TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

20-05-2026

रुपया हो गया टैंक तो याद आया बुलियन बैंक

  •  टैंक यानी ढहना या तेजी से गिरना। ऑल इंडिया ज्यूलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल से बुलियन बैंक फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है। फेडरेशन का दावा है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी, फॉरेक्स रिजर्व पर प्रेशर कम होगा और विशालकाय ज्यूलरी इकोसिस्टम को नुकसान नहीं फायदा ही होगा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 साल तक गोल्ड नहीं खरीदने की अपील की थी। लेकिन फेडरेशन का मानना है कि इस तरह के नकारात्मक माहौल से लगभग 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। ये बुलियन बैंक होता क्या है : बुलियन बैंक सामान्य बैंकिंग सिस्टम से अलग होता है, जो गोल्ड और सिल्वर आदि डिपॉजिट, लोन पर देने और ट्रेडिंग का काम करता है। जिस तरह से बैंक कैश डिपॉजिट लेकर लोन देते हैं, उसी तरह बुलियन बैंक गोल्ड डिपॉजिट लेकर उसे ज्यूलर, मेकर और अन्य मार्केट स्टेकहोल्डर को उपलब्ध कराते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार भारतीय फैमिली के पास दुनिया का  सबसे बड़ा प्राइवेट गोल्ड रिजर्व हैं। लेकिन यह तिजोरी में बंद है और इकोनॉमिक सिस्टम में इस्तेमाल नहीं हो पाता। बुलियन बैंकिंग मॉडल इसी डेड असैट को फॉर्मल इकोनॉमी में ला सकता है। बुलियन बैंकिंग सिस्टम में लोग गोल्ड बैंक में जमा कर सकेंगे। बैंक उसकी प्यॉरिटी जांचकर सर्टिफाई करेगा और फिर ज्यूलर्स गोल्ड को उधार देगा। ज्यूलर उधार के गोल्ड से ज्यूलरी बनाएंगे और बाद में गोल्ड या उसकी वेल्यू बैंक को लौटाएंगे। इससे गोल्ड डिपॉजिटर को ब्याज या एक्स्ट्रा रिटर्न मिलेगा। यानी लॉकर में पड़ा गोल्ड सिस्टम में आ जाएगा और गोल्ड इंपोर्ट की जरूरत कम होगी। फेडरेशन का मानना है कि ज्यूलरी की डिमांड दबाने से कारीगर, पॉलिशर, हॉलमार्किंग सेंटर और एक्सपोर्ट में शामिल लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

    गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम क्यों हुई फेल : भारत सरकार पहले भी आरबीआई और बैंकों के जरिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम चला चुकी है, लेकिन यह सफल नहीं हो पाई। लोगों का सोने से भावनात्मक जुड़ाव (स्कीम मेें गोल्ड गला दिया जाता है), कम रिटर्न, जटिल प्रक्रिया और शुद्धता जांच को लेकर चिंताओं ने इसकी लोकप्रियता पर असर डाला है। फेडरेशन ने सुझाव दिया है कि इस मॉडल को इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज और गिफ्ट सिटी के साथ जोडऩे से यह ऑर्गेनाइज्ड और ट्रंासपेरेंट बुलियन ट्रेडिंग तथा गोल्ड लेंडिंग इकोसिस्टम के रूप में डवलप हो सकता है।  साथ ही फेडरेशन ने गोल्ड ईटीएफ को अपने फिजिकल गोल्ड होल्डिंग्स का एक सीमित हिस्सा ज्यूलर्स को उधार देने की अनुमति देने की मांग की है। इससे मार्केट में गोल्ड की सप्लाई बढ़ेगी और इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार, भारत के मंदिर और फैमिली के पास कुल 38 हजार टन गोल्ड है जिसकी वेल्यू करीब 3.8 से 5.4 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर के बीच है। जो भारत के साथ ही दुनिया के कई बड़े देशों के जीडीपी से भी ज्यादा है। जैसे पाकिस्तान का जीडीपी करीब 411 बिलियन डॉलर है। इसी तरह भारतीयों की तिजोरी में इटली और कनाडा जैसे एडवांस्ड देशों की इकोनॉमी बंद है। 

Share
रुपया हो गया टैंक तो याद आया बुलियन बैंक

 टैंक यानी ढहना या तेजी से गिरना। ऑल इंडिया ज्यूलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल से बुलियन बैंक फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है। फेडरेशन का दावा है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी, फॉरेक्स रिजर्व पर प्रेशर कम होगा और विशालकाय ज्यूलरी इकोसिस्टम को नुकसान नहीं फायदा ही होगा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 साल तक गोल्ड नहीं खरीदने की अपील की थी। लेकिन फेडरेशन का मानना है कि इस तरह के नकारात्मक माहौल से लगभग 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। ये बुलियन बैंक होता क्या है : बुलियन बैंक सामान्य बैंकिंग सिस्टम से अलग होता है, जो गोल्ड और सिल्वर आदि डिपॉजिट, लोन पर देने और ट्रेडिंग का काम करता है। जिस तरह से बैंक कैश डिपॉजिट लेकर लोन देते हैं, उसी तरह बुलियन बैंक गोल्ड डिपॉजिट लेकर उसे ज्यूलर, मेकर और अन्य मार्केट स्टेकहोल्डर को उपलब्ध कराते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार भारतीय फैमिली के पास दुनिया का  सबसे बड़ा प्राइवेट गोल्ड रिजर्व हैं। लेकिन यह तिजोरी में बंद है और इकोनॉमिक सिस्टम में इस्तेमाल नहीं हो पाता। बुलियन बैंकिंग मॉडल इसी डेड असैट को फॉर्मल इकोनॉमी में ला सकता है। बुलियन बैंकिंग सिस्टम में लोग गोल्ड बैंक में जमा कर सकेंगे। बैंक उसकी प्यॉरिटी जांचकर सर्टिफाई करेगा और फिर ज्यूलर्स गोल्ड को उधार देगा। ज्यूलर उधार के गोल्ड से ज्यूलरी बनाएंगे और बाद में गोल्ड या उसकी वेल्यू बैंक को लौटाएंगे। इससे गोल्ड डिपॉजिटर को ब्याज या एक्स्ट्रा रिटर्न मिलेगा। यानी लॉकर में पड़ा गोल्ड सिस्टम में आ जाएगा और गोल्ड इंपोर्ट की जरूरत कम होगी। फेडरेशन का मानना है कि ज्यूलरी की डिमांड दबाने से कारीगर, पॉलिशर, हॉलमार्किंग सेंटर और एक्सपोर्ट में शामिल लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम क्यों हुई फेल : भारत सरकार पहले भी आरबीआई और बैंकों के जरिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम चला चुकी है, लेकिन यह सफल नहीं हो पाई। लोगों का सोने से भावनात्मक जुड़ाव (स्कीम मेें गोल्ड गला दिया जाता है), कम रिटर्न, जटिल प्रक्रिया और शुद्धता जांच को लेकर चिंताओं ने इसकी लोकप्रियता पर असर डाला है। फेडरेशन ने सुझाव दिया है कि इस मॉडल को इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज और गिफ्ट सिटी के साथ जोडऩे से यह ऑर्गेनाइज्ड और ट्रंासपेरेंट बुलियन ट्रेडिंग तथा गोल्ड लेंडिंग इकोसिस्टम के रूप में डवलप हो सकता है।  साथ ही फेडरेशन ने गोल्ड ईटीएफ को अपने फिजिकल गोल्ड होल्डिंग्स का एक सीमित हिस्सा ज्यूलर्स को उधार देने की अनुमति देने की मांग की है। इससे मार्केट में गोल्ड की सप्लाई बढ़ेगी और इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार, भारत के मंदिर और फैमिली के पास कुल 38 हजार टन गोल्ड है जिसकी वेल्यू करीब 3.8 से 5.4 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर के बीच है। जो भारत के साथ ही दुनिया के कई बड़े देशों के जीडीपी से भी ज्यादा है। जैसे पाकिस्तान का जीडीपी करीब 411 बिलियन डॉलर है। इसी तरह भारतीयों की तिजोरी में इटली और कनाडा जैसे एडवांस्ड देशों की इकोनॉमी बंद है। 


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news