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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

10-01-2026

काबुली चने में नई फसल से पहले 5/7 रुपए प्रति किलो की और तेजी संभव

  •  काबुली चने का स्टॉक सामान्य होने के बावजूद विगत दो-तीन वर्षों का मटर भारी मात्रा में बंदरगाहों पर पड़े रहने से इसकी खपत काफी कम रही है तथा नई फसल आने को देखकर कारोबारी अपना स्टॉक औने पौने भाव में काटते चले गए हैं। यही कारण है कि अब उत्पादक मंडियों से पड़ते महंगे लगने लगे हैं तथा यहां स्टॉक कम है आने वाली फसल में पोल आ गई है, जिससे बढिय़ा माल की लिवाली बढ़ जाने से इसमें बाजार तेज हो गए हैं। अत: इसी लाइन पर अभी 5/7 रुपए की नयी फसल से पहले और तेजी लग रही है। विगत 2 वर्षों का काबुली चना उत्पादक व वितरक मंडियों में स्टॉक में फंसे रहने से वर्ष 2025 में एक बार महाराष्ट्र का काबुली चना 71/72 रुपए प्रति किलो ऊपर में बिकने के बाद धीरे-धीरे पिछले 6 महीने से लुढक़ते हुए वर्तमान में 57/58 रुपए बिना छना हुआ रह गया था। बढिय़ा माल 59 रुपए तक भी बोल गये थे। इस भारी गिरावट के बीच कारोबारियों को भारी नुकसान लगा है। वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नीचे भाव होने से काबुली चना यहां से किसी भी देश में नहीं गया। इधर घरेलू मंडियों में 2 वर्ष का स्टॉक जमा हो जाने एवं मटर के नीचे भाव होने से लोकल तथा दिसावरी दोनों ही मांग पिछले 6 महीने से ठंडी पड़ी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि कर्नाटक के कुछ मंडियों में स्टॉक निकला ही नहीं तथा मंडियों में सीजन से अब तक माल का दबाव बना हुआ था, जो अब मल आना कम हो गया है। इसकी बिजाई कर्नाटक महाराष्ट्र मध्य प्रदेश तीनों ही राज्यों में इस बार काफी कम बताई जा रही है, क्योंकि किसान नीचे भाव देखकर बिजाई करने से पीछे हट गए हैं। कर्नाटक से मिली खबर के मुताबिक इस बार औसतन काबुली चने की बिजाई 32 प्रतिशत कम होने का अभी तक अनुमान लगाया जा रहा है। दूसरी ओर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह वाली बरसात से बोई हुई फसल को भी व्यापक नुकसान हुआ है। विगत दो वर्षों से 30-31 लाख मीट्रिक टन 3काबुली चने का उत्पादन हुआ था, जिससे इस बार सकल उपलब्धि नए पुराने माल को मिलाकर 37-38 लाख मीट्रिक टन हो गई थी, जिससे पूरे वर्ष माल का प्रेशर बना रहा है। अब आगे की बिजाई को देखकर उत्पादन अनुमान 21-22 लाख मीट्रिक टन रह जाने का लगाया जा रहा है, यही कारण है कि नीचे वाले भाव में स्टाकिस्टों की एक बार फिर लिवाली आ गई है, जिससे 59 रुपए का काबुली चना छलांग लगाकर 68 रुपए प्रति किलो हो गया है। इस वजह से नई फसल आने से पहले 72/73 रुपए प्रति किलो काबुली चना बन जाने की संभावना है। वर्तमान वाले भाव, उत्पादन में पोल आने से फसल पर मुश्किल लग रहे हैं। अत: वर्तमान भाव के काबुली चने का स्टॉक रोकने में आगे चलकर लाभ मिल सकता है।

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काबुली चने में नई फसल से पहले 5/7 रुपए प्रति किलो की और तेजी संभव

 काबुली चने का स्टॉक सामान्य होने के बावजूद विगत दो-तीन वर्षों का मटर भारी मात्रा में बंदरगाहों पर पड़े रहने से इसकी खपत काफी कम रही है तथा नई फसल आने को देखकर कारोबारी अपना स्टॉक औने पौने भाव में काटते चले गए हैं। यही कारण है कि अब उत्पादक मंडियों से पड़ते महंगे लगने लगे हैं तथा यहां स्टॉक कम है आने वाली फसल में पोल आ गई है, जिससे बढिय़ा माल की लिवाली बढ़ जाने से इसमें बाजार तेज हो गए हैं। अत: इसी लाइन पर अभी 5/7 रुपए की नयी फसल से पहले और तेजी लग रही है। विगत 2 वर्षों का काबुली चना उत्पादक व वितरक मंडियों में स्टॉक में फंसे रहने से वर्ष 2025 में एक बार महाराष्ट्र का काबुली चना 71/72 रुपए प्रति किलो ऊपर में बिकने के बाद धीरे-धीरे पिछले 6 महीने से लुढक़ते हुए वर्तमान में 57/58 रुपए बिना छना हुआ रह गया था। बढिय़ा माल 59 रुपए तक भी बोल गये थे। इस भारी गिरावट के बीच कारोबारियों को भारी नुकसान लगा है। वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नीचे भाव होने से काबुली चना यहां से किसी भी देश में नहीं गया। इधर घरेलू मंडियों में 2 वर्ष का स्टॉक जमा हो जाने एवं मटर के नीचे भाव होने से लोकल तथा दिसावरी दोनों ही मांग पिछले 6 महीने से ठंडी पड़ी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि कर्नाटक के कुछ मंडियों में स्टॉक निकला ही नहीं तथा मंडियों में सीजन से अब तक माल का दबाव बना हुआ था, जो अब मल आना कम हो गया है। इसकी बिजाई कर्नाटक महाराष्ट्र मध्य प्रदेश तीनों ही राज्यों में इस बार काफी कम बताई जा रही है, क्योंकि किसान नीचे भाव देखकर बिजाई करने से पीछे हट गए हैं। कर्नाटक से मिली खबर के मुताबिक इस बार औसतन काबुली चने की बिजाई 32 प्रतिशत कम होने का अभी तक अनुमान लगाया जा रहा है। दूसरी ओर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह वाली बरसात से बोई हुई फसल को भी व्यापक नुकसान हुआ है। विगत दो वर्षों से 30-31 लाख मीट्रिक टन 3काबुली चने का उत्पादन हुआ था, जिससे इस बार सकल उपलब्धि नए पुराने माल को मिलाकर 37-38 लाख मीट्रिक टन हो गई थी, जिससे पूरे वर्ष माल का प्रेशर बना रहा है। अब आगे की बिजाई को देखकर उत्पादन अनुमान 21-22 लाख मीट्रिक टन रह जाने का लगाया जा रहा है, यही कारण है कि नीचे वाले भाव में स्टाकिस्टों की एक बार फिर लिवाली आ गई है, जिससे 59 रुपए का काबुली चना छलांग लगाकर 68 रुपए प्रति किलो हो गया है। इस वजह से नई फसल आने से पहले 72/73 रुपए प्रति किलो काबुली चना बन जाने की संभावना है। वर्तमान वाले भाव, उत्पादन में पोल आने से फसल पर मुश्किल लग रहे हैं। अत: वर्तमान भाव के काबुली चने का स्टॉक रोकने में आगे चलकर लाभ मिल सकता है।


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