मार्केट कैप के लिहाज से देश की सबसे बड़ी प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लि. के शेयरों में पिछले 1 वर्ष में करीब 15 प्रतिशत की बढ़त आई है। वहीं इसके विपरीत एचडीएफसी लाइफ व आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस लि. के शेयरों में इसी दौरान क्रमश: 14 प्रतिशत व 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शेयरों के रिटर्न में यह गैप असल में वेल्यूएशन व ग्रोथ ट्रेजेक्टरी में फर्क के कारण है। किसी भी लाइफ इंश्योरेंस बिजनस को वेल्यू करना चुनौतीपूर्ण होता है। ईपीएस या प्रोफिट से कंपनियों की परफोर्मेंस को नहीं आंका जा सकता क्योंकि कॉस्ट जहां अपफ्रंट बुक की जाती हैं वहीं पॉलिसियों से प्रोफिट अगले कई वर्षों तक जनरेट होता है। ऐसे में लाइफ इंश्योरेंस बिजनस को वेल्यू करने के लिए Value of New Business (VNB) का उपयोग किया जाता है जिसके आधार पर Price/VNB Ratio निकाला जाता है जो पीई-मल्टीपल रेश्यो की तरह ही होता है। एसबीआई लाइफ के शेयरों में पिछले 1 वर्ष में आई बढ़त के बावजूद कंपनी के शेयर अन्य दोनों कंपनियों की तुलना में सस्ते हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार 2025-26 के फाइनेंशियल्स पर एसबीआई लाइफ के शेयर जहां 27 गुना के Price/VNB मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं वहीं एचडीएफसी लाइफ व आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के मामले में यह 29 गुना के लगभग है। एसबीआई लाइफ का Annualized Premium Equivalent (APE) जो लाइफ-इंश्योरेंस सेगमेंट में रेवेन्यू को इंडिकेट करता है, अप्रेल-दिसंबर 2025 में 16 प्रतिशत बढक़र 18520 करोड़ रुपये रहा जबकि इसी दौरान एचडीएफसी लाइफ का APE 11 प्रतिशत बढ़ा है वहीं आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ का APE 1 प्रतिशत घटा है। एसबीआई लाइफ ने इस दौरान 17 प्रतिशत की सर्वाधिक VNB ग्रोथ रिपोर्ट की है जबकि एचडीएफसी लाइफ व आईसीआईसीआई लाइफ के मामले में यह क्रमश: 7 प्रतिशत व 6 प्रतिशत है। एसबीआई लाइफ का कमीशन रेश्यो भी इस दौरान नेट प्रीमियम का 5 प्रतिशत रहा जो एचडीएफसी लाइफ के 12 प्रतिशत व आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाईफ के 11 प्रतिशत के कमीशन रेश्यो की तुलना में काफी कम है। कम कमीशन से इंश्योरेंस कंपनियों की प्रोफिटेबिलिटी को बूस्ट मिलता है।
