केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत 2032 तक सेमीकंडक्टर विनिर्माण करने वाले शीर्ष चार देशों में शामिल हो जाएगा और 2035 तक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ चिप उत्पादक बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह देश में उपलब्ध प्रतिभा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री ने कहा कि चार चिप कंपनियां इस साल वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगी और देश की लगभग सभी प्रमुख वाहन और दूरसंचार कंपनियां उनसे सेमीकंडक्टर लेंगी। वह इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 41,863 करोड़ रुपये के निवेश वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी देने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि 2032 तक हम सेमीकंडक्टर उद्योग में शीर्ष चार देशों में होंगे और 2035 तक हम सर्वश्रेष्ठ देशों में शामिल होंगे। यह दिशा साफतौर पर दिख रही है। इसका स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकता है। वैष्णव ने बताया कि सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 10 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी है, जिनमें दो फैब (फैब्रिकेशन यूनिट) और आठ चिप असेम्बली, परिक्षण और पैकेजिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें कुल 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि जिन संयंत्रों ने पिछले साल प्रायौगिक तौर पर उत्पादन शुरू किया था, वही पहले वाणिज्यिक उत्पादन में आएंगे। इसमें केन्स और सीजी सेमी शामिल हैं। माइक्रॉन ने भी हाल ही में प्रायोगिक उत्पादन शुरू किया है। वे भी अगले महीने वाणिज्यिक उत्पादन में जाएंगे। असम में टाटा का संयंत्र इस साल के मध्य तक प्रायौगिक उत्पादन शुरू करेगा और साल के अंत तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर देगा। वैष्णव ने कहा कि इसके अलावा डिजाइन से जुड़े प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के तहत स्टार्टअप के माध्यम से 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन दिया जा रहा है, जिनका कुल परियोजना मूल्य 920 करोड़ रुपये है।