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20-05-2026

क्या आने वाली है ‘Super GOLD Cycle’?

  •  ग्लोबल इकोनॉमी इस समय युद्ध, महंगाई और अनिश्चितता के ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां निवेशकों का भरोसा तेजी से गोल्ड की तरफ शिफ्ट हो रहा है लेकिन इसी बीच एक ऐसा डेटा सामने आया है जिसने पूरी कमोडिटी मार्केट को चौंका दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगातार दो वर्षों तक दुनिया में 20 लाख औंस से अधिक वाले एक भी बड़े गोल्ड रिजर्व की खोज नहीं हुई। यह सिर्फ एक नॉर्मल डेटा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि दुनिया एक संभावित ‘गोल्ड सप्लाई क्राइसिस’ की तरफ बढ़ रही है। जिस समय दुनिया के सेंट्रल बैंक रिकॉर्ड स्तर पर गोल्ड खरीद रहे हैं, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में गोल्ड श्वञ्जस्न में पैसा डाल रहे हैं और जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ रहा है, उसी समय धरती से नया गोल्ड निकलना रुकता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि मार्केट एक्सपर्ट अब इसे अगले दशक का बड़ा कमोडिटी ट्रेंड मान रहे हैं।

    गोल्ड मार्केट में आखिर हो क्या रहा है : डेटा के मुताबिक 1990 और 2000 के दशक में हर साल कई बड़े गोल्ड रिजर्व खोजे जाते थे। कई वर्षों में 20 से 25 तक मेजर डिस्कवरी हुईं, लेकिन समय के साथ यह संख्या गिरती चली गई। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लगातार दो साल तक एक भी बड़ी खोज नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि दुनिया जितनी तेजी से गोल्ड इस्तेमाल कर रही है, उतनी तेजी से नया गोल्ड मिल नहीं रहा। यानी डिमांड बढ़ रही है लेकिन सप्लाई सिकुड़ रही है। यही वह स्थिति होती है जहां किसी एसेट की कीमतें लंबी अवधि में विस्फोटक तेजी दिखा सकती हैं।

    क्यों खतरनाक है यह ट्रेंड : गोल्ड केवल ज्वेलरी तक सीमित नहीं है। आज गोल्ड का इस्तेमाल सेंट्रल बैंक रिजर्व, इलेक्ट्रॉनिक्स, ्रढ्ढ चिप्स, मेडिकल टेक्नोलॉजी और हाई-एंड इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट्स में भी तेजी से बढ़ रहा है। कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने रिजर्व में गोल्ड जोड़ रहे हैं। चीन, रूस और मध्य-पूर्व के देश लगातार गोल्ड खरीद रहे हैं। दूसरी तरफ, नई माइंस ढूंढना बेहद महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। पर्यावरण नियम सख्त हो चुके हैं, माइनिंग कॉस्ट बढ़ चुकी है और कई संभावित रिजर्व राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में हैं। ऐसे में गोल्ड की नई सप्लाई आने में वर्षों लग सकते हैं।

    क्या गोल्ड फिर बनाएगा नया रिकॉर्ड : अगर इतिहास देखा जाए तो जब भी सप्लाई सीमित हुई और वैश्विक जोखिम बढ़े, गोल्ड ने लंबी बुल रन दी है। 1970 के दशक की महंगाई, 2008 का वित्तीय संकट और कोविड काल-हर बड़े संकट में गोल्ड निवेशकों का सबसे पसंदीदा सुरक्षित हथियार बना। अब 2026 में तस्वीर और ज्यादा दिलचस्प है। ईरान वॉर, वैश्विक महंगाई, कमजोर डॉलर और सेंट्रल बैंकों की एग्रेसिव खरीद ने गोल्ड के लिए परफेक्ट स्टॉर्म तैयार कर दिया है। ऐसे माहौल में यदि नई खोजें नहीं होतीं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है।

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क्या आने वाली है ‘Super GOLD Cycle’?

 ग्लोबल इकोनॉमी इस समय युद्ध, महंगाई और अनिश्चितता के ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां निवेशकों का भरोसा तेजी से गोल्ड की तरफ शिफ्ट हो रहा है लेकिन इसी बीच एक ऐसा डेटा सामने आया है जिसने पूरी कमोडिटी मार्केट को चौंका दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगातार दो वर्षों तक दुनिया में 20 लाख औंस से अधिक वाले एक भी बड़े गोल्ड रिजर्व की खोज नहीं हुई। यह सिर्फ एक नॉर्मल डेटा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि दुनिया एक संभावित ‘गोल्ड सप्लाई क्राइसिस’ की तरफ बढ़ रही है। जिस समय दुनिया के सेंट्रल बैंक रिकॉर्ड स्तर पर गोल्ड खरीद रहे हैं, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में गोल्ड श्वञ्जस्न में पैसा डाल रहे हैं और जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ रहा है, उसी समय धरती से नया गोल्ड निकलना रुकता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि मार्केट एक्सपर्ट अब इसे अगले दशक का बड़ा कमोडिटी ट्रेंड मान रहे हैं।

गोल्ड मार्केट में आखिर हो क्या रहा है : डेटा के मुताबिक 1990 और 2000 के दशक में हर साल कई बड़े गोल्ड रिजर्व खोजे जाते थे। कई वर्षों में 20 से 25 तक मेजर डिस्कवरी हुईं, लेकिन समय के साथ यह संख्या गिरती चली गई। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लगातार दो साल तक एक भी बड़ी खोज नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि दुनिया जितनी तेजी से गोल्ड इस्तेमाल कर रही है, उतनी तेजी से नया गोल्ड मिल नहीं रहा। यानी डिमांड बढ़ रही है लेकिन सप्लाई सिकुड़ रही है। यही वह स्थिति होती है जहां किसी एसेट की कीमतें लंबी अवधि में विस्फोटक तेजी दिखा सकती हैं।

क्यों खतरनाक है यह ट्रेंड : गोल्ड केवल ज्वेलरी तक सीमित नहीं है। आज गोल्ड का इस्तेमाल सेंट्रल बैंक रिजर्व, इलेक्ट्रॉनिक्स, ्रढ्ढ चिप्स, मेडिकल टेक्नोलॉजी और हाई-एंड इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट्स में भी तेजी से बढ़ रहा है। कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपने रिजर्व में गोल्ड जोड़ रहे हैं। चीन, रूस और मध्य-पूर्व के देश लगातार गोल्ड खरीद रहे हैं। दूसरी तरफ, नई माइंस ढूंढना बेहद महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। पर्यावरण नियम सख्त हो चुके हैं, माइनिंग कॉस्ट बढ़ चुकी है और कई संभावित रिजर्व राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में हैं। ऐसे में गोल्ड की नई सप्लाई आने में वर्षों लग सकते हैं।

क्या गोल्ड फिर बनाएगा नया रिकॉर्ड : अगर इतिहास देखा जाए तो जब भी सप्लाई सीमित हुई और वैश्विक जोखिम बढ़े, गोल्ड ने लंबी बुल रन दी है। 1970 के दशक की महंगाई, 2008 का वित्तीय संकट और कोविड काल-हर बड़े संकट में गोल्ड निवेशकों का सबसे पसंदीदा सुरक्षित हथियार बना। अब 2026 में तस्वीर और ज्यादा दिलचस्प है। ईरान वॉर, वैश्विक महंगाई, कमजोर डॉलर और सेंट्रल बैंकों की एग्रेसिव खरीद ने गोल्ड के लिए परफेक्ट स्टॉर्म तैयार कर दिया है। ऐसे माहौल में यदि नई खोजें नहीं होतीं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है।


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