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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

13-07-2026

वेयरहाउसिंग को इंडस्ट्री का स्टेटस, फिर नगर निगम के नोटिस क्यों?

  •  राज्य सरकार द्वारा वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स एवं भंडारण गतिविधियों को औद्योगिक गतिविधि का दर्जा दिए जाने के बावजूद रीको औद्योगिक क्षेत्रों में इन गतिविधियों पर डीएलसी आधारित भारी शुल्क, नियमितीकरण शुल्क तथा अब नगर निगम की ओर से जारी नोटिसों को लेकर उद्योग जगत में गहरा असंतोष है। उद्योग संगठनों का कहना है कि एक ओर सरकार पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy), स्टाम्प ड्यूटी में छूट, कन्वर्जन चार्ज में राहत तथा प्लग एंड प्ले वेयरहाउसिंग जैसी योजनाओं से निवेश को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर रीको क्षेत्रों में इन्हीं गतिविधियों को व्यावसायिक उपयोग मानकर अलग-अलग विभागों द्वारा भारी वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार हाल ही में नगर निगम ने 300 से अधिक उद्यमियों और वेयरहाउस संचालकों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें शहरी विकास से जुड़े प्रावधानों के आधार पर शुल्क की मांग की गई है। कई मामलों में यह मांग लाखों रुपये तक पहुंच रही है। उद्योग जगत का कहना है कि जब राज्य सरकार स्वयं वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स को औद्योगिक गतिविधि के रूप में मान्यता दे चुकी है, तब ऐसे नोटिस जारी करना नई औद्योगिक नीति की भावना के विपरीत है और इससे निवेशकों में अनावश्यक भय एवं भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। राजस्थान उद्योग व्यापार महासंघ के अध्यक्ष जगदीश सोमानी के अनुसार नगर निगम द्वारा भारी शुल्क के नोटिस जारी करना नीति के विपरीत है। हाल ही में 300 से अधिक उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए। झोडवाड़ा इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद गुप्ता के अनुसार राजस्थान को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए एकरूप, पारदर्शी और उद्योग हितैषी व्यवस्था तत्काल लागू की जानी चाहिए। वेयरहाउस एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक वेयरहाउस के रेगुलाइजेशन के चार्जेज कम करने को लेकर हाल ही में उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह व रीको एमडी सुरेश कुमार ओला से मुलाकात की, जिस पर उद्योग मंत्री ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

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वेयरहाउसिंग को इंडस्ट्री का स्टेटस, फिर नगर निगम के नोटिस क्यों?

 राज्य सरकार द्वारा वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स एवं भंडारण गतिविधियों को औद्योगिक गतिविधि का दर्जा दिए जाने के बावजूद रीको औद्योगिक क्षेत्रों में इन गतिविधियों पर डीएलसी आधारित भारी शुल्क, नियमितीकरण शुल्क तथा अब नगर निगम की ओर से जारी नोटिसों को लेकर उद्योग जगत में गहरा असंतोष है। उद्योग संगठनों का कहना है कि एक ओर सरकार पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy), स्टाम्प ड्यूटी में छूट, कन्वर्जन चार्ज में राहत तथा प्लग एंड प्ले वेयरहाउसिंग जैसी योजनाओं से निवेश को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर रीको क्षेत्रों में इन्हीं गतिविधियों को व्यावसायिक उपयोग मानकर अलग-अलग विभागों द्वारा भारी वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार हाल ही में नगर निगम ने 300 से अधिक उद्यमियों और वेयरहाउस संचालकों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें शहरी विकास से जुड़े प्रावधानों के आधार पर शुल्क की मांग की गई है। कई मामलों में यह मांग लाखों रुपये तक पहुंच रही है। उद्योग जगत का कहना है कि जब राज्य सरकार स्वयं वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स को औद्योगिक गतिविधि के रूप में मान्यता दे चुकी है, तब ऐसे नोटिस जारी करना नई औद्योगिक नीति की भावना के विपरीत है और इससे निवेशकों में अनावश्यक भय एवं भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। राजस्थान उद्योग व्यापार महासंघ के अध्यक्ष जगदीश सोमानी के अनुसार नगर निगम द्वारा भारी शुल्क के नोटिस जारी करना नीति के विपरीत है। हाल ही में 300 से अधिक उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए। झोडवाड़ा इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद गुप्ता के अनुसार राजस्थान को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए एकरूप, पारदर्शी और उद्योग हितैषी व्यवस्था तत्काल लागू की जानी चाहिए। वेयरहाउस एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक वेयरहाउस के रेगुलाइजेशन के चार्जेज कम करने को लेकर हाल ही में उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह व रीको एमडी सुरेश कुमार ओला से मुलाकात की, जिस पर उद्योग मंत्री ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


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