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01-04-2026

आरबीआई को रुपये को समर्थन देने को विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना चाहिए: एसबीआई रिपोर्ट

  •  भारतीय रिजर्व बैंक को पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित रुपये को समर्थन देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना चाहिए। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढऩे से वैश्विक बाजारों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और जोखिम से बचने का रुख बना है। इन सबके बीच सोमवार को कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर गया। अंत में यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 15 पैसे की बढ़त के साथ 94.70 पर हुआ बंद हुआ। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास 10 महीने से अधिक के आयात के बराबर पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। ये आंकड़े किसी भी लिहाज से बेहद संतोषजनक हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हमारा मानना है कि 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार इतना मजबूत है कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये को सहारा देने के लिए सट्टेबाजी की गतिविधियों को रोका जा सकता है।’’ इसमें यह भी कहा गया, ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए ही करना चाहिए, जैसा कि अब तक कहा गया है। हमारा मानना ??है कि यदि आवश्यक हो तो रुपये को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने का अभी भी समय है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को नियामक द्वारा एक विशेष व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए जो उनकी दैनिक मांग (लगभग 25-30 करोड़ डॉलर) को बाजार के कामकाज से अलग करे। इससे वार्षिक आधार पर 75 से 80 अरब डॉलर की मांग को कम किया जा सकता है इससे विदेशी मुद्रा की वास्तविक मांग और आपूर्ति की गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझने और अनावश्यक अस्थिरता को रोकने के लिए नियामक द्वारा शुरू किए गए विभिन्न उपायों के प्रभाव का आकलन करने में मदद मिलेगी।

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आरबीआई को रुपये को समर्थन देने को विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना चाहिए: एसबीआई रिपोर्ट

 भारतीय रिजर्व बैंक को पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित रुपये को समर्थन देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना चाहिए। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढऩे से वैश्विक बाजारों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और जोखिम से बचने का रुख बना है। इन सबके बीच सोमवार को कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर गया। अंत में यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 15 पैसे की बढ़त के साथ 94.70 पर हुआ बंद हुआ। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास 10 महीने से अधिक के आयात के बराबर पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। ये आंकड़े किसी भी लिहाज से बेहद संतोषजनक हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हमारा मानना है कि 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार इतना मजबूत है कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये को सहारा देने के लिए सट्टेबाजी की गतिविधियों को रोका जा सकता है।’’ इसमें यह भी कहा गया, ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए ही करना चाहिए, जैसा कि अब तक कहा गया है। हमारा मानना ??है कि यदि आवश्यक हो तो रुपये को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने का अभी भी समय है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को नियामक द्वारा एक विशेष व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए जो उनकी दैनिक मांग (लगभग 25-30 करोड़ डॉलर) को बाजार के कामकाज से अलग करे। इससे वार्षिक आधार पर 75 से 80 अरब डॉलर की मांग को कम किया जा सकता है इससे विदेशी मुद्रा की वास्तविक मांग और आपूर्ति की गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझने और अनावश्यक अस्थिरता को रोकने के लिए नियामक द्वारा शुरू किए गए विभिन्न उपायों के प्रभाव का आकलन करने में मदद मिलेगी।


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