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01-04-2026

एनसीएलएटी ने लंपसम सैटलमेंट के खिलाफ एमएमटीसी की याचिका खारिज

  •  राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमएमटीसी की उस अपील को सोमवार को खारिज कर दिया, जिसमें 63 मून्स समर्थित नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) और कारोबारियों के बीच हुए एकमुश्त निपटान (ओटीएस) को चुनौती दी गई थी। राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने 28 नवंबर, 2025 को एनएसईएल, उसके प्रवर्तक 63 मून्स और कारोबारियों के बीच 1,950 करोड़ रुपये की निपटान योजना को मंजूरी दी थी। कारोबारियों का कुल बकाया करीब 4,300 करोड़ रुपये था। इस योजना को एमएमटीसी ने एनसीएलएटी में चुनौती देते हुए कहा था कि यह ‘‘ जनहित के प्रतिकूल’’ है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ है। सुनवाई के दौरान एनसीएलएटी ने कहा कि 11 नवंबर, 2025 के एनसीएलटी आदेश को वह पहले ही मंजूरी दे चुका है और नौ मार्च, 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा है। एमएमटीसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने हालांकि दलील दी कि यदि यह साबित हो जाए कि योजना धोखाधड़ी से प्रभावित है, तो भले ही उसे एनसीएलटी और इस न्यायाधिकरण से मंजूरी मिल चुकी हो तथा उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि कर दी हो, फिर भी उसे वापस लिया जा सकता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अपने तर्क के समर्थन में एनसीएलटी के आदेश के कई अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि आदेश में गलत तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) तथा एमपीआईडी (महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण) अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी ने योजना पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने कहा कि ये तथ्य गलत दर्ज किए गए हैं, इसलिए संबंधित आदेश धोखाधड़ी से प्रभावित है। एनसीएलएटी ने हालांकि अपने आदेश में कहा कि एकमुश्त निपटान योजना को 90 प्रतिशत से अधिक लेनदारों ने मंजूरी दी थी और मई से नवंबर, 2025 के बीच एमएमटीसी ने पारित प्रस्तावों को चुनौती नहीं दी थी तथा इसके खिलाफ मतदान किया था। एनसीएलएटी ने कहा, ‘‘ हमें कहना होगा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केवल आदेश के कुछ अनुच्छेदों की ओर ध्यान दिलाकर यह दिखाने की कोशिश की कि एनसीएलटी के साथ धोखाधड़ी हुई है, लेकिन हमारे विचार में इसे अधिक से अधिक गलत निष्कर्ष कहा जा सकता है, धोखाधड़ी नहीं।’’  न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि न तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), न ही ईओडब्ल्यू और न ही एमपीआईडी से जुड़े किसी प्राधिकरण ने इस न्यायालय में अपील दायर की और न ही इनमें से किसी ने एनसीएलटी के समक्ष योजना को चुनौती दी। 

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एनसीएलएटी ने लंपसम सैटलमेंट के खिलाफ एमएमटीसी की याचिका खारिज

 राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमएमटीसी की उस अपील को सोमवार को खारिज कर दिया, जिसमें 63 मून्स समर्थित नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) और कारोबारियों के बीच हुए एकमुश्त निपटान (ओटीएस) को चुनौती दी गई थी। राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने 28 नवंबर, 2025 को एनएसईएल, उसके प्रवर्तक 63 मून्स और कारोबारियों के बीच 1,950 करोड़ रुपये की निपटान योजना को मंजूरी दी थी। कारोबारियों का कुल बकाया करीब 4,300 करोड़ रुपये था। इस योजना को एमएमटीसी ने एनसीएलएटी में चुनौती देते हुए कहा था कि यह ‘‘ जनहित के प्रतिकूल’’ है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ है। सुनवाई के दौरान एनसीएलएटी ने कहा कि 11 नवंबर, 2025 के एनसीएलटी आदेश को वह पहले ही मंजूरी दे चुका है और नौ मार्च, 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा है। एमएमटीसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने हालांकि दलील दी कि यदि यह साबित हो जाए कि योजना धोखाधड़ी से प्रभावित है, तो भले ही उसे एनसीएलटी और इस न्यायाधिकरण से मंजूरी मिल चुकी हो तथा उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि कर दी हो, फिर भी उसे वापस लिया जा सकता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अपने तर्क के समर्थन में एनसीएलटी के आदेश के कई अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि आदेश में गलत तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) तथा एमपीआईडी (महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण) अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी ने योजना पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने कहा कि ये तथ्य गलत दर्ज किए गए हैं, इसलिए संबंधित आदेश धोखाधड़ी से प्रभावित है। एनसीएलएटी ने हालांकि अपने आदेश में कहा कि एकमुश्त निपटान योजना को 90 प्रतिशत से अधिक लेनदारों ने मंजूरी दी थी और मई से नवंबर, 2025 के बीच एमएमटीसी ने पारित प्रस्तावों को चुनौती नहीं दी थी तथा इसके खिलाफ मतदान किया था। एनसीएलएटी ने कहा, ‘‘ हमें कहना होगा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केवल आदेश के कुछ अनुच्छेदों की ओर ध्यान दिलाकर यह दिखाने की कोशिश की कि एनसीएलटी के साथ धोखाधड़ी हुई है, लेकिन हमारे विचार में इसे अधिक से अधिक गलत निष्कर्ष कहा जा सकता है, धोखाधड़ी नहीं।’’  न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि न तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), न ही ईओडब्ल्यू और न ही एमपीआईडी से जुड़े किसी प्राधिकरण ने इस न्यायालय में अपील दायर की और न ही इनमें से किसी ने एनसीएलटी के समक्ष योजना को चुनौती दी। 


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