वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सुरक्षित निवेश के कारण अमेरिकी मुद्रा के स्थिर बने रहने से मंगलवार को रुपया 10 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.29 (अस्थायी) पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि विदेशी कोषों की भारी निकासी ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा को प्रभावित किया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.16 के भाव पर खुला और कारोबार के दौरान 95.03 के ऊपरी एवं 95.31 के निचले स्तर तक गया। कारोबार के अंत में मंगलवार को रुपया 95.29 (अस्थायी) पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 10 पैसे की गिरावट है। सोमवार को रुपया 95.19 प्रति डॉलर पर रहा था, जो 34 पैसे की गिरावट है। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘वैश्विक तनाव में वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये में कमजोरी का रुख रह सकता है।’’ उन्होंने कहा कि अगर शांति वार्ता आगे बढ़ती रहती है तो रुपये में बड़ी गिरावट की आशंका कम हो सकती है। चौधरी ने कहा कि निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर-रुपये की विनिमय दर 94.90 से 95.50 के दायरे में रह सकती है।आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक तीन से पांच जून तक निर्धारित है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पांच जून को अपने निर्णयों की घोषणा करेगी। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत गिरावट के साथ 99.12 पर रहा।