TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

14-04-2026

डेटा सेंटर मार्केट का साइज 2030 तक डबल होकर हो सकता है 22 बिलियन डॉलर

  •  भारत के डेटा सेंटर मार्केट की वैल्यू 2030 तक दोगुनी से अधिक बढक़र 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, जो कि 2025 में फिलहाल 10 बिलियन डॉलर पर है। इसकी वजह निवेशकों का सेक्टर में बढ़ता भरोसा और मजबूत वृद्धि दर होना है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। वेस्टियन की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक रणनीतिक डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है। उद्योगों में डिजिटल परिवर्तन की गति तेज होने के कारण, भारत के डेटा सेंटर बाजार में अगले दशक में निरंतर विस्तार होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश के समर्थन से, स्थापित क्षमता 2026 के अंत तक 1.7-2.0 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। यह संख्या 2030 तक बढक़र 4-5 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है। देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट यूजर्स की बढ़ती संख्या और हाइपरस्केल ऑपरेटरों के बढ़ते निवेश इसे डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। वेस्टियन के सीईओ, श्रीनिवास राव (एफआरआईसीएस) ने कहा, ‘मजबूत नीतिगत समर्थन और बढ़ती डिजिटल मांग के चलते भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। वैश्विक क्षमता में सीमित हिस्सेदारी के बावजूद, भारत में एआई अवसंरचना में अग्रणी बनने की अपार संभावनाएं हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, 20 साल की कर छूट, जीएसटी लाभ और 2047 तक जारी रहने वाले प्रोत्साहनों के साथ, भारत वैश्विक डेटा सेंटर और एआई हब के रूप में उभरने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार है। 2020 से 2024 के बीच, इस क्षेत्र ने लगभग 13-15 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जिसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों का कुल पूंजी प्रवाह में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत लागत के मामले में भी प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करता है, जहां डेटा सेंटर निर्माण लागत 6-7 मिलियन डॉलर प्रति मेगावाट है, जो सिंगापुर और जापान जैसे विकसित एशियाई बाजारों की तुलना में काफी कम है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश के लिए इसकी आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर का बुनियादी ढांचा कुछ प्रमुख महानगरों में ही केंद्रित है। मजबूत वैश्विक कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के फायदों के चलते मुंबई देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब बना हुआ है। वहीं, चेन्नई एक प्रमुख वैश्विक डेटा गेटवे के रूप में कार्य करता है, जहां कई सबमरीन केबल लैंडिंग उच्च क्षमता और कम लेटेंसी वाली कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं। इसी बीच, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे मजबूत आईटी इकोसिस्टम, पर्याप्त भूमि उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागतों के कारण महत्वपूर्ण द्वितीयक हब के रूप में उभर रहे हैं। अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे शहर प्रतिस्पर्धी भूमि उपलब्धता, बेहतर डिजिटल बुनियादी ढांचे, सहायक राज्य सरकारी नीतियों और बढ़ती उद्यम मांग के कारण लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।

Share
डेटा सेंटर मार्केट का साइज 2030 तक डबल होकर हो सकता है 22 बिलियन डॉलर

 भारत के डेटा सेंटर मार्केट की वैल्यू 2030 तक दोगुनी से अधिक बढक़र 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, जो कि 2025 में फिलहाल 10 बिलियन डॉलर पर है। इसकी वजह निवेशकों का सेक्टर में बढ़ता भरोसा और मजबूत वृद्धि दर होना है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। वेस्टियन की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक रणनीतिक डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है। उद्योगों में डिजिटल परिवर्तन की गति तेज होने के कारण, भारत के डेटा सेंटर बाजार में अगले दशक में निरंतर विस्तार होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश के समर्थन से, स्थापित क्षमता 2026 के अंत तक 1.7-2.0 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। यह संख्या 2030 तक बढक़र 4-5 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है। देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट यूजर्स की बढ़ती संख्या और हाइपरस्केल ऑपरेटरों के बढ़ते निवेश इसे डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। वेस्टियन के सीईओ, श्रीनिवास राव (एफआरआईसीएस) ने कहा, ‘मजबूत नीतिगत समर्थन और बढ़ती डिजिटल मांग के चलते भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। वैश्विक क्षमता में सीमित हिस्सेदारी के बावजूद, भारत में एआई अवसंरचना में अग्रणी बनने की अपार संभावनाएं हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, 20 साल की कर छूट, जीएसटी लाभ और 2047 तक जारी रहने वाले प्रोत्साहनों के साथ, भारत वैश्विक डेटा सेंटर और एआई हब के रूप में उभरने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार है। 2020 से 2024 के बीच, इस क्षेत्र ने लगभग 13-15 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जिसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों का कुल पूंजी प्रवाह में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत लागत के मामले में भी प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करता है, जहां डेटा सेंटर निर्माण लागत 6-7 मिलियन डॉलर प्रति मेगावाट है, जो सिंगापुर और जापान जैसे विकसित एशियाई बाजारों की तुलना में काफी कम है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश के लिए इसकी आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर का बुनियादी ढांचा कुछ प्रमुख महानगरों में ही केंद्रित है। मजबूत वैश्विक कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के फायदों के चलते मुंबई देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब बना हुआ है। वहीं, चेन्नई एक प्रमुख वैश्विक डेटा गेटवे के रूप में कार्य करता है, जहां कई सबमरीन केबल लैंडिंग उच्च क्षमता और कम लेटेंसी वाली कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं। इसी बीच, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे मजबूत आईटी इकोसिस्टम, पर्याप्त भूमि उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागतों के कारण महत्वपूर्ण द्वितीयक हब के रूप में उभर रहे हैं। अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे शहर प्रतिस्पर्धी भूमि उपलब्धता, बेहतर डिजिटल बुनियादी ढांचे, सहायक राज्य सरकारी नीतियों और बढ़ती उद्यम मांग के कारण लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news