पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईंधन आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच भारत में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों से परेशान लोग अब अपनी पुरानी ‘गाड़ी’ को इलेक्ट्रिक में बदलने का विकल्प चुन रहे हैं। इस बदलाव को श्वङ्क रेट्रोफिटिंग कहा जाता है, जो अब आम लोगों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। रेट्रोफिटिंग का मतलब है कि पेट्रोल, डीजल या सीएनजी से चलने वाली गाड़ी को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड तकनीक में बदल दिया जाए। इससे नई गाड़ी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च भी कम आता है। यही वजह है कि यह विकल्प खासकर मध्यम वर्ग के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इस बढ़ती मांग को लेकर कंपनियों जैसे ऐक्सपोनेंट एनर्जी और फोक्स मोटर ने बताया है कि युद्ध शुरू होने के बाद ग्राहकों की दिलचस्पी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां हर महीने सीमित संख्या में गाडिय़ों को बदला जाता था, वहीं अब यह आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है और पूछताछ भी दोगुनी से ज्यादा हो गई है। दरअसल, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं, जिससे भारत के तेल और गैस आयात पर असर पड़ा है। इसके अलावा कतर जैसे प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता क्षेत्रों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों ने देश में ईंधन संकट की आशंका को बढ़ा दिया है, जिसके चलते लोग अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर खर्च की बात करें तो रेट्रोफिटिंग नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की तुलना में सस्ता विकल्प है। तीन-पहिया गाड़ी को इलेक्ट्रिक बनाने में लगभग 1.7 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि चार-पहिया गाडय़िों के लिए हाइब्रिड किट 3 से 6 लाख रुपये तक की होती है। इसके मुकाबले नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना 2 से 4 लाख रुपये ज्यादा महंगा पड़ सकता है। ऐसे में पुरानी गाड़ी को ही अपग्रेड करना लोगों को ज्यादा सुविधाजनक लग रहा है। हालांकि, इस तकनीक के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सरकार की ओर से अभी तक स्पष्ट नीतिगत समर्थन नहीं मिला है और सुरक्षा व प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठते रहते हैं। इसके अलावा, रेट्रोफिटिंग के लिए जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया भी जटिल मानी जाती है। बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां फिलहाल नई इलेक्ट्रिक गाडिय़ों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे यह क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि श्वङ्क रेट्रोफिटिंग भारत के लिए एक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान बन सकता है। इससे न केवल ईंधन पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा और पुरानी गाडिय़ों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। बढ़ती फ्यूल कीमतों और वैश्विक संकट के बीच श्वङ्क रेट्रोफिटिंग एक ऐसा ट्रेंड बनकर उभर रहा है, जो आने वाले समय में भारत की सडक़ों की तस्वीर बदल सकता है।