर करीब 8 हजार चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें से लगभग 50 परसेंट बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में स्थित हैं।