TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

20-05-2026

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में इंडिया ग्लोबल फ्रिंज प्लेयर

  •  पिछले साल करीब 52 लाख मेड इन इंडिया टू-व्हीलर ग्लोबल मार्केट में बिके। छोटा नहीं बहुत बड़ा फिगर है लेकिन ग्रोथ का हेडरूम भी बहुत बड़ा है। पर हाई ग्रोथ वाले ग्लोबल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में चीन चैंपियन बना हुआ है और अपनी प्रोडक्ट प्राइसिंग के कारण इंडिया इस मार्केट में फ्रिंज प्लेयर ही है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि भारत का पूरा एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो जहां पेट्रोल टू-व्हीलर्स का है वहीं चीन ईवी के लिए नये मार्केट क्रिएट कर रहा है। रिपोट्र्स के अनुसार यदि भारत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की टेक्नोलॉजी, प्राइस और सप्लाई चेन पर काम नहीं करता है तो आने वाले सालों में इस तेजी से बढ़ते ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा बिलियन डॉलर मौका चूक सकता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत कई पारंपरिक बाजारों में पेट्रोल टू-व्हीलर का बड़ा एक्सपोर्टर बना हुआ है। नेपाल, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका भारत के पेट्रोल टू-व्हीलर के बड़े एक्सर्पोट मार्केट हैं। नेपाल जैसे बाजार में भारतीय कंपनियों के पेट्रोल टू-व्हीलर का शेयर लगभग 98 परसेंट है। लेकिन भारत के इस पड़ौसी देश के इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तस्वीर बिल्कुल उलट है, जहां चीन तेजी से बाजार पर कब्जा कर रहा है। चीन विशेष रूप से उन देशों में मजबूत है जहां इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मांग तेजी से बढ़ रही है। जैसे मैक्सिको में चीन का पेट्रोल टू-व्हीलर शेयर लगभग 78 परसेंट, अर्जेंटीना में 75 से 85 परसेंट, कोलंबिया में करीब 87 परसेंट और ऑस्ट्रिया में लगभग 40 परसेंट तक पहुंच चुका है। इसके मुकाबले भारत का शेयर कई बाजारों में 10 से 20 परसेंट के बीच सीमित है। यानी टू-व्हीलर एक्सपोर्ट में भारत के लिए ग्रोथ का जो हेडरूम है उस पर चायना इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के जरिए कब्जा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चीन की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी मजबूत बैटरी सप्लाई चेन, कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है। चीन ने ईवी इंडस्ट्री में स्केल इकोनॉमी हासिल कर ली है, जिससे उसे प्राइस और सप्लाई दोनों में लीडरशिप मिल रही है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैग्नेट्स और बैटरी कंपोनेंट्स में मोनोपॉली भी उसे ग्लोबपल कंपीटिशन में आगे रखती है। भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट हालांकि घर में तेजी से बढ़ रहा है लेकिन  एक्सपोर्ट नहीं के बराबर है। वित्त वर्ष 26 में भारत ने 21 परसेंट ग्रोथ के साथ रिकॉर्ड करीब 14 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचे, लेकिन एक्सपोर्ट वॉल्यूम अभी भी हजार यूनिट्स में सीमित है, जबकि चीन लाखों यूनिट्स को ग्लोबल मार्केट में झौंक रहा है। चीन ने 2025 में 95 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का एक्सपोर्ट किया। यानी भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इकोसिस्टम अभी बहुत शुरुआती लेवल पर है और एक्सपोर्ट मार्केट में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत की टॉप 5 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों टीवीएस, बजाज, एथर, ओला और हीरो को मिलकर कोशिश करने की जरूरत है। भारत की एक और चुनौती यह है कि इनका फोकस अभी भी ज्यादातर लोकल डिमांड पूरी करने पर है जबकि चीन की कंपनियां आक्रामक रूप से ग्लोबल मार्केट में विस्तार कर रही हैं। भारत की टीवीएस मोटर जैसी कंपनियां कुछ इलेक्ट्रिक मॉडलों का लिमिटेड एक्सपोर्ट कर रही हैं लेकिन ग्लोबल स्केल में ये काफी पीछे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री बहुत तेजी से इलेक्ट्रिक होगी जिससे मांग और बढ़ेगी। इस बदलाव में वही देश आगे रहेंगे जिनके पास मजबूत बैटरी इकोसिस्टम, सस्ते उत्पादन की क्षमता और ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क होगा।

Share
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में इंडिया ग्लोबल फ्रिंज प्लेयर

 पिछले साल करीब 52 लाख मेड इन इंडिया टू-व्हीलर ग्लोबल मार्केट में बिके। छोटा नहीं बहुत बड़ा फिगर है लेकिन ग्रोथ का हेडरूम भी बहुत बड़ा है। पर हाई ग्रोथ वाले ग्लोबल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में चीन चैंपियन बना हुआ है और अपनी प्रोडक्ट प्राइसिंग के कारण इंडिया इस मार्केट में फ्रिंज प्लेयर ही है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि भारत का पूरा एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो जहां पेट्रोल टू-व्हीलर्स का है वहीं चीन ईवी के लिए नये मार्केट क्रिएट कर रहा है। रिपोट्र्स के अनुसार यदि भारत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की टेक्नोलॉजी, प्राइस और सप्लाई चेन पर काम नहीं करता है तो आने वाले सालों में इस तेजी से बढ़ते ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा बिलियन डॉलर मौका चूक सकता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत कई पारंपरिक बाजारों में पेट्रोल टू-व्हीलर का बड़ा एक्सपोर्टर बना हुआ है। नेपाल, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका भारत के पेट्रोल टू-व्हीलर के बड़े एक्सर्पोट मार्केट हैं। नेपाल जैसे बाजार में भारतीय कंपनियों के पेट्रोल टू-व्हीलर का शेयर लगभग 98 परसेंट है। लेकिन भारत के इस पड़ौसी देश के इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तस्वीर बिल्कुल उलट है, जहां चीन तेजी से बाजार पर कब्जा कर रहा है। चीन विशेष रूप से उन देशों में मजबूत है जहां इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मांग तेजी से बढ़ रही है। जैसे मैक्सिको में चीन का पेट्रोल टू-व्हीलर शेयर लगभग 78 परसेंट, अर्जेंटीना में 75 से 85 परसेंट, कोलंबिया में करीब 87 परसेंट और ऑस्ट्रिया में लगभग 40 परसेंट तक पहुंच चुका है। इसके मुकाबले भारत का शेयर कई बाजारों में 10 से 20 परसेंट के बीच सीमित है। यानी टू-व्हीलर एक्सपोर्ट में भारत के लिए ग्रोथ का जो हेडरूम है उस पर चायना इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के जरिए कब्जा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चीन की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी मजबूत बैटरी सप्लाई चेन, कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क है। चीन ने ईवी इंडस्ट्री में स्केल इकोनॉमी हासिल कर ली है, जिससे उसे प्राइस और सप्लाई दोनों में लीडरशिप मिल रही है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैग्नेट्स और बैटरी कंपोनेंट्स में मोनोपॉली भी उसे ग्लोबपल कंपीटिशन में आगे रखती है। भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट हालांकि घर में तेजी से बढ़ रहा है लेकिन  एक्सपोर्ट नहीं के बराबर है। वित्त वर्ष 26 में भारत ने 21 परसेंट ग्रोथ के साथ रिकॉर्ड करीब 14 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचे, लेकिन एक्सपोर्ट वॉल्यूम अभी भी हजार यूनिट्स में सीमित है, जबकि चीन लाखों यूनिट्स को ग्लोबल मार्केट में झौंक रहा है। चीन ने 2025 में 95 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का एक्सपोर्ट किया। यानी भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इकोसिस्टम अभी बहुत शुरुआती लेवल पर है और एक्सपोर्ट मार्केट में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत की टॉप 5 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों टीवीएस, बजाज, एथर, ओला और हीरो को मिलकर कोशिश करने की जरूरत है। भारत की एक और चुनौती यह है कि इनका फोकस अभी भी ज्यादातर लोकल डिमांड पूरी करने पर है जबकि चीन की कंपनियां आक्रामक रूप से ग्लोबल मार्केट में विस्तार कर रही हैं। भारत की टीवीएस मोटर जैसी कंपनियां कुछ इलेक्ट्रिक मॉडलों का लिमिटेड एक्सपोर्ट कर रही हैं लेकिन ग्लोबल स्केल में ये काफी पीछे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री बहुत तेजी से इलेक्ट्रिक होगी जिससे मांग और बढ़ेगी। इस बदलाव में वही देश आगे रहेंगे जिनके पास मजबूत बैटरी इकोसिस्टम, सस्ते उत्पादन की क्षमता और ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क होगा।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news