देश में फास्ट फूड कारोबार एक बार फिर तेज़ी पकड़ता दिखाई दे रहा है। महंगाई, जीएसटी और ग्राहकों की बदलती पसंद के बावजूद बड़ी क्यूएसआर कंपनियां अब आक्रामक स्टोर विस्तार की तैयारी में जुट गई हैं। केएफसी, बर्गर किंग और मैकडॉनल्ड्स जैसे ब्रांड्स को मार्च तिमाही में मांग का अच्छा फायदा मिला, जिसके बाद कंपनियों का भरोसा और मजबूत हुआ है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2027 तक सैकड़ों नए स्टोर खोलने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। पिछले कुछ महीनों में ग्राहकों का झुकाव ‘वैल्यू मील’ और कम कीमत वाले कॉम्बो ऑफर्स की तरफ तेजी से बढ़ा है। कंपनियों ने भी इसी रुझान को समझते हुए छूट, बजट बकेट और सस्ते कॉम्बो पर जोर बढ़ाया। इसका असर यह हुआ कि लंबे समय से दबाव झेल रहा क्यूएसआर सेक्टर अब सुधार की राह पर दिखाई देने लगा है। देवयानी इंटरनेशनल, जो भारत में केएफसी और पिज्जा हट जैसे ब्रांड्स संचालित करती है, ने मार्च तिमाही में समान स्टोर बिक्री वृद्धि में 4.9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष दावर के मुताबिक यह पिछले 14 तिमाहियों का सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा। कंपनी का मानना है कि भारतीय बाजार में फास्ट फूड की मांग लगातार बढ़ती रहेगी। इसी भरोसे के साथ देवयानी वित्त वर्ष 2027 तक केएफसी के 100 से ज्यादा नए आउटलेट शुरू करने की तैयारी कर रही है। वहीं बर्गर किंग इंडिया भी लगातार मजबूत प्रदर्शन दिखा रही है। रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के चेयरमैन राजीव वर्मा ने कहा कि मार्च तिमाही में कंपनी की समान स्टोर बिक्री वृद्धि 6.3 प्रतिशत रही, जो पिछले 12 तिमाहियों की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि सप्लाई चेन सुधार, नवाचार और ऊर्जा दक्षता जैसे कदमों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बर्गर किंग आने वाले वर्षों में हर साल 60 से 80 नए रेस्टोरेंट जोडऩे की रणनीति पर काम कर रही है।
मैकडॉनल्ड्स की फ्रेंचाइज़ी संचालित करने वाली वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड ने भी मार्च तिमाही में सकारात्मक संकेत दिए हैं। पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स आउटलेट्स चलाने वाली इस कंपनी ने समान स्टोर बिक्री वृद्धि में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 68 नए स्टोर जोड़ चुकी है और अब हर साल 60 से ज्यादा नए आउटलेट खोलने का लक्ष्य रखा गया है। वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश जटिया के मुताबिक ग्राहकों की आवाजाही लगातार बेहतर हो रही है और अप्रैल में भी यही रफ्तार जारी रही। कंपनी अब नए स्टोर्स में डिजिटल डिजाइन और मैककैफे जैसे आधुनिक प्रारूपों पर विशेष ध्यान दे रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बढ़ता युवा वर्ग, बदलती जीवनशैली और बाहर खाने का बढ़ता चलन क्यूएसआर उद्योग के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। खासतौर पर दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में अब फास्ट फूड ब्रांड्स तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। जो कंपनियां पहले सिर्फ महानगरों तक सीमित थीं, अब वे छोटे शहरों और कस्बों में भी नए ग्राहकों को लक्ष्य बना रही हैं। हालांकि चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे माल की कीमतें, किराया और कर्मचारियों की लागत अब भी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रही हैं। लेकिन कंपनियों का भरोसा है कि डिजिटल ऑर्डरिंग, ग्राहक वफादारी कार्यक्रम और आकर्षक ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को लगातार जोड़े रखा जा सकता है। कुल मिलाकर, चौथी तिमाही के मजबूत नतीजों ने क्यूएसआर उद्योग में नई ऊर्जा भर दी है। कंपनियां अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि छोटे शहरों में भी अपना नेटवर्क तेजी से बढ़ाने की दौड़ में उतर चुकी हैं। आने वाले वर्षों में भारत का फास्ट फूड बाजार और ज्यादा प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प बनने वाला है।