गत सप्ताह उत्तर भारत के प्लांटों में कच्चे दूध की आपूर्ति में और कमी आ गई, जिससे ग्राहकी की कमी के बावजूद भी कंपनियों ने देसी घी एवं दूध पाउडर के भाव पूर्ववत तेज बोले गये। इस वजह से कंपनियों को इंसेंटिव बढ़ाकर लिक्विड दूध की खरीद करनी पड़ी, जिससे उत्पादन लागत महंगी हो गई। आगे शादियों की खपत को देखते हुए 20 रुपए तेजी के आसार दिखाई दे रही है। आलोच्य सप्ताह उत्तर भारत के प्लांटों में लिक्विड दूध की आपूर्ति 5 लाख लीटर और घटकर 55-60 लाख लीटर दैनिक रह गई, जिस कारण कंपनियों को बढिय़ा दूध 61/63 रुपए में खरीद करना पड़ा तथा चर्चा है कि कुछ कंपनियां इंसेंटिव भी बढ़ाकर खरीद कर रही है। इन बढ़े भावों में भी अनुकूल लिक्विड दूध की उपलब्धि नहीं हो सकी। इधर बटर एवं फैट में घरेलू व निर्यातकों की भी मांग बढ़ गई है, वितरक मंडियों में भी पेय पदार्थ एवं आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ गई है, जिससे देसी घी के भाव प्रीमियम क्वालिटी के 9600/9750 रुपए प्रति टीन हो गए। टेट्रा पैक में भी कंपनियां मजबूत बोलने लगी हैं। इसके अलावा दूध पाउडर घरेलू मांग के साथ-साथ निर्यातकों की लिवाली सुधर गई है, जिससे प्रीमियम क्वालिटी का 315/328 रुपए प्रति किलो पूरी तरह अकड़ बनाए हुए है। गौरतलब है कि दक्षिण भारत का दूध पाउडर कम आ रहा है। दूसरी ओर महाराष्ट्र वाले ही उन मालों को खरीद रहे हैं। तमिलनाडु मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के फेडरेशन में भी ज्यादा माल नहीं है। गुजरात कॉर्पोरेटिव भी भाव बढ़ाकर बोलने लगी है, क्योंकि गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में स्टॉक वहां कम है। यही कारण है कि दूध पाउडर में 20 रुपए प्रति किलो और जल्दी बढ़ जाने के आसार बन गए हैं। गौरतलब है कि दूध लिक्विड का उत्पादन इस बार अधिक जरूर रहा है, लेकिन खपत अधिक होने के साथ-साथ दक्षिण भारत में ऊंचे भाव चल रहे हैं। उधर बटर का स्टॉक, गत वर्ष अधिक रहा था, जबकि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव चल रहे हैं, जिससे किसी भी कंपनी के पास स्टॉक का प्रेशर नहीं है। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बटर, फैट एवं दूध पाउडर के भाव ऊंचे चल रहे हैं, जिससे ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध के बावजूद भी निर्यात मांग बनी हुई है। पहले के सौदे सब डिलीवर हो चुके हैं, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए देसी घी एवं दूध पाउडर में जल्दी 20 रुपए किलो की और तेजी लग रही है।