ओला इलेक्ट्रिक ने कहा है कि वह न्यू प्रोडक्ट लॉन्च इसी वर्ष शुरू कर देगी। कंपनी के फाउंडर भाविष अग्रवाल के अनुसार पिछले कुछ महीनों में ओला ने न्यू लॉन्च को स्लो कर दिया था। कंपनी का पूरा फोकस सर्विस और ऑपरेशनल चैलेंज को ठीक करने पर था। कंपनी को बीते एक साल में कस्टमर कंप्लेंट्स, सर्विस सेंटर्स पर लंबी देरी, स्पेयर पार्ट की कमी और रिपेयर बैकलॉग जैसे चैलेंज का सामना करना पड़ा था। अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ओला ने मौजूदा बिजनेस को स्थिर करने के लिए कई प्रोडक्ट लॉन्च रोक दिए थे। उन्होंने कहा कि कंपनी ने तय किया था कि जब तक सेल्स और वॉल्यूम दोबारा मजबूत नहीं होते नए प्रोडक्ट बाजार में नहीं उतारे जाएंगे। अब कंपनी का मानना है कि सर्विस ऑपरेशंस में सुधार और मांग में रिकवरी के बाद वह फिर से अपने प्रोडक्ट रोडमैप को आगे बढ़ाने की स्थिति में है। भाविष अग्रवाल का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि कंपनी लगातार कई साल तक तूफानी रफ्तार से बढऩे के बाद बैरियर से टकरा गई थी। वर्ष 2022 में कंपनी ने 2027 तक कई नई इलेक्ट्रिक वेहीकल कैटेगरी में एंट्री करने का प्लान सामने रखा था। इसमें नए स्कूटर प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल और इलेक्ट्रिक कार जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल थे। लेकिन कंपनी के ये सभी प्रोडक्ट प्लान देरी का शिकार हो गए। एक एनेलिस्ट के अनुसार कंपनी के कुछ प्रोडक्ट फ्यूचर क्वॉर्टर्स और फ्यूचर ईयर्स तक खिसक गए हैं। ओला ने अगस्त 2024 में ओला रोडस्टर सीरीज लॉन्च कर इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल मार्केट में प्रवेश किया था। इस लाइनअप में अब तीन मॉडल रोडस्टर, रोडस्टर एक्स और रोडस्टर प्रो मॉडल शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि खासकर उत्तर भारत में इन मोटरसाइकल्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। भाविष अग्रवाल के अनुसार उत्तर भारत में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल अपनाने की दर अभी कम है, लेकिन धीरे-धीरे इसमें तेज ग्रोथ हो रही है। उनके अनुसार रोडस्टर सीरीज की सेल्स में ग्रोथ हो रही है और कंपनी की कुल सेल्स में इनका शेयर लगभग 15 परसेंट हो चुका है। यह कंपनी के लिए बड़ी बात है क्योंकि भारत के टू-व्हीलर मार्केट में मोटरसाइकल का शेयर स्कूटर से कहीं अधिक है। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी सर्विस नेटवर्क और स्पेयर पार्ट मैनेजमेंट रही। अग्रवाल के अनुसार पहले ओला कस्टमर सर्विस रिक्वेस्ट बुक होने पर ही पार्ट ऑर्डर किया जाता था। जिससे ब्रेक पैड बदलने जैसी साधारण रिपेयर में भी 10-10 दिन तक लग जाते थे। अब कंपनी स्पेयर पार्ट्स के लिए ऑफ द शेल्फ स्ट्रेटेजी पर चल रही है। साथ ही प्रोक्यॉरमेंट सिस्टम को भी डिमांड के पूर्वानुमान आधारित मॉडल में बदला गया है। कंपनी का दावा है कि उसके सर्विस बैकलॉग में 88 परसेंट की कमी आई है और लगभग 87 परसेंट केस अब सेम डे क्लोज हो रहे हैं। अग्रवाल के अनुसार इन सुधारों का असर सेल्स पर भी दिखने लगा है। नेटवर्क इन्वेंटरी घटकर केवल 3-4 दिन रह गई है और कई जगहों पर ऑर्डर बैकलॉग बन चुका है। ओला को उम्मीद है कि चालू तिमाही में ऑर्डर 40 से 45 हजार यूनिट तक पहुंच सकते हैं।
