देश में डिजिटल लेवल पर पहचान बनाने वाले डायरेक्ट टू कन्ज्यूमर ब्राण्ड्स (डी2सी) का रुझान अब स्क्रीन से निकलकर शॉपिंग मॉल्स, हाई स्ट्रीट्स, एक्सपीरियंस सेंटर्स पर आ रहा है। चालू वित्त वर्ष के फस्र्ट हाफ में डी2सी ब्राण्ड्स रिटेल लीजिंग में 18 पर्सेंट का योगदान कर रहे हैं जबकि गत वित्त वर्ष समान अवधि में यह 8 पर्सेंट ही था। रियल एस्टेट कन्सल्टेंट सीबीआरई के अनुसार इस शिफ्ट के कई कारण हंै। पहली बात तो यह है कि यह शिफ्ट क्यों हो रहा है। वर्ष 2020 से 2022 के बीच अनेक डिजिटल फस्र्ट ब्राण्ड्स ने पहचान बनाई। उस समय कोविड के कारण ऑनलाइन शॉपिंग ग्राफ तेजी से बढ़ा था। ई-कॉमर्स हमारे देश में विस्तार ले रहा है, लेकिन ऑफलाइन परचेज अभी भी रिटेलिंग में डॉमिनेट कर रही है। ऐसे में मैट्रो सिटीज के बाहर कन्ज्यूमर्स तक पहुंचने के लिये ब्राण्ड्स ओमनीचैनल रूट अपना रहे हैं। फिजिकल स्टोर्स ब्राण्ड्स को ऑर्गेनिक फुटफॉल देते हैं। दूसरा टीयर टू, थ्री और फोर सिटीज में ऑफिलाइन एक्सपेंशन सस्ता है। ऑफलाइन पुश में सबसे ज्यादा फैशन और एपेरल्स सेगमेंट डॉमिनेट कर रहे हैं। डी2सी लीजिंग (2025 की पहली छमाही में) में इनकी हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रही है। होमवेयर 12 पर्सेंट, ज्वैलरी 12 पर्सेंट, हैल्थ एंड पर्सनल केयर 6 पर्सेंट और फूड एंड बेवेरेज 5 पर्सेंट का योगदान कर रहे हैं। शेष योगदान कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, हाइपरमार्केट्स, एंटरटेंमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज कर रही है। इससे साफ है कि फैशन हाई टच कैटेगरी है और इसका कारण यह है कि कन्ज्यूमर्स अपना परचेज डिसीजन फिजिकल ट्रायल, फैब्रिक टेक्सचर फील के साथ लेना ज्यादा पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त सेल्स, फेस्टीवल्स पर शॉपिंग मॉल्स, हाई स्ट्रीट्स में फुटफॉल्स ज्यादा देखने को मिलते हैं। सबसे ज्यादा 26 पर्सेंट डी2सी रिटेल लीजिंग एक्टीविटी दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिल रही है। इसके बाद बैंगलुरु में 22 पर्सेंट और हैदराबाद में 18 पर्सेंट है। 46 पर्सेंट लीज स्पेस हाई स्ट्रीट्स पर लोकेटेड है। इसके अलावा मॉल्स में यह 40 पर्सेंट है। स्टेंडएलोन स्टोर्स का योगदान करीब 14 पर्सेंट है। डी2सी ब्राण्ड्स मल्टीपल रिटेल फॉर्मेट्स पर एक्सपेरीमेंट कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार मल्टी-फॉर्मेट एप्रोच ब्राण्ड्स को ज्यादा कन्ज्यूमर सेगमेंट तक पहुंच बनाने के मदद करती है। अब चैलेंज की बात करें तो ऑफलाइन एक्सपेंशन में ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी है और ऑनलाइन के मुकाबले कॉस्ट हाई है। रेंट, स्टॉफ आदि पर कैपीटल की जरूरत अधिक होती है। प्रॉफिट की बात फुटफॉल्स, कॉस्ट कंट्रोल, ऑक्यूपेंसी मैनेजमेंट आदि पर निर्भर करती है। डी2सी ब्राण्ड्स के लिये ऑफलाइन प्लेटफॉर्म ग्रोथ और विजिबिलिटी ऑफर कर सकता है लेकिन सफलता के लिये लोकेशन, फुटफॉल्स, एक्सपीरियंस अहम है।