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14-07-2026

नये श्रम कानूनों से उद्योग और व्यवसाय पर पडऩे वाले प्रभाव पर सेमिनार आयोजित

  •  सरकार द्वारा देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली का ट्रांसफॉरमेशन करते हुए पूर्णत: डिजिटाईजेशन किया जा रहा है। यह एक क्रांतिकारी कदम है तथा इससे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से सम्बन्धित कार्यों का ऑटोमेशन किया जा रहा है। ईपीएफओ विभाग की भूमिका अब नियामक (रेग्युलेटर) के बजाय सुविधा-प्रदाता (फैसिलिटेटर) की है। विभाग का उद्देश्य देश के अधिक से अधिक कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। उपरोक्त जानकारी अजीत कुमार, अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जयपुर ने यूसीसीआई में दी। उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), उदयपुर के संयुक्ततत्वावधान में यूसीसीआई में अजीत कुमार, अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जयपुर (राजस्थान राज्य प्रभारी) के साथ नये श्रम कानूनों से उद्योग और व्यवसाय पर पडऩे वाले प्रभाव विषय पर एक परिचर्चात्मक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में यूसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंशुल मोगरा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लागू नये श्रम कानूनों के प्रावधानों के सम्बन्ध में उद्योग और व्यवसाय जगत को जागरुक करने के उद्देश्य से यूसीसीआई द्वारा परिचर्चात्मक सेमिनार का आयोजन रखा गया है। श्रम कानून के तहत ईपीएफओ के नये प्रावधान नियोक्ता एवं कार्मिक दोनों के हित में है। उपाध्यक्ष कपिल सुराणा ने बताया कि इस सत्र का आयोजन नियोक्ताओं एवं उनके कार्मिकों को लेबर कोड तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों पर प्रत्यक्ष परिचर्चा का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से रखा गया है। अजीत कुमार ने नये श्रम कानूनों के लागू होने के उपरान्त ईपीएफओ प्रावधानों में आये परिवर्तनों के बारे में जानकारी दी। केन्द्र सरकार द्वारा लागू नये प्रावधान उद्योग एवं व्यवसाय जगत तथा कार्मिकों के हित में हैं। देश के उद्योग और व्यवसाय को प्रोत्साहन प्रदान करने तथा नये रोजगार सृजन के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरु की है। उन्होंने लेबर कोड, 2020, एमनेस्टी स्कीम एवं विश्वास योजना-2026 के विभिन्न प्रावधानों, उनके उद्देश्यों, अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं तथा नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों के लिए उनके महत्व पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ग्रेड-1) प्रशांत कुमार सिन्हा ने सम्भाग के उद्यमियों से योजना के तहत नये रोजगार सृजन के माध्यम से औद्योगिक विकास में भागीदार बनने का आव्हान किया। श्री सिन्हा ने लेबर कोड, 2020, एमनेस्टी स्कीम एवं विश्वास योजना-2026 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर उपयोगी जानकारी साझा करते हुए प्रतिभागियों को विभिन्न प्रक्रियाओं एवं अनुपालन संबंधी पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन यूसीसीआई के मानद महासचिव आशीष छाबडा ने किया।

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नये श्रम कानूनों से उद्योग और व्यवसाय पर पडऩे वाले प्रभाव पर सेमिनार आयोजित

 सरकार द्वारा देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली का ट्रांसफॉरमेशन करते हुए पूर्णत: डिजिटाईजेशन किया जा रहा है। यह एक क्रांतिकारी कदम है तथा इससे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से सम्बन्धित कार्यों का ऑटोमेशन किया जा रहा है। ईपीएफओ विभाग की भूमिका अब नियामक (रेग्युलेटर) के बजाय सुविधा-प्रदाता (फैसिलिटेटर) की है। विभाग का उद्देश्य देश के अधिक से अधिक कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। उपरोक्त जानकारी अजीत कुमार, अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जयपुर ने यूसीसीआई में दी। उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), उदयपुर के संयुक्ततत्वावधान में यूसीसीआई में अजीत कुमार, अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, जयपुर (राजस्थान राज्य प्रभारी) के साथ नये श्रम कानूनों से उद्योग और व्यवसाय पर पडऩे वाले प्रभाव विषय पर एक परिचर्चात्मक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में यूसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंशुल मोगरा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लागू नये श्रम कानूनों के प्रावधानों के सम्बन्ध में उद्योग और व्यवसाय जगत को जागरुक करने के उद्देश्य से यूसीसीआई द्वारा परिचर्चात्मक सेमिनार का आयोजन रखा गया है। श्रम कानून के तहत ईपीएफओ के नये प्रावधान नियोक्ता एवं कार्मिक दोनों के हित में है। उपाध्यक्ष कपिल सुराणा ने बताया कि इस सत्र का आयोजन नियोक्ताओं एवं उनके कार्मिकों को लेबर कोड तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों पर प्रत्यक्ष परिचर्चा का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से रखा गया है। अजीत कुमार ने नये श्रम कानूनों के लागू होने के उपरान्त ईपीएफओ प्रावधानों में आये परिवर्तनों के बारे में जानकारी दी। केन्द्र सरकार द्वारा लागू नये प्रावधान उद्योग एवं व्यवसाय जगत तथा कार्मिकों के हित में हैं। देश के उद्योग और व्यवसाय को प्रोत्साहन प्रदान करने तथा नये रोजगार सृजन के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरु की है। उन्होंने लेबर कोड, 2020, एमनेस्टी स्कीम एवं विश्वास योजना-2026 के विभिन्न प्रावधानों, उनके उद्देश्यों, अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं तथा नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों के लिए उनके महत्व पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ग्रेड-1) प्रशांत कुमार सिन्हा ने सम्भाग के उद्यमियों से योजना के तहत नये रोजगार सृजन के माध्यम से औद्योगिक विकास में भागीदार बनने का आव्हान किया। श्री सिन्हा ने लेबर कोड, 2020, एमनेस्टी स्कीम एवं विश्वास योजना-2026 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर उपयोगी जानकारी साझा करते हुए प्रतिभागियों को विभिन्न प्रक्रियाओं एवं अनुपालन संबंधी पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन यूसीसीआई के मानद महासचिव आशीष छाबडा ने किया।


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