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17-04-2026

एक्टिव ट्रेडिंग अकाउंट्स में 36 लाख की रिकॉर्ड गिरावट

  •  शेयर बाजार में जारी तेजी के बावजूद एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (हृस्श्व) पर एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या में रिकॉर्ड 36 लाख की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद कुल एक्टिव अकाउंट्स घटकर करीब 4.57 करोड़ रह गए हैं। यह गिरावट पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ती रिटेल भागीदारी के ट्रेंड के विपरीत है और यह संकेत देती है कि निवेशकों का एक बड़ा वर्ग फिलहाल बाजार से दूरी बना रहा है या कम सक्रिय हो गया है। इस बदलाव का असर ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई दे रहा है।  आंकड़ों के मुताबिक, देश की प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियों—जैसे ज़ेरोधा, ग्रो, अपस्टॉक्स, एंजेल वन और ढ्ढष्टढ्ढष्टढ्ढ सिक्योरिटीज—में एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या या तो स्थिर रही है या हल्की गिरावट दर्ज की गई है।  खासतौर पर डिस्काउंट ब्रोकर्स, जिन्होंने पिछले वर्षों में तेजी से नए निवेशक जोड़े थे, अब यूजऱ एंगेजमेंट में कमी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकॉर्ड गिरावट के पीछे कई कारण हैं। बाजार में हालिया तेजी के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई है, जिससे कई रिटेल निवेशकों ने ट्रेडिंग कम कर दी है। इसके अलावा, बाजार में बढ़ती वोलैटिलिटी ने भी नए और छोटे निवेशकों को सतर्क कर दिया है। लगातार उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम लेने की प्रवृत्ति में कमी आई है। एक और अहम कारण निवेश के विकल्पों में बदलाव है। निवेशक अब केवल इक्विटी ट्रेडिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि म्यूचुअल फंड, स्ढ्ढक्क, बॉन्ड्स और ढ्ढक्कह्र जैसे विकल्पों की ओर तेजी से झुक रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि डिमैट अकाउंट्स की कुल संख्या बढऩे के बावजूद, उनमें से सक्रिय रहने वाले निवेशकों की संख्या घट रही है। दिलचस्प रूप से, ट्रेडिंग वॉल्यूम में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई है। इसका मतलब है कि बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या कम हुई है, लेकिन जो निवेशक सक्रिय हैं, उनकी ट्रेडिंग तीव्रता अधिक बनी हुई है। यह ट्रेंड ब्रोकरेज कंपनियों के लिए एक नई चुनौती पेश करता है, जहां अब केवल नए अकाउंट खोलना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें लगातार सक्रिय बनाए रखना भी जरूरी हो गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है और इसे बाजार के एक ‘कूलिंग ऑफ’ फेज के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसे ही बाजार में स्थिरता लौटेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या फिर से बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, हृस्श्व में एक्टिव अकाउंट्स में आई 36 लाख की यह रिकॉर्ड गिरावट बाजार के बदलते स्वभाव, निवेशकों की रणनीति में बदलाव और ब्रोकरेज इंडस्ट्री के सामने उभरती नई चुनौतियों को उजागर करती है। यह संकेत जरूर है कि रिटेल भागीदारी अब अधिक सोच-समझकर और चयनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है।

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एक्टिव ट्रेडिंग अकाउंट्स में 36 लाख की रिकॉर्ड गिरावट

 शेयर बाजार में जारी तेजी के बावजूद एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (हृस्श्व) पर एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या में रिकॉर्ड 36 लाख की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद कुल एक्टिव अकाउंट्स घटकर करीब 4.57 करोड़ रह गए हैं। यह गिरावट पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ती रिटेल भागीदारी के ट्रेंड के विपरीत है और यह संकेत देती है कि निवेशकों का एक बड़ा वर्ग फिलहाल बाजार से दूरी बना रहा है या कम सक्रिय हो गया है। इस बदलाव का असर ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई दे रहा है।  आंकड़ों के मुताबिक, देश की प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियों—जैसे ज़ेरोधा, ग्रो, अपस्टॉक्स, एंजेल वन और ढ्ढष्टढ्ढष्टढ्ढ सिक्योरिटीज—में एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या या तो स्थिर रही है या हल्की गिरावट दर्ज की गई है।  खासतौर पर डिस्काउंट ब्रोकर्स, जिन्होंने पिछले वर्षों में तेजी से नए निवेशक जोड़े थे, अब यूजऱ एंगेजमेंट में कमी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकॉर्ड गिरावट के पीछे कई कारण हैं। बाजार में हालिया तेजी के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई है, जिससे कई रिटेल निवेशकों ने ट्रेडिंग कम कर दी है। इसके अलावा, बाजार में बढ़ती वोलैटिलिटी ने भी नए और छोटे निवेशकों को सतर्क कर दिया है। लगातार उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम लेने की प्रवृत्ति में कमी आई है। एक और अहम कारण निवेश के विकल्पों में बदलाव है। निवेशक अब केवल इक्विटी ट्रेडिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि म्यूचुअल फंड, स्ढ्ढक्क, बॉन्ड्स और ढ्ढक्कह्र जैसे विकल्पों की ओर तेजी से झुक रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि डिमैट अकाउंट्स की कुल संख्या बढऩे के बावजूद, उनमें से सक्रिय रहने वाले निवेशकों की संख्या घट रही है। दिलचस्प रूप से, ट्रेडिंग वॉल्यूम में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई है। इसका मतलब है कि बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या कम हुई है, लेकिन जो निवेशक सक्रिय हैं, उनकी ट्रेडिंग तीव्रता अधिक बनी हुई है। यह ट्रेंड ब्रोकरेज कंपनियों के लिए एक नई चुनौती पेश करता है, जहां अब केवल नए अकाउंट खोलना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें लगातार सक्रिय बनाए रखना भी जरूरी हो गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है और इसे बाजार के एक ‘कूलिंग ऑफ’ फेज के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसे ही बाजार में स्थिरता लौटेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या फिर से बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, हृस्श्व में एक्टिव अकाउंट्स में आई 36 लाख की यह रिकॉर्ड गिरावट बाजार के बदलते स्वभाव, निवेशकों की रणनीति में बदलाव और ब्रोकरेज इंडस्ट्री के सामने उभरती नई चुनौतियों को उजागर करती है। यह संकेत जरूर है कि रिटेल भागीदारी अब अधिक सोच-समझकर और चयनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है।


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