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04-06-2026

कॉर्पोरेट दिग्गज जता रहे चिंता उदय कोटक ने दिया फ्यूचर में इंवेस्ट करने का मंत्र!

  •  एआई शेयरों में आई तेजी की बदौलत पहले ताइवान और फिर साउथ कोरिया ने इक्विटी मार्केट के मामले में इंडिया को पछाड़ दिया है। इंडिया के पिछडऩे की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि वह एआई टेक्नोलॉजी में निवेश के मामले में दुनिया के दूसरे देशों से काफी पीछे है। पिछले कुछ समय में एआई कंपनियों के शेयरों में काफी तेजी आई है। इसकी बदौलत ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देश इंडिया से आगे निकल गए हैं। इस बीच देश के सबसे रईस बैंकर उदय कोटक ने इंडियन कंपनियों से एआई में निवेश करने की अपील की है। कोटक महिंद्रा बैंक के कर्ता-धर्ता उदय कोटक ने एक ऐसी बात कह दी, जिसने पूरे इंडियन कॉर्पोरेट जगत के कान खड़े कर दिए। कान तो आपके और हमारे भी खड़े होने चाहिए क्योंकि उन्होंने एक आंकड़ा सामने रखा जो किसी के भी होश उड़ा दे। डेटा कहता है कि गूगल का सालाना मुनाफा 160 अरब डॉलर है, पिछली तिमाही में 62 अरब डॉलर, और मार्केट कैप 4.5 ट्रिलियन डॉलर है सोचिए, यह राशि इतनी बड़ी है कि इसमें इंडिया की लगभग सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल मुनाफा और मार्केट कैप समा जाए और तो और गूगल ने हाल ही में करीब 80 बिलियन डॉलर (करीब 7.6 लाख करोड़ रुपये) जुटाने की बात भी कही है। उदय कोटक ने इसे इंडियन कॉर्पोरेट के लिए एक ‘वेकअप कॉल’ कहा, वेकअप कॉल मतलब खतरे की घंटी। उन्होंने चेताया कि यदि इंडियन कंपनियों ने एआई, सेमीकंडक्टर और क्लाउड जैसी भविष्य की तकनीकों में आक्रामक तरीके से पैसा नहीं लगाया, तो हम बहुत पीछे छूट जाएंगे। यह तुलना सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि एक कड़वा आईना है जो दिखाता है कि हमारे और अमेरिकी टेक दिग्गजों के बीच की खाई कितनी चौड़ी हो चुकी है। चलिए इसे समझने की कोशिश करते हैं। आज हालत यह है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऐपल, अमेजऩ और मेटा जैसी कंपनियों की माली हालत कई देशों की जीडीपी से भी बड़ी हो चुकी है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि प्राइवेट कंपनियां देशों से ज्यादा ताकतवर नजर आ रही हैं। कोटक ने इंडिया इंक से इंडिया के फ्यूचर के लिए निवेश करने का आग्रह किया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दुनिया की टॉप टेक कंपनियों में से एक गूगल कैश-रिच होने के बावजूद $80 बिलियन जुटा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिलिकॉन वैली की टेक कंपनी अपने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक कंप्यूटिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाने के लिए फंड जुटा रही है। गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट 4.342 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की तीसरी बड़ी वैल्यूएबल कंपनी है। कोटक ने कहा कि गूगल का सालाना प्रॉफिट 160 बिलियन था और पिछली तिमाही में कंपनी ने $62 बिलियन का प्रॉफिट कमाया।  उन्होंने कहा कि यह इंडिया की सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल प्रॉफिट और मार्केट कैप के लगभग बराबर है। उन्होंने कहा, अब आईपीएल खत्म हो चुका है और बिजनेस पर फोकस करने का समय आ गया है। कारोबारी हलकों में अक्सर आईपीएल को क्रिकेट का बिजनेस कहा जाता है। कोटक की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इंडिया को एआई टेक्नोलॉजी में निवेश के मामले में पीछे माना जा रहा है। यही मुख्य कारण है कि इंडिया अब पिछडऩे लगा है। कुछ साल पहले एमर्जिंग मार्केट्स में इंडिया निवेशकों की पहली पसंद हुआ करता था लेकिन अब यह सबसे कम निवेश वाले बाजारों में शामिल हो गया है। पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों ने इंडियन मार्केट से काफी पैसा निकाला है। इस साल इंडिया का शेयर बाजार करीब 8 फीसदी गिर चुका है। इस साल के पहले पांच महीनों में विदेशी निवेशकों ने इंडियन  मार्केट में 24 अरब डॉलर यानी करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। पिछले साल उन्होंने 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। दूसरी तरफ ताइवान के शेयर बाजार में 58 फीसदी और साउथ कोरिया के शेयर बाजार में 88 फीसदी तेजी आई है।

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कॉर्पोरेट दिग्गज जता रहे चिंता उदय कोटक ने दिया फ्यूचर में इंवेस्ट करने का मंत्र!

 एआई शेयरों में आई तेजी की बदौलत पहले ताइवान और फिर साउथ कोरिया ने इक्विटी मार्केट के मामले में इंडिया को पछाड़ दिया है। इंडिया के पिछडऩे की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि वह एआई टेक्नोलॉजी में निवेश के मामले में दुनिया के दूसरे देशों से काफी पीछे है। पिछले कुछ समय में एआई कंपनियों के शेयरों में काफी तेजी आई है। इसकी बदौलत ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देश इंडिया से आगे निकल गए हैं। इस बीच देश के सबसे रईस बैंकर उदय कोटक ने इंडियन कंपनियों से एआई में निवेश करने की अपील की है। कोटक महिंद्रा बैंक के कर्ता-धर्ता उदय कोटक ने एक ऐसी बात कह दी, जिसने पूरे इंडियन कॉर्पोरेट जगत के कान खड़े कर दिए। कान तो आपके और हमारे भी खड़े होने चाहिए क्योंकि उन्होंने एक आंकड़ा सामने रखा जो किसी के भी होश उड़ा दे। डेटा कहता है कि गूगल का सालाना मुनाफा 160 अरब डॉलर है, पिछली तिमाही में 62 अरब डॉलर, और मार्केट कैप 4.5 ट्रिलियन डॉलर है सोचिए, यह राशि इतनी बड़ी है कि इसमें इंडिया की लगभग सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल मुनाफा और मार्केट कैप समा जाए और तो और गूगल ने हाल ही में करीब 80 बिलियन डॉलर (करीब 7.6 लाख करोड़ रुपये) जुटाने की बात भी कही है। उदय कोटक ने इसे इंडियन कॉर्पोरेट के लिए एक ‘वेकअप कॉल’ कहा, वेकअप कॉल मतलब खतरे की घंटी। उन्होंने चेताया कि यदि इंडियन कंपनियों ने एआई, सेमीकंडक्टर और क्लाउड जैसी भविष्य की तकनीकों में आक्रामक तरीके से पैसा नहीं लगाया, तो हम बहुत पीछे छूट जाएंगे। यह तुलना सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि एक कड़वा आईना है जो दिखाता है कि हमारे और अमेरिकी टेक दिग्गजों के बीच की खाई कितनी चौड़ी हो चुकी है। चलिए इसे समझने की कोशिश करते हैं। आज हालत यह है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऐपल, अमेजऩ और मेटा जैसी कंपनियों की माली हालत कई देशों की जीडीपी से भी बड़ी हो चुकी है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि प्राइवेट कंपनियां देशों से ज्यादा ताकतवर नजर आ रही हैं। कोटक ने इंडिया इंक से इंडिया के फ्यूचर के लिए निवेश करने का आग्रह किया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दुनिया की टॉप टेक कंपनियों में से एक गूगल कैश-रिच होने के बावजूद $80 बिलियन जुटा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिलिकॉन वैली की टेक कंपनी अपने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक कंप्यूटिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाने के लिए फंड जुटा रही है। गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट 4.342 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की तीसरी बड़ी वैल्यूएबल कंपनी है। कोटक ने कहा कि गूगल का सालाना प्रॉफिट 160 बिलियन था और पिछली तिमाही में कंपनी ने $62 बिलियन का प्रॉफिट कमाया।  उन्होंने कहा कि यह इंडिया की सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल प्रॉफिट और मार्केट कैप के लगभग बराबर है। उन्होंने कहा, अब आईपीएल खत्म हो चुका है और बिजनेस पर फोकस करने का समय आ गया है। कारोबारी हलकों में अक्सर आईपीएल को क्रिकेट का बिजनेस कहा जाता है। कोटक की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इंडिया को एआई टेक्नोलॉजी में निवेश के मामले में पीछे माना जा रहा है। यही मुख्य कारण है कि इंडिया अब पिछडऩे लगा है। कुछ साल पहले एमर्जिंग मार्केट्स में इंडिया निवेशकों की पहली पसंद हुआ करता था लेकिन अब यह सबसे कम निवेश वाले बाजारों में शामिल हो गया है। पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों ने इंडियन मार्केट से काफी पैसा निकाला है। इस साल इंडिया का शेयर बाजार करीब 8 फीसदी गिर चुका है। इस साल के पहले पांच महीनों में विदेशी निवेशकों ने इंडियन  मार्केट में 24 अरब डॉलर यानी करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। पिछले साल उन्होंने 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। दूसरी तरफ ताइवान के शेयर बाजार में 58 फीसदी और साउथ कोरिया के शेयर बाजार में 88 फीसदी तेजी आई है।


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