शेयर बाजार में डेरिवेटिव कारोबार से हो रहे नुकसान को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (स्श्वक्चढ्ढ) ने बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने बड़े ब्रोकर्स से उनके ग्राहकों के जनवरी से मार्च (चौथा क्वार्टर) तक के मुनाफा और नुकसान का पूरा डेटा मांगा है। सेबी पहले ही साल के पहले तीन क्वार्टर का डेटा ले चुका है। अब चौथे क्वार्टर का डेटा मिलने के बाद उसे पूरे साल की साफ तस्वीर मिल जाएगी कि छोटे निवेशकों ने कितना कमाया और कितना खोया। जानकारी के मुताबिक, सेबी उन 10 बड़े ब्रोकर्स से डेटा ले रहा है जिनके जरिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (हृस्श्व) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (क्चस्श्व) में करीब 90' डेरिवेटिव कारोबार होता है। पहले की रिपोर्ट में सामने आया था कि ज्यादातर छोटे निवेशकों को नुकसान हो रहा है। वित्त वर्ष 2025 में कुल नुकसान करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से काफी ज्यादा है। अब सेबी यह देखना चाहता है कि उसने जो नए नियम बनाए हैं—जैसे ट्रेडिंग के नियम कड़े करना—उनका कोई असर पड़ा है या नहीं। अगर नुकसान कम नहीं हुआ, तो सेबी आगे और सख्त नियम ला सकता है। इसमें यह भी हो सकता है कि कम आय या कम जानकारी वाले लोगों को डेरिवेटिव कारोबार करने से रोका जाए। हालांकि, सख्ती के बावजूद डेरिवेटिव कारोबार कम नहीं हुआ है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इसका कारोबार बढक़र 173 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। ग्रो, ज़ेरोधा, एंजेल वन, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी सिक्योरिटीज, कोटक सिक्योरिटीज और एसबीआई कैप सिक्योरिटीज जैसे बड़े ब्रोकर्स इस प्रक्रिया में शामिल हैं। कुल मिलाकर, सेबी का मकसद है कि आम लोग बिना समझे ज्यादा जोखिम न लें और सोच-समझकर ही निवेश करें।