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01-04-2026

पीएसीएल घोटाला ईडी ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति सौंपी

  •  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने चंडीगढ़ स्थित पीएसीएल (पर्ल्स ग्रुप) के निवेश घोटाले में ठगे गए लोगों का पैसा लौटाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति एक विशेष समिति को सौंप दी है। यह संपत्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति को सौंपी गई है ताकि पीड़ितों के बकाये का भुगतान किया जा सके। करीब 48,000 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में धनशोधन रोधक कानून (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने 455 अचल संपत्तियों को लौटाने का आदेश दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 15,582 करोड़ रुपये है। धनशोधन रोधक कानून के तहत यह प्रावधान है कि धोखाधड़ी के शिकार लोगों, जैसे कि ठगे गए बैंक, जमाकर्ता और घर खरीदारों को उनकी संपत्ति या धन वापस लौटाया जा सकता है। अदालत का यह आदेश इसी नियम के तहत आया है। ईडी की यह जांच जुलाई, 2016 में शुरू हुई थी, जो सीबीआई द्वारा 2014 में पीएसीएल लिमिटेड और इसके दिवंगत प्रवर्तक निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ दर्ज मामले पर आधारित थी। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह प्राथमिकी दर्ज की थी। भंगू की अगस्त, 2024 में मृत्यु हो चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने फरवरी, 2016 में बाजार नियामक सेबी को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का निर्देश दिया था। इस समिति का काम संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया की निगरानी करना है। जांच के अनुसार, पीएसीएल के आरोपियों ने खेती की जमीन की बिक्री और विकास के नाम पर पूरे भारत के लाखों निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से जुटाई थी।  निवेशकों को किस्तों में पैसा जमा करने की भ्रामक योजनाओं का लालच दिया गया। ईडी ने बताया कि अधिकांश मामलों में निवेशकों को कभी जमीन नहीं दी गई और लगभग 48,000 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी बकाया है।

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पीएसीएल घोटाला ईडी ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति सौंपी

 प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने चंडीगढ़ स्थित पीएसीएल (पर्ल्स ग्रुप) के निवेश घोटाले में ठगे गए लोगों का पैसा लौटाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति एक विशेष समिति को सौंप दी है। यह संपत्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति को सौंपी गई है ताकि पीड़ितों के बकाये का भुगतान किया जा सके। करीब 48,000 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में धनशोधन रोधक कानून (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने 455 अचल संपत्तियों को लौटाने का आदेश दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 15,582 करोड़ रुपये है। धनशोधन रोधक कानून के तहत यह प्रावधान है कि धोखाधड़ी के शिकार लोगों, जैसे कि ठगे गए बैंक, जमाकर्ता और घर खरीदारों को उनकी संपत्ति या धन वापस लौटाया जा सकता है। अदालत का यह आदेश इसी नियम के तहत आया है। ईडी की यह जांच जुलाई, 2016 में शुरू हुई थी, जो सीबीआई द्वारा 2014 में पीएसीएल लिमिटेड और इसके दिवंगत प्रवर्तक निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ दर्ज मामले पर आधारित थी। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह प्राथमिकी दर्ज की थी। भंगू की अगस्त, 2024 में मृत्यु हो चुकी है। उच्चतम न्यायालय ने फरवरी, 2016 में बाजार नियामक सेबी को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का निर्देश दिया था। इस समिति का काम संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया की निगरानी करना है। जांच के अनुसार, पीएसीएल के आरोपियों ने खेती की जमीन की बिक्री और विकास के नाम पर पूरे भारत के लाखों निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अवैध रूप से जुटाई थी।  निवेशकों को किस्तों में पैसा जमा करने की भ्रामक योजनाओं का लालच दिया गया। ईडी ने बताया कि अधिकांश मामलों में निवेशकों को कभी जमीन नहीं दी गई और लगभग 48,000 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी बकाया है।


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