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11-04-2026

अब AI से होगी रेलवे ट्रैक की मॉनिटरिंग

  •  रेल मंत्रालय ने रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, इसमें पुलों के पास और प्वाइंट्स व क्रॉसिंग पर कंपोजिट स्लीपर के उपयोग जैसे उपाय शामिल हैं। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि ट्रैक की निगरानी के लिए एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत निरीक्षण वाहनों में खास एआई डिवाइस लगाए जाएंगे। मौजूदा भारी लोहे और कंक्रीट के स्लीपरों की तुलना में नए कंपोजिट स्लीपर हल्के होंगे, ज्यादा भार सहने की क्षमता रखते हैं और बेहतर कुशनिंग देंगे। ये स्लीपर बिछाने और मरम्मत करने में भी आसान हैं। इन स्लीपरों को जगह की जरूरत के अनुसार डिजाइन और लगाया जा सकता है, जिससे खासकर पुलों और प्वाइंट्स व क्रॉसिंग से गुजरते समय यात्रियों को ज्यादा आराम मिलेगा। कंक्रीट और लोहे की तुलना में ये कंपोजिट स्लीपर ज्यादा टिकाऊ होते हैं और मिश्रित सामग्री से बने होते हैं, जो प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भार सह सकते हैं। इससे रेलवे के रखरखाव खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है। ट्रैक की स्थिति का आकलन करने के लिए निरीक्षण वाहनों में ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार लगाए जाएंगे, जो एआई की मदद से ट्रैक की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, वेल्डिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे छोटे-छोटे दोषों का भी पता लगाया जा सकेगा। मंत्रालय के अनुसार, ये फैसले यात्रियों की सुरक्षा के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। साथ ही, इंडियन रेलवे सस्ती यात्रा को प्राथमिकता देते हुए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। यात्रियों को किराए में औसतन 45 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है, ताकि सफर सस्ता बना रहे। रेलवे हर साल लगभग 60,000 करोड़ रुपए की यात्री सब्सिडी देता है, जबकि मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।

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अब AI से होगी रेलवे ट्रैक की मॉनिटरिंग

 रेल मंत्रालय ने रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की है। आधिकारिक बयान के अनुसार, इसमें पुलों के पास और प्वाइंट्स व क्रॉसिंग पर कंपोजिट स्लीपर के उपयोग जैसे उपाय शामिल हैं। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि ट्रैक की निगरानी के लिए एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत निरीक्षण वाहनों में खास एआई डिवाइस लगाए जाएंगे। मौजूदा भारी लोहे और कंक्रीट के स्लीपरों की तुलना में नए कंपोजिट स्लीपर हल्के होंगे, ज्यादा भार सहने की क्षमता रखते हैं और बेहतर कुशनिंग देंगे। ये स्लीपर बिछाने और मरम्मत करने में भी आसान हैं। इन स्लीपरों को जगह की जरूरत के अनुसार डिजाइन और लगाया जा सकता है, जिससे खासकर पुलों और प्वाइंट्स व क्रॉसिंग से गुजरते समय यात्रियों को ज्यादा आराम मिलेगा। कंक्रीट और लोहे की तुलना में ये कंपोजिट स्लीपर ज्यादा टिकाऊ होते हैं और मिश्रित सामग्री से बने होते हैं, जो प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भार सह सकते हैं। इससे रेलवे के रखरखाव खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है। ट्रैक की स्थिति का आकलन करने के लिए निरीक्षण वाहनों में ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार लगाए जाएंगे, जो एआई की मदद से ट्रैक की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, वेल्डिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे छोटे-छोटे दोषों का भी पता लगाया जा सकेगा। मंत्रालय के अनुसार, ये फैसले यात्रियों की सुरक्षा के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। साथ ही, इंडियन रेलवे सस्ती यात्रा को प्राथमिकता देते हुए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। यात्रियों को किराए में औसतन 45 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है, ताकि सफर सस्ता बना रहे। रेलवे हर साल लगभग 60,000 करोड़ रुपए की यात्री सब्सिडी देता है, जबकि मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।


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