एफएमसीजी कंपनियों ने पिछले सालों में पोर्टफोलियो में प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर इंवेस्टमेंट का जो बीज लगाया था, खबर है कि इसकी फसल अब लहलहाने लगी है। हेयरकेयर, स्किनकेयर और डिजिटल-फस्र्ट ग्रूमिंग के प्रीमियम पोर्टफोलियो का विस्तार मास सेगमेंट के मुकाबले तेज हो रहा है। पैराशूट और लिवोन जैसे ब्रांड्स की ओनर मारिको लि. का दावा है कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसका प्रीमियम पर्सनल केयर पोर्टफोलियो डबल-डिजिट से बढ़ा है और इसका रेवेन्यू लगभग 350 करोड़ होने की उम्मीद है। कंपनी के पास बड़ा डिजिटल-फस्र्ट पोर्टफोलियो है। ऑनलाइन और स्पेशल ब्रांड वाला यह पोर्टफोलियो 2025-26 में यह 1 हजार करोड़ रुपये के लेवल को पार कर जाएगा। इसी तरह डाबर इंडिया प्रीमियम हेयर केयर रेंज का विस्तार कर रही है। प्रीमियम वेरिएंट्स में गुड़ च्यवनप्राश और रत्नप्राश मूल प्रोडक्ट की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। एफएमसीजी सैक्टर की बड़ी कंपनी इमामी लि. का मानना है कि इनोवेटिव प्रीमियमाइजेशन स्ट्रेटेजी युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कंपनी के डिजिटल-फस्र्ट ब्रांड द मैन कंपनी और ब्रिलारे ने 31 परसेंट की ग्रोथ हुई है। यही ट्रेंड ग्रूमिंग होम केयर और पैकेज्ड फूड में भी दिख रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर की सीईओ प्रिया नायर के अनुसार प्रीमियम और डिजिटल-फस्र्ट ब्रांड ग्रोथ स्ट्रेटेजी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं। मास्टीज (मास + प्रेस्टिज) और डी2सी मॉडल कंपनी की रणनीति में शामिल हैं। कंपनी के ब्रांड मिनिमैलिस्ट और ओजिवा मिलकर 11 सौ करोड़ के रन-रेट (एवरेज रेवेन्यू) तक पहुंच चुके हैं। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के अनुसार प्रीमियम फ्रेगरेंस फॉर्मेट—खासकर ओ डे परफ्यूम की डिमांड हाई ग्रोथ पर है और कंज्यूमर डियोडरेंट से अपग्रेड होकर ईडीपी (परफ्यूम) की ओर बढ़ रहे हैं।प्रीमियम पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की हाई डिमांड को क्विक-कॉमर्स ने भी सपोर्ट किया है। इससे नये प्लेयर्स भी मास प्रोडक्ट्स को प्रमोट करने का मौका मिल रहा है। रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स अब तक लीगेसी ब्रांड्स को खरीदकर रीलॉन्च कर रही थी। कंपनी ने हाल ही डी2सी ब्यूटी और पर्सनल-केयर ब्रांड पहाड़ी लोकल को खरीदा है। डाबर ने प्रीमियम आयुर्वेदिक स्किनकेयर ब्रांड रस लक्जरी ऑइल्स में स्टेक खरीदा है। डाबर ने 500 करोड़ रुपये का डाबर वेंचर फंड भी बनाया है। एनेलिस्ट्स के अनुसार प्रीमियम प्रोडक्ट्स की तरफ कंज्यूमर का यह शिफ्ट फौरी नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है और आगे यह ट्रेंड तेज ही होगा। कंसल्टिंग फर्म रेडसीअर स्ट्रेटेजी कन्सल्टेंट्स की 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट अभी लगभग 40 बिलियन डॉलर का है जो 2030 तक 100-120 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। डेलॉय के अनुसार डिमांड पैटर्न में जो शिफ्ट आ रहा है उसका बड़ा कारण क्विक कॉमर्स है। यंग बायर्स भी स्पेशल फॉर्मुलेशन और नीश ब्रांड्स ट्राई कर रहे हैं। रेडसीअर के अनुसार देश के ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट में ई-कॉमर्स का शेयर 2019-20 में लगभग 8 परसेंट से बढक़र 2024-25 में करीब 20 परसेंट हो गया जो 2030 तक यह कुल खर्च का एक-तिहाई से अधिक हो सकता है। हालांकि केवल 20 ब्रांड ऐसे हैं जिनकी सेल्स 1,500 करोड़ से अधिक है।