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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

01-04-2026

स्पेस की कमी से लक्जरी सेल्स को लगे ब्रेक

  •  थिंकटेंक कह रहे हैं कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंज्यूमर इकोनॉमी है। अभी अमेरिका और चीन के बाद जापान का नंबर आता है और चौथे पायदान पर भारत है। जर्मनी पांचवे पायदान पर फिसल चुका है। भारत और जापान में भी 2300 बिलियन डॉलर की कंज्यूमर स्पेंडिंग के साथ टाई है। एनेलिस्ट कहते हैं कि भारत की कंज्यूमर इकोनॉमी का साइज भी बढ़ रहा है और कंज्यूमर अपग्रेड भी बहुत फास्ट्रेक हो रहा है। साथ में लगी टेबल के अनुसार 20 लाख से ज्यादा सालाना इनकम वाले परिवार वर्ष 2024 में 1.80 करोड़ थे जो 2034 में 4 करोड़ हो जाएंगे। इसी तरह 10 से 20 लाख की सालाना इनकम वाले परिवार 4.60 करोड़ से बढक़र 2034 तक 8.20 करोड़ हो जाने का अनुमान है। इन्हीं इलीट और एफ्लूएंट इंडियन्स को टार्गेट करने के लिए लुई वित्तॉन से लेकर डायोर तक भारत में टूट रहे हैं। लक्जरी ब्रांड्स के बैग और एक्सेसरी की डिमांड तेज हो रही है लेकिन इन कंपनियों के लिए चैलेंज कंज्यूमर तक पहुंचने का है क्योंकि इनका रिटेल नेटवर्क बहुत...बहुत ही सीमित है। हालांकि कंपनियां कस्टमर तक पहुंचने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ टाईअप कर रही हैं लेकिन लक्जरी में टच एंड फील की अपनी अहमियत होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार टॉप ग्लोबल ब्रांड्स को रिटेल नेटवर्क का विस्तार करने के लिए हाईएंड रिटेल स्पेस नहीं मिल पा रहा है। भारत में अभी केवल तीन रियल लक्जरी मॉल दो दिल्ली में डीएलएफ एंपोरियो और चाणक्य जबकि मुंबई में केवल एक जियो वल्र्ड प्ला•ाा है। एक लक्जरी मॉल के प्रमुख कहते हैं कि लुई वित्तॉन, रिचमॉन्ट और केरिंग जैसे ब्रांड्स से रिटेल स्पेस के लिए लगातार अनुरोध मिल रहे हैं। डीएलएफ के लक्जरी मॉल्स के जरिए भारत आने के लिए टॉप 15 ब्रांड्स तैयार हैं लेकिन स्पेस की कमी है। डीएलएफ एंपोरियो का विस्तार कर रहा है। लेकिन 1.60 लाख वर्गफीट का नया रिटेल स्पेस 2028 के अंत तक ही चालू हो पाएगा। नाइट फ्रेंक की वेल्थ रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 10 करोड़ से ज्यादा नेटवर्थ वाले व्यक्तियों की संख्या में अमेरिका, चीन और जापान के बाद भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। इसके अलावा बहुत तेजी से बढ़ता मिडल क्लास भी लेकिन भारत का लक्जरी गुड्स मार्केट केवल 12.1 बिलियन डॉलर का है। यह एक तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास भी रखता है। नवंबर में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल ने इंटरनेशनल ब्रांड्स के लिए मुंबई में गैलेरीज लफायते की फ्रेंचाइज खोली, जिससे लगभग 200 विदेश ब्रांड्स को इंडिया में विजिबिलिटी मिल रही है। इन दिनों चार लक्जरी ब्रांड्स पर काम चल रहा है। जिनमें एक मुंबई, एक हैदराबाद और एक गुरुग्राम में होगा। लक्जरी स्पेस की कमी के चलते कुछ हाई-एंड लेबल्स ने प्रीमियम मॉल्स में स्टोर खोले हैं। गोल्डन गूज ने दो साल में तीन स्टोर खोले हैं। लेकिन प्रादा को अभी स्टोर खोलने के लिए जगह नहीं मिली है। श्नैल का भी इंडिया में केवल एक स्टोर है। जबकि चीन में प्रादा के 14 और श्नैल के 10 आउटलेट्स हैं। लुई वित्तॉन और गूची के तो 40-50 स्टोर्स तक हैं। 

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स्पेस की कमी से लक्जरी सेल्स को लगे ब्रेक

 थिंकटेंक कह रहे हैं कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंज्यूमर इकोनॉमी है। अभी अमेरिका और चीन के बाद जापान का नंबर आता है और चौथे पायदान पर भारत है। जर्मनी पांचवे पायदान पर फिसल चुका है। भारत और जापान में भी 2300 बिलियन डॉलर की कंज्यूमर स्पेंडिंग के साथ टाई है। एनेलिस्ट कहते हैं कि भारत की कंज्यूमर इकोनॉमी का साइज भी बढ़ रहा है और कंज्यूमर अपग्रेड भी बहुत फास्ट्रेक हो रहा है। साथ में लगी टेबल के अनुसार 20 लाख से ज्यादा सालाना इनकम वाले परिवार वर्ष 2024 में 1.80 करोड़ थे जो 2034 में 4 करोड़ हो जाएंगे। इसी तरह 10 से 20 लाख की सालाना इनकम वाले परिवार 4.60 करोड़ से बढक़र 2034 तक 8.20 करोड़ हो जाने का अनुमान है। इन्हीं इलीट और एफ्लूएंट इंडियन्स को टार्गेट करने के लिए लुई वित्तॉन से लेकर डायोर तक भारत में टूट रहे हैं। लक्जरी ब्रांड्स के बैग और एक्सेसरी की डिमांड तेज हो रही है लेकिन इन कंपनियों के लिए चैलेंज कंज्यूमर तक पहुंचने का है क्योंकि इनका रिटेल नेटवर्क बहुत...बहुत ही सीमित है। हालांकि कंपनियां कस्टमर तक पहुंचने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ टाईअप कर रही हैं लेकिन लक्जरी में टच एंड फील की अपनी अहमियत होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार टॉप ग्लोबल ब्रांड्स को रिटेल नेटवर्क का विस्तार करने के लिए हाईएंड रिटेल स्पेस नहीं मिल पा रहा है। भारत में अभी केवल तीन रियल लक्जरी मॉल दो दिल्ली में डीएलएफ एंपोरियो और चाणक्य जबकि मुंबई में केवल एक जियो वल्र्ड प्ला•ाा है। एक लक्जरी मॉल के प्रमुख कहते हैं कि लुई वित्तॉन, रिचमॉन्ट और केरिंग जैसे ब्रांड्स से रिटेल स्पेस के लिए लगातार अनुरोध मिल रहे हैं। डीएलएफ के लक्जरी मॉल्स के जरिए भारत आने के लिए टॉप 15 ब्रांड्स तैयार हैं लेकिन स्पेस की कमी है। डीएलएफ एंपोरियो का विस्तार कर रहा है। लेकिन 1.60 लाख वर्गफीट का नया रिटेल स्पेस 2028 के अंत तक ही चालू हो पाएगा। नाइट फ्रेंक की वेल्थ रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 10 करोड़ से ज्यादा नेटवर्थ वाले व्यक्तियों की संख्या में अमेरिका, चीन और जापान के बाद भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। इसके अलावा बहुत तेजी से बढ़ता मिडल क्लास भी लेकिन भारत का लक्जरी गुड्स मार्केट केवल 12.1 बिलियन डॉलर का है। यह एक तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास भी रखता है। नवंबर में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल ने इंटरनेशनल ब्रांड्स के लिए मुंबई में गैलेरीज लफायते की फ्रेंचाइज खोली, जिससे लगभग 200 विदेश ब्रांड्स को इंडिया में विजिबिलिटी मिल रही है। इन दिनों चार लक्जरी ब्रांड्स पर काम चल रहा है। जिनमें एक मुंबई, एक हैदराबाद और एक गुरुग्राम में होगा। लक्जरी स्पेस की कमी के चलते कुछ हाई-एंड लेबल्स ने प्रीमियम मॉल्स में स्टोर खोले हैं। गोल्डन गूज ने दो साल में तीन स्टोर खोले हैं। लेकिन प्रादा को अभी स्टोर खोलने के लिए जगह नहीं मिली है। श्नैल का भी इंडिया में केवल एक स्टोर है। जबकि चीन में प्रादा के 14 और श्नैल के 10 आउटलेट्स हैं। लुई वित्तॉन और गूची के तो 40-50 स्टोर्स तक हैं। 


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