इन्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद (आईआईएमए) की एक रिपोर्ट के अनुसार अब देश में टेलीविजन के दर्शकों की संख्या मैट्रो या हाई इनकम राज्यों से नहीं बल्कि रूरल, लोअर इनकम राज्यों से बढ़ेगी। यहां पर जिस प्रकार से सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हो रहे हैं, उससे यह ग्रोथ आयेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उडीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलांगना में टीवी पैनीट्रेशन और दर्शक संख्या बढऩे की सम्भावना है। ‘फ्यूचर ऑफ टीवी इन इन्डिया’ नामक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2029 तक टेलीविजन दर्शकों की संख्या दो-तीन प्रतिशत बढ़ते हुए 1.03 बिलियन पर पहुंच सकती है। यह ग्रोथ अब उन राज्यों से प्राप्त होगी, जहां पर इनकम का लेवल कम है और इन्फ्रास्ट्रक्चर भी पिछड़ा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान, उडीसा और पश्चिम बंगाल में टेलीविजन पेनीट्रेशन लेवल 2029 तक सबसे ज्यादा बढ़ेगा। यह तुलना गुजरात और तमिलनाडु जैसे हाई इनकम मार्केट्स से की गई है। तुलनात्मक अध्ययन यह बताता है कि मैट्रो शहरों में अब टेलीविजन दर्शकों की संख्या का पीक पहुंच चुका है लेकिन कम आय वाले राज्यों में विकास की सम्भावनाएं हैं। प्रो.विश्वनाथ पिनगाली और अंकुर सिन्हा के अनुसार उपयोग हेतु आय बढऩे, साक्षरता दर में सुधार और बेहतर हाउसहोल्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के चलते टीवी ओनरशिप और कन्जम्पशन बूस्ट होने की सम्भावना है। यह भी कहा कि सबसे तेजी से टीवी दर्शकों की संख्या उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलांगना में होने की सम्भावना है। देश में डिजिटल मीडिया का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है और एनेलिसिस यह कहता है कि इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या में वृद्धि टीवी दर्शक संख्या से मजबूती से जुड़ी हुई है। ग्रामीण इलाकों में साक्षरता दर बढ़ रही है और उपयोग हेतु आय भी बढ़ रही है, जो साफतौर पर यह इंगित करता है कि यहां पर टीवी का कन्जम्पशन मजबूत होगा।