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17-04-2026

‘खाड़ी संकट से भारत के रेमिटेंस पर दस अरब डॉलर तक नुकसान की आशंका’

  •  भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत में आने वाले विदेशों से पैसे पर दबाव पड़ सकता है। इससे भारत को करीब दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह बात यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कही। नागेश्वरन ने बताया कि भारत को मिलने वाले विदेश से भेजे गए पैसों पर उन देशों की राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी का सीधा असर पड़ सकता है, जहां भारतीय कामगार रहते हैं। भारत को वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था, जो दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है। इसमें करीब आधा हिस्सा खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों से आया था। उन्होंने कहा कि अगर सामान्य आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू होने में समय लगता है, तो खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस पर कुछ असर जरूर पड़ेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि यह असर हालात की गंभीरता और कितने समय तक दिक्कत रहती है, इस पर निर्भर करेगा और नुकसान पांच अरब डॉलर से दस अरब डॉलर तक हो सकता है। नागेश्वरन ने कहा कि यह जोखिम कई वजहों से हैं, जैसे कि संघर्ष की वजह से श्रमिकों का लौटना, मेजबान देशों में आर्थिक गतिविधियों का धीमा होना, और रोजगार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता। खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत बड़ा काम का केंद्र है, खासकर निर्माण, सेवा क्षेत्र और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में। अगर लंबे समय तक दिक्कत रहती है, तो लोगों की कमाई कम हो सकती है और काम पर लौटने में भी देरी हो सकती है।यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में व्यापार, ऊर्जा बाजार और पूंजी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नागेश्वरन ने कहा कि इन बाहरी झटकों का भारत पर असर जिन चार बड़े रास्तों से हो सकता है, उनमें रेमिटेंस भी एक है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा है और अलग-अलग स्रोतों से पैसा आ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इस स्थिति में एक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार के साथ प्रवेश कर रहे हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी आबादी वाला देश है, और लाखों भारतीय विदेशों में काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देश भारतीय कामगारों के लिए सबसे बड़े गंतव्यों में से एक हैं, इसलिए भारत के रेमिटेंस में उनकी बड़ी हिस्सेदारी है।

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‘खाड़ी संकट से भारत के रेमिटेंस पर दस अरब डॉलर तक नुकसान की आशंका’

 भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत में आने वाले विदेशों से पैसे पर दबाव पड़ सकता है। इससे भारत को करीब दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह बात यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कही। नागेश्वरन ने बताया कि भारत को मिलने वाले विदेश से भेजे गए पैसों पर उन देशों की राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी का सीधा असर पड़ सकता है, जहां भारतीय कामगार रहते हैं। भारत को वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था, जो दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है। इसमें करीब आधा हिस्सा खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों से आया था। उन्होंने कहा कि अगर सामान्य आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू होने में समय लगता है, तो खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस पर कुछ असर जरूर पड़ेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि यह असर हालात की गंभीरता और कितने समय तक दिक्कत रहती है, इस पर निर्भर करेगा और नुकसान पांच अरब डॉलर से दस अरब डॉलर तक हो सकता है। नागेश्वरन ने कहा कि यह जोखिम कई वजहों से हैं, जैसे कि संघर्ष की वजह से श्रमिकों का लौटना, मेजबान देशों में आर्थिक गतिविधियों का धीमा होना, और रोजगार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता। खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत बड़ा काम का केंद्र है, खासकर निर्माण, सेवा क्षेत्र और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में। अगर लंबे समय तक दिक्कत रहती है, तो लोगों की कमाई कम हो सकती है और काम पर लौटने में भी देरी हो सकती है।यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में व्यापार, ऊर्जा बाजार और पूंजी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नागेश्वरन ने कहा कि इन बाहरी झटकों का भारत पर असर जिन चार बड़े रास्तों से हो सकता है, उनमें रेमिटेंस भी एक है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा है और अलग-अलग स्रोतों से पैसा आ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इस स्थिति में एक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार के साथ प्रवेश कर रहे हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी आबादी वाला देश है, और लाखों भारतीय विदेशों में काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देश भारतीय कामगारों के लिए सबसे बड़े गंतव्यों में से एक हैं, इसलिए भारत के रेमिटेंस में उनकी बड़ी हिस्सेदारी है।


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