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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-04-2026

AI के बढ़ते यूज ने एम्प्लॉइज की संख्या को किया लिमिटेड

  •  टीमलीज डिजिटल की सीईओ ने कहा है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रही छंटनी अब सिर्फ अस्थायी दौर नहीं है, बल्कि यह एक बुनियादी बदलाव है। कंपनियां अब एआई के बढ़ते उपयोग से छोटी टीम के जरिये ही अधिक काम ले रही हैं। बार-बार हो रही छंटनी से नौकरी जाने का डर बढ़ रहा है और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अपने रोजगार के स्थायित्व को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों के लिए छंटनी अब आर्थिक तंगी का मामला नहीं है, बल्कि वे अधिक कर्मचारियों पर निर्भर रहने वाले श्रम-केंद्रित मॉडल से हटकर प्रौद्योगिकी के सहारे आगे बढऩे वाले मॉडल पर जा रही हैं। शर्मा ने कहा कि कोडिंग और ग्राहकों को सहायता देने जैसे कामों में एआई की वजह से 10 से 30 प्रतिशत तक कार्यक्षमता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि बाजार के रुझानों के अनुसार ग्राहकों को सहायता (कस्टमर सपोर्ट) देने में 14 से 15 प्रतिशत और कोडिंग तथा लेखन जैसे कुछ विशेष कार्यों में 40 प्रतिशत तक का सुधार देखा जा रहा है। उनके अनुसार बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के पास धन की कमी नहीं है, लेकिन वे कृत्रिम मेधा के बुनियादी ढांचे पर हर साल अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। इस बड़े निवेश के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से भी पुरानी नौकरियों में कटौती की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में जहां एआई के कारण लाखों नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है, वहां कर्मचारियों को नए हुनर सिखाना बहुत जरूरी है क्योंकि आज केवल 25 प्रतिशत से कम कर्मचारियों को ही औपचारिक प्रशिक्षण मिल पाता है। शर्मा ने कहा कि अब ध्यान ‘नौकरियों को बचाने’ के बजाय ‘कर्मचारियों को नए उभरते कामों के लायक बनाने’ पर होना चाहिए।

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AI के बढ़ते यूज ने एम्प्लॉइज की संख्या को किया लिमिटेड

 टीमलीज डिजिटल की सीईओ ने कहा है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रही छंटनी अब सिर्फ अस्थायी दौर नहीं है, बल्कि यह एक बुनियादी बदलाव है। कंपनियां अब एआई के बढ़ते उपयोग से छोटी टीम के जरिये ही अधिक काम ले रही हैं। बार-बार हो रही छंटनी से नौकरी जाने का डर बढ़ रहा है और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अपने रोजगार के स्थायित्व को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों के लिए छंटनी अब आर्थिक तंगी का मामला नहीं है, बल्कि वे अधिक कर्मचारियों पर निर्भर रहने वाले श्रम-केंद्रित मॉडल से हटकर प्रौद्योगिकी के सहारे आगे बढऩे वाले मॉडल पर जा रही हैं। शर्मा ने कहा कि कोडिंग और ग्राहकों को सहायता देने जैसे कामों में एआई की वजह से 10 से 30 प्रतिशत तक कार्यक्षमता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि बाजार के रुझानों के अनुसार ग्राहकों को सहायता (कस्टमर सपोर्ट) देने में 14 से 15 प्रतिशत और कोडिंग तथा लेखन जैसे कुछ विशेष कार्यों में 40 प्रतिशत तक का सुधार देखा जा रहा है। उनके अनुसार बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के पास धन की कमी नहीं है, लेकिन वे कृत्रिम मेधा के बुनियादी ढांचे पर हर साल अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। इस बड़े निवेश के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से भी पुरानी नौकरियों में कटौती की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में जहां एआई के कारण लाखों नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है, वहां कर्मचारियों को नए हुनर सिखाना बहुत जरूरी है क्योंकि आज केवल 25 प्रतिशत से कम कर्मचारियों को ही औपचारिक प्रशिक्षण मिल पाता है। शर्मा ने कहा कि अब ध्यान ‘नौकरियों को बचाने’ के बजाय ‘कर्मचारियों को नए उभरते कामों के लायक बनाने’ पर होना चाहिए।


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