स्रूश्व प्लेटफार्म पर हाल ही में लिस्ट हुई C2C Advanced Systems के अकाउंट्स में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। ऑडिटर बीडीओ द्वारा की गई एक इंडिपेंडेंट जांच में कंपनी के आईपीओ के समय फाइल किए गए रेड हैरिंग प्रोस्पेक्ट्स (RHP) में भी कई तथ्य डिस्क्लोज नहीं किए जाने की बात सामने आई है। उल्लेखनीय है कि एक इंवेस्टर की शिकायत के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने RHP में कंपनी द्वारा किए गए फाइनेंशियल डिस्क्लोजर्स का इंडिपेंडेंट रिव्यू करने का निर्देश दिया था। जांच पूरी होने के बाद एक्सचेंज ने कंपनी को ऑडिट के ऑब्जर्वेशंस को कंपनी के कमेंट्स के साथ डिस्क्लोज करने का निर्देश दिया था पर कंपनी ऐसा करने में असफल रही। इसके बाद 10 फरवरी 2025 को कंपनी ने पूरी ऑडिट रिपोर्ट डिस्क्लोज की है। ऑडिट रिपोर्ट की फाइंडिंग्स के बाद मंगलवार को C2C Advanced के शेयर 5% के लोअर सर्किट के साथ 697 रुपए पर बंद हुए। 954 रुपए के रिकॉर्ड हाई लेवल से अब तक कंपनी के शेयरों में 27% नीचे उतर चुके हैं। इस ऑडिट रिपोर्ट के बाद आगे भी कंपनी के शेयरों में गिरावट जारी रहने की आशंका बनी हुई है। दिलचस्प रूप से इस SME IPO को आशीष कचौलिया, मुकुल अग्रवाल जैसे कई दिग्गज इंवेस्टरों द्वारा किए गए इंवेस्टमेंट को आधार बनाकर भी मार्केट किया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में उजागर तथ्यों के आधार पर रिटेल इंवेस्टरों के साथ जाहिर तौर पर C2C Advanced Systems द्वारा फ्रॉड किए जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल यह उठता है कि कंपनी मैनेजमेंट के अलावा आखिर इस कंपनी के SME IPO को मैनेज करने वाले मर्चेंट बैंकरों के खिलाफ कड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया जाना चाहिए? इस SME IPO के लिए कंपनी ने अहमदाबाद बेस्ड Beeline Capital Advisors व मुंबई बेस्ड C2C Advanced Systems को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया था।
क्या सामने आया जांच में : ऑडिटर रिपोर्ट के अनुसार क्र॥क्क में डिस्क्लोज किए गए फाइनेंशियल डाटा व कंपनी के ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के बीच विसंगतियां (Discrepancies) देखने को मिली। एक प्रमुख मुद्दा रिलेटेड पार्टी डिस्क्लोजर्स से संबंधित है जिसके तहत क्र॥क्क में इन रिलेटेड पार्टियों के बकाया लोन की राशि जहां केवल 13.29 लाख रुपए डिस्क्लोज की गई वहीं 30 सितम्बर 2024 को कंपनी के अकाउंट्स में इसकी असल राशि 13 करोड़ रुपए के लगभग थी। इसके अलावा कंपनी के सेल्स रजिस्टर के रिव्यू से पता चला कि रिव्यू पीरियड के दौरान हुई कुल 94 करोड़ रुपए की सेल्स में से 74 करोड़ रुपए या 78' सेल्स के संबंध में राशि 30 सितम्बर 2024 को बकाया थी। इससे कंपनी की Debtor व Collection Efficiency पर सवाल उठता है। ऑडिटर ने इस बात को भी हाईलाइट किया है कि 4 कस्टमर्स को कुल 70 करोड़ रुपए की सेल्स (कुल सेल्स के 74' के बराबर) की गई व यह सभी 4 कस्टमर किसी न किसी तरह C2C Advanced Systems से कनेक्टेड पाए गए। विशेष रूप से इनमें शामिल 2 कस्टमर्स- सिनर्जी लॉग-इन सिस्टम व सिनर्जी इंफोर्मेशन टेक- को न ही क्र॥क्क और न ही फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में रिलेटेड पार्टी के रूप में डिस्क्लोज किया गया। कंपनी ने फेमा नियमों के तहत सॉफ्टवेयर एक्सपोटर्स के लिए आवश्यक SME IPO3 फॉर्म भी सब्मिट नहीं किए। ऑडिट के मुताबिक यह नॉन-कंप्लायंस कंपनी के एक्सपोर्ट ट्रांजेक्शंस की वैधता (Legitimacy) पर सवाल उठाता है। इसके अलावा यह फेमा कानून का उल्लंघन भी है।कंपनी के 99 करोड़ रुपए के स्रूश्व ढ्ढक्कह्र को 125 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल हुआ था व 226 रुपए की आईपीओ प्राइस के मुकाबले कंपनी के शेयर 90% प्रीमियम के साथ 429 रुपए पर लिस्ट हुए थे।