भारत के प्रमुख फूड और डेयरी ब्रांड्स की ग्लोबल पहचान लगातार मजबूत हो रही है। Brand Finance की Food & Drinks 2026 रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के प्रमुख फूड और डेयरी ब्रांड्स की रैंकिंग में पांच इन्डियन ब्राण्ड्स ने जगह बनाई है। इनमें अमूल, मदर डेयरी, ब्रिटानिया और नंदिनी प्रमुख हैं। इन पांच भारतीय ब्रांड्स की संयुक्त ब्रांड वैल्यू अब 9.9 बिलियन डॉलर पहुंच गई है। यह भारतीय ब्रांड्स की बढ़ती ग्लोबल स्वीकार्यता को दर्शाता है, जहां भरोसा, अफोर्डेबल प्राइस, बड़े पैमाने पर उपलब्धता और रोजमर्रा के इस्तेमाल जैसे पहलू उनकी ताकत बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ब्रांड अब केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेयरी, पैक्ड फूड, न्यूट्रिशन, स्नैकिंग और रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं जैसी नई कैटेगरी में भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। इन ब्रांडों की सबसे बड़ी ताकत उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से बनी हुई पहचान और भरोसा है। यही भरोसा उन्हें नए उत्पादों और नए बाजारों में विस्तार करने में मदद कर रहा है। अमूल ने इस रैंकिंग में भारत के प्रदर्शन की अगुवाई की है। अमूल की ब्रांड वैल्यू 22 प्रतिशत बढक़र 5 अरब डॉलर हो गई है। वह स्नशशस्र 100 रैंकिंग में पहले और Dairy 10 रैंकिंग में चौथे स्थान पर है। हालांकि, ब्रांड स्ट्रेंथ के मामले में अमूल दुनिया का सबसे मजबूत डेयरी ब्रांड बन गया है। उसे Brand Strength Index यानी क्चस्ढ्ढ में 9&/100 अंक और ्र्र+ ब्रांड स्ट्रेंथ रेटिंग मिली है। किसान-स्वामित्व वाले सहकारी मॉडल, उत्पादों की व्यापक रेंज और कई पीढिय़ों से बनी उपभोक्ता पहचान ने अमूल को भारत के सबसे भरोसेमंद घरेलू ब्रांडों में शामिल किया है। अमूल अब अपने पारंपरिक डेयरी कारोबार से आगे भी तेजी से विस्तार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल अमूल की ओर से प्रोटीन ड्रिंक्स, फ्रोजन फूड, कुकीज, ऑर्गेनिक स्टेपल्स और प्रीमियम चॉकलेट जैसी श्रेणियों में करीब 100 नए उत्पाद लॉन्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। कंपनी घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार कर रही है। खासतौर पर अमेरिका के प्रमुख बाजारों में डेयरी उत्पादों की लॉन्चिंग को उसके ग्लोबल विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मदर डेयरी ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। उसकी ब्रांड वैल्यू 22 प्रतिशत बढक़र 1.4 बिलियन डॉलर हो गई और वह स्नशशस्र 100 रैंकिंग में 60वें स्थान पर पहुंच गई। मदर डेयरी का Brand Strength Index 2025 के 70.6 अंक से बढक़र 2026 में 72.8 अंक हो गया। कंपनी रोजमर्रा के डेयरी उत्पादों को अब ज्यादा वैल्यू वाले और स्वास्थ्य केंद्रित उत्पादों में बदलने पर जोर दे रही है। उसके प्रो रेंज में हाई-प्रोटीन दही और पनीर जैसे उत्पाद शामिल हैं। कुल मिलाकर कंपनी ने अधिक वैल्यू-एडेड उत्पादों के फॉर्मेट पर जोर दिया है, जो स्वास्थ्य और सुविधा को प्राथमिकता देने वाले उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करते हैं। ब्रिटानिया ने भी भारतीय फूड ब्रांड्स की मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उसकी ब्रांड वैल्यू 17 प्रतिशत बढ़ी और वह स्नशशस्र 100 रैंकिंग में 6वें स्थान पर है। ब्रिटानिया को ्र्र्र-ब्रांड स्ट्रेंथ रेटिंग मिली है। कंपनी अपने पुराने और लोकप्रिय उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय नए उत्पादों और नए फ्लेवर के जरिए बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। बिस्किट और इससे जुड़ी श्रेणियों में 50-50 ष्ठद्बश्चश्चद्गस्र, वेजिटेरियन केक वेरिएंट और दूध मैरी गोल्ड जैसे नए उत्पादों के जरिए कंपनी इनोवेशन पर जोर दे रही है। नंदिनी की एंट्री भी भारतीय डेयरी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कर्नाटक का यह प्रमुख डेयरी ब्रांड पहली बार Brand Finance की Food 100 रैंकिंग में शामिल हुआ है। नंदिनी 71वें स्थान पर है और उसकी ब्रांड वैल्यू 1.1 बिलियन डॉलर है, जो सालाना आधार पर 4 प्रतिशत अधिक है। हाई-प्रोटीन मिल्क, प्रोबायोटिक दही और लस्सी जैसे न्यूट्रिशन-केंद्रित उत्पादों के जरिए नंदिनी बदलती उपभोक्ता जरूरतों को पूरा कर रही है। Brand Finance India के मैनेजिंग डायरेक्टर के अनुसार, भारतीय फूड और डेयरी ब्रांड यह साबित कर रहे हैं कि मजबूत घरेलू बाजार और वैश्विक विस्तार, दोनों मिलकर किसी ब्रांड की ताकत को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में गहराई से जुड़े ब्रांडों की ताकत इस साल विशेष रूप से दिखाई दी है। अमूल का दुनिया का सबसे मजबूत डेयरी ब्रांड बनना सामाजिक योगदान, सहकारी व्यवस्था, भरोसे, किफायती कीमत, गुणवत्ता, व्यापक पहुंच और उपभोक्ताओं से भावनात्मक जुड़ाव के अनोखे मेल को दर्शाता है। वहीं मदर डेयरी, ब्रिटानिया और नंदिनी का प्रदर्शन दिखाता है कि भारतीय कंपनियां घरेलू उपभोक्ता संबंधों को तेजी से ग्लोबल ब्रांड वैल्यू में बदल रही हैं। इन प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि भारत के फूड और डेयरी ब्रांड अब ब्रांड-आधारित विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इनकी बुनियादी ताकत अभी भी उपभोक्ता भरोसा, किफायती कीमत और रोजमर्रा की उपयोगिता है, लेकिन अब इसमें इनोवेशन, वैल्यू-एडेड उत्पाद और नए उपभोक्ता अवसर भी जुड़ रहे हैं। भारत में फूड कंजम्पशन तेजी से संगठित, डिजिटल और सुविधा आधारित हो रहा है। ऐसे में भारतीय ब्रांडों के पास घरेलू लोकप्रियता को वैश्विक पहचान में बदलने की बड़ी संभावना है।