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16-05-2026

कहीं आप भी तो ‘नाइट ईटिंग सिंड्रोम’ के शिकार नहीं

  •  भूख लगना और खाना दोनों ही हमारे सेहत के लिए लाभकारी होते हैं, क्योंकि भोजन से ही शरीर को काम करने की ऊर्जा मिलती है। रात के समय भी अचानक से भूख लगना शुरू हो जाती है, और हम उस भूख को शांत करने के लिए पैक्ड फूड्स का सहारा लेते हैं। कभी बिस्किट या नूडल्स खाकर छोटी भूख को शांत कर लेते हैं, लेकिन रात के समय भूख क्यों लगती है? यह बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इसे विज्ञान की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें दिन में ओवरईटिंग करने पर कंट्रोल पा लिया जाता है, लेकिन रात को भूख इतनी तेज लगती है कि बिना खाए रहा नहीं जा सकता है। यही कारण है कि कुछ रात के खाने पर संयम नहीं रख सकते। कई बार लोग नींद से उठकर खाने के लिए बैठ जाते हैं। यह सभी लक्षण खराब जीवनशैली को भी दर्शाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह अक्सर दिनचर्या और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा होता है। देर रात तक जागना भी इसका एक कारण हो सकता है। जब शरीर का प्राकृतिक भोजन समय बिगड़ जाता है, तो पाचन प्रणाली भी प्रभावित होती है। रात का समय शरीर के आराम और मरम्मत का समय माना जाता है। यदि इस समय बार-बार भोजन किया जाए, तो पाचन पर असर पड़ सकता है। धीरे-धीरे इससे वजन बढऩा और सुबह भारीपन जैसी समस्या दिख सकती है। इससे नींद भी बुरी तरीके से प्रभावित होती है और पूरा दिन शरीर में भारीपन महसूस होता है। इस सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए आयुर्वेद में कई तरीके बताए गए हैं, जिससे जीवनशैली में धीरे-धीरे सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए रात में कोशिश करें कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें और भोजन हल्का हो। आहार में तली-भुनी चीजें न हों, क्योंकि इससे भोजन को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। दूसरा तरीका है सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन। गुनगुना दूध अच्छी नींद लाने में सहायक है। इसे पीने से मन और मस्तिष्क शांत होते हैं और गहरी नींद आती है। इसके साथ ही रात के समय मोबाइल से दूरी बनाकर रखें। फोन की रोशनी नींद को प्रभावित कर सकती है। अपने आप को नाइट इटिंग सिंड्रोम से बचाकर रखें। 

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कहीं आप भी तो ‘नाइट ईटिंग सिंड्रोम’ के शिकार नहीं

 भूख लगना और खाना दोनों ही हमारे सेहत के लिए लाभकारी होते हैं, क्योंकि भोजन से ही शरीर को काम करने की ऊर्जा मिलती है। रात के समय भी अचानक से भूख लगना शुरू हो जाती है, और हम उस भूख को शांत करने के लिए पैक्ड फूड्स का सहारा लेते हैं। कभी बिस्किट या नूडल्स खाकर छोटी भूख को शांत कर लेते हैं, लेकिन रात के समय भूख क्यों लगती है? यह बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इसे विज्ञान की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें दिन में ओवरईटिंग करने पर कंट्रोल पा लिया जाता है, लेकिन रात को भूख इतनी तेज लगती है कि बिना खाए रहा नहीं जा सकता है। यही कारण है कि कुछ रात के खाने पर संयम नहीं रख सकते। कई बार लोग नींद से उठकर खाने के लिए बैठ जाते हैं। यह सभी लक्षण खराब जीवनशैली को भी दर्शाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह अक्सर दिनचर्या और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा होता है। देर रात तक जागना भी इसका एक कारण हो सकता है। जब शरीर का प्राकृतिक भोजन समय बिगड़ जाता है, तो पाचन प्रणाली भी प्रभावित होती है। रात का समय शरीर के आराम और मरम्मत का समय माना जाता है। यदि इस समय बार-बार भोजन किया जाए, तो पाचन पर असर पड़ सकता है। धीरे-धीरे इससे वजन बढऩा और सुबह भारीपन जैसी समस्या दिख सकती है। इससे नींद भी बुरी तरीके से प्रभावित होती है और पूरा दिन शरीर में भारीपन महसूस होता है। इस सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए आयुर्वेद में कई तरीके बताए गए हैं, जिससे जीवनशैली में धीरे-धीरे सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए रात में कोशिश करें कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें और भोजन हल्का हो। आहार में तली-भुनी चीजें न हों, क्योंकि इससे भोजन को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। दूसरा तरीका है सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन। गुनगुना दूध अच्छी नींद लाने में सहायक है। इसे पीने से मन और मस्तिष्क शांत होते हैं और गहरी नींद आती है। इसके साथ ही रात के समय मोबाइल से दूरी बनाकर रखें। फोन की रोशनी नींद को प्रभावित कर सकती है। अपने आप को नाइट इटिंग सिंड्रोम से बचाकर रखें। 


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