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17-09-2026

Shiseido पर व्यापारियों को देना होगा 18 प्रतिशत जीएसटी भी’

  •  बड़े यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर से लगने वाले ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) पर 18 प्रतिशत की दर से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लगेगा। हालांकि, जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी इस कर के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकेंगे। कर विशेषज्ञों ने बुधवार को यह जानकारी दी। नई यूपीआई शुल्क व्यवस्था के तहत कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर देना होगा जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये की एकसमान दर लागू होगी। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी पूरे यूपीआई लेनदेन की राशि पर नहीं, बल्कि भुगतान निपटान सेवा के लिए व्यापारियों से वसूले जाने वाले एमडीआर पर लगेगा। मसलन, 5,000 रुपये के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 20 रुपये एमडीआर बनेगा जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी यानी 3.60 रुपये का कर लगेगा। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि नई व्यवस्था से डिजिटल भुगतान क्षेत्र में जीएसटी के लिहाज से बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी से सालाना करीब 3,500-4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। मोहन ने कहा, ‘‘हालांकि, नियामकीय व्यवस्था में राहत का प्रावधान है। इन शुल्कों का भुगतान करने वाले पंजीकृत कारोबारी चुकाए गए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं, जिससे उनके कुल कर बोझ में काफी कमी आ जाएगी।’’ नांगिया ग्लोबल के कार्यकारी निदेशक (अप्रत्यक्ष कर) शिवकुमार रामजी ने कहा कि जीएसटी मूल लेनदेन राशि पर नहीं लगेगा, बल्कि केवल 0.4 प्रतिशत एमडीआर पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी-पंजीकृत बड़े कारोबारी आईटीसी का लाभ ले सकेंगे, जबकि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर एमडीआर नहीं होने से छोटे कारोबारी इससे प्रभावित नहीं होंगे। रामजी ने कहा, ‘‘जिन कारोबारियों की बिक्री जीएसटी से मुक्त वस्तुओं या सेवाओं से होती है, उनके लिए एमडीआर पर चुकाया गया जीएसटी वास्तविक लागत बन सकता है।’’ उन्होंने मौजूदा लेनदेन मात्रा के आधार पर सालाना 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त जीएसटी राजस्व का अनुमान जताया। ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि एमडीआर बैंक द्वारा कारोबारी से वसूली जाने वाली सेवा शुल्क राशि है और इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। यदि बैंक के विवरण में शुल्क और जीएसटी अलग से दर्शाया गया हो या जीएसटी का चालान उपलब्ध कराया गया हो, तो पात्र कारोबारी इसका आईटीसी लाभ ले सकता है। एकेएम ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख इकेश नागपाल ने कहा कि जीएसटी भुगतान की मूल राशि पर नहीं, बल्कि सेवा शुल्क के रूप में लिए जाने वाले एमडीआर पर लगेगा और पात्र कारोबारी इसे आईटीसी के रूप में समायोजित कर सकेंगे। नागपाल ने कहा, ‘‘2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी मासिक यूपीआई भुगतान की करीब छह लाख करोड़ रुपये की राशि पर यदि 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाए, तो उस पर जीएसटी करीब 432 करोड़ रुपये प्रति माह या 5,184 करोड़ रुपये सालाना होगा। हालांकि, छूट, रियायती दरों और एमडीआर की अधिकतम सीमा को देखते हुए वास्तविक जीएसटी संग्रह इससे कम होगा। इसके अलावा, पात्र कारोबारी आईटीसी का दावा भी कर सकेंगे, जिससे सरकार की शुद्ध अतिरिक्त जीएसटी प्राप्ति सकल संग्रह से कम रहेगी।’’

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Shiseido पर व्यापारियों को देना होगा 18 प्रतिशत जीएसटी भी’

 बड़े यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर से लगने वाले ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) पर 18 प्रतिशत की दर से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लगेगा। हालांकि, जीएसटी में पंजीकृत कारोबारी इस कर के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकेंगे। कर विशेषज्ञों ने बुधवार को यह जानकारी दी। नई यूपीआई शुल्क व्यवस्था के तहत कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर देना होगा जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये की एकसमान दर लागू होगी। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी पूरे यूपीआई लेनदेन की राशि पर नहीं, बल्कि भुगतान निपटान सेवा के लिए व्यापारियों से वसूले जाने वाले एमडीआर पर लगेगा। मसलन, 5,000 रुपये के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 20 रुपये एमडीआर बनेगा जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी यानी 3.60 रुपये का कर लगेगा। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि नई व्यवस्था से डिजिटल भुगतान क्षेत्र में जीएसटी के लिहाज से बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी से सालाना करीब 3,500-4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। मोहन ने कहा, ‘‘हालांकि, नियामकीय व्यवस्था में राहत का प्रावधान है। इन शुल्कों का भुगतान करने वाले पंजीकृत कारोबारी चुकाए गए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं, जिससे उनके कुल कर बोझ में काफी कमी आ जाएगी।’’ नांगिया ग्लोबल के कार्यकारी निदेशक (अप्रत्यक्ष कर) शिवकुमार रामजी ने कहा कि जीएसटी मूल लेनदेन राशि पर नहीं लगेगा, बल्कि केवल 0.4 प्रतिशत एमडीआर पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी-पंजीकृत बड़े कारोबारी आईटीसी का लाभ ले सकेंगे, जबकि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर एमडीआर नहीं होने से छोटे कारोबारी इससे प्रभावित नहीं होंगे। रामजी ने कहा, ‘‘जिन कारोबारियों की बिक्री जीएसटी से मुक्त वस्तुओं या सेवाओं से होती है, उनके लिए एमडीआर पर चुकाया गया जीएसटी वास्तविक लागत बन सकता है।’’ उन्होंने मौजूदा लेनदेन मात्रा के आधार पर सालाना 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त जीएसटी राजस्व का अनुमान जताया। ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि एमडीआर बैंक द्वारा कारोबारी से वसूली जाने वाली सेवा शुल्क राशि है और इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। यदि बैंक के विवरण में शुल्क और जीएसटी अलग से दर्शाया गया हो या जीएसटी का चालान उपलब्ध कराया गया हो, तो पात्र कारोबारी इसका आईटीसी लाभ ले सकता है। एकेएम ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख इकेश नागपाल ने कहा कि जीएसटी भुगतान की मूल राशि पर नहीं, बल्कि सेवा शुल्क के रूप में लिए जाने वाले एमडीआर पर लगेगा और पात्र कारोबारी इसे आईटीसी के रूप में समायोजित कर सकेंगे। नागपाल ने कहा, ‘‘2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी मासिक यूपीआई भुगतान की करीब छह लाख करोड़ रुपये की राशि पर यदि 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाए, तो उस पर जीएसटी करीब 432 करोड़ रुपये प्रति माह या 5,184 करोड़ रुपये सालाना होगा। हालांकि, छूट, रियायती दरों और एमडीआर की अधिकतम सीमा को देखते हुए वास्तविक जीएसटी संग्रह इससे कम होगा। इसके अलावा, पात्र कारोबारी आईटीसी का दावा भी कर सकेंगे, जिससे सरकार की शुद्ध अतिरिक्त जीएसटी प्राप्ति सकल संग्रह से कम रहेगी।’’


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