मार्च महीने में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च के दौरान करीब 3.96 लाख करोड़ की इक्विटी एसेट्स बाजार से निकाल लीं। यह हाल के समय की सबसे बड़ी मासिक गिरावट में से एक मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में जहां एफपीआई की कुल हिस्सेदारी 31.53 लाख करोड़ थी, वह मार्च में घटकर 27.57 लाख करोड़ रह गई। यानी सिर्फ एक महीने में ही बड़े पैमाने पर निवेश घटा है, जिससे बाजार की दिशा पर दबाव साफ नजर आया। कुल मिलाकर, सभी देशों के एफपीआई निवेशकों ने मिलकर करीब 9.31 लाख करोड़ की इक्विटी एसेट्स में कमी दर्ज की है। इससे उनकी कुल होल्डिंग घटकर 62.47 लाख करोड़ रह गई, जो पहले 71.78 लाख करोड़ थी। यह गिरावट बताती है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। देशों के हिसाब से देखें तो अमेरिका अब भी भारतीय बाजार में सबसे बड़ा निवेशक बना हुआ है, लेकिन वहीं से सबसे ज्यादा बिकवाली भी देखने को मिली है। इसके बाद लक्ज़मबर्ग और सिंगापुर दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जहां से भी निवेश में कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में बदलाव और अन्य बाजारों में बेहतर अवसर। इसके अलावा, मुनाफावसूली भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जहां निवेशक ऊंचे स्तर पर शेयर बेचकर प्रोफिट बुक कर रहे हैं। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बावजूद बाजार की बुनियादी स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं मानी जा रही। घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो बाजार को सहारा दे रही है। फिर भी, एफपीआई की चाल आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, मार्च का महीना यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक फिलहाल सावधानी के मूड में हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर फैसले लें।
