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10-06-2026

मां को छोड़ा तो प्रोपर्टी ट्रांसफर हो जाएगा कैंसल: सुप्रीम कोर्ट

  •  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति को आदेश दिया कि वह अपनी 74 वर्षीय विधवा मां को घर वापस लाए और उसकी देखभाल करे। मामला तब सामने आया जब बेटे ने अपनी मां से मिली संपत्ति को अपने नाम कराने के बाद उसकी देखभाल करना बंद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें मां के नाम संपत्ति वापस करने का निर्देश दिया गया था। मां ने आरोप लगाया था कि बेटे ने उससे संपत्ति का गिफ्ट डीड (दान पत्र) करवा लिया, लेकिन बाद में उसकी देखभाल नहीं की। इसके बाद मां ने संपत्ति वापस लेने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेटे का अपनी मां के प्रति व्यवहार बहुत चौंकाने वाला और अस्वीकार्य था। अदालत ने कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को संपत्ति देना इस उम्मीद के साथ होता है कि बच्चे उनकी देखभाल करेंगे। अदालत ने कहा कि बेटे को अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहकर उसकी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। केवल संपत्ति हासिल कर लेना और उसके बाद माता-पिता को छोड़ देना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून का उद्देश्य बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा करना है। अगर कोई बेटा या बेटी माता-पिता की देखभाल नहीं करता, तो संपत्ति का ट्रांसफर रद्द किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि बेटे का व्यवहार यह दिखाता है कि संपत्ति मिलने के बाद उसकी जिम्मेदारी और सोच बदल गई। मां ने अपना जीवन बेटे के लिए समर्पित किया, लेकिन बेटे ने उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को मां को वापस घर लाने और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार करने को कहा। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि परिवार के विवादों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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मां को छोड़ा तो प्रोपर्टी ट्रांसफर हो जाएगा कैंसल: सुप्रीम कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति को आदेश दिया कि वह अपनी 74 वर्षीय विधवा मां को घर वापस लाए और उसकी देखभाल करे। मामला तब सामने आया जब बेटे ने अपनी मां से मिली संपत्ति को अपने नाम कराने के बाद उसकी देखभाल करना बंद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें मां के नाम संपत्ति वापस करने का निर्देश दिया गया था। मां ने आरोप लगाया था कि बेटे ने उससे संपत्ति का गिफ्ट डीड (दान पत्र) करवा लिया, लेकिन बाद में उसकी देखभाल नहीं की। इसके बाद मां ने संपत्ति वापस लेने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेटे का अपनी मां के प्रति व्यवहार बहुत चौंकाने वाला और अस्वीकार्य था। अदालत ने कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को संपत्ति देना इस उम्मीद के साथ होता है कि बच्चे उनकी देखभाल करेंगे। अदालत ने कहा कि बेटे को अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहकर उसकी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। केवल संपत्ति हासिल कर लेना और उसके बाद माता-पिता को छोड़ देना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून का उद्देश्य बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा करना है। अगर कोई बेटा या बेटी माता-पिता की देखभाल नहीं करता, तो संपत्ति का ट्रांसफर रद्द किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि बेटे का व्यवहार यह दिखाता है कि संपत्ति मिलने के बाद उसकी जिम्मेदारी और सोच बदल गई। मां ने अपना जीवन बेटे के लिए समर्पित किया, लेकिन बेटे ने उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को मां को वापस घर लाने और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार करने को कहा। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि परिवार के विवादों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।


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