रात को डिनर के बाद मीठा खाने का ट्रेंड अनेक घरों में रहा है। पहले से ही घर में मिठाई, चॉकलेट्स, आइसक्रीम, डैजर्ट्स रखने का शौक भारतीय घरों में रहा है लेकिन आजकल तो यह और भी आसान है। जब टेस्ट बड्स का मन हो, उन्हें तर कर दिया जाये। डिनर के बाद या रात को दुकानों के शटर बंद होने के बाद क्विक कॉमर्स का शटर अप हो जाता है। रात को डिनर के बाद या लेट नाइट जागने वालों की ओर से चॉकलेट्स, आइसक्रीम्स, डैजर्ट्स के ऑर्डर सबसे ज्यादा किये जाते हैं। दस मिनट डिलीवरी ने मी-टाइम ट्रीट का के्रज ज्यादा ही बढ़ा दिया है। दोस्तों के साथ या परिवार के साथ डिनर,इसके बाद मीठे की तलब को क्विक कॉमर्स से पूरा किया जा रहा है। रेडसीर की ‘रीइंवेंटिंग पैक्ड एफएंडबी विद क्विक कॉमर्स’ रिपोर्ट ने चॉकलेट को सबसे ज्यादा तेजी से बढऩे वाली कैटेगरी बताया है। वर्ष 2024-25 में क्विक कॉमर्स से यह पचास प्रतिशत बढऩे वाली कैटेगरी रही। देर रात बाइंग में यह सबसे आगे रही है। कैलंडर ईयर 2024 में ऑनलाइन शेयर 9 प्रतिशत रहा और 2025 में 13 प्रतिशत पहुंच गया। ईयर-ऑन-ईयर लेवल पर यह ऑफलाइन ग्रोथ को पार कर रहा है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स पर चॉकलेट बाइंग के लिये 10-15 प्रतिशत प्रीमियम देने को भी कन्ज्यूमर्स राजी हैं। कारण कन्वीनियंस और इन्स्टेंट डिलीवरी है। रेडसीर स्ट्रेटजी कन्सल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर के अनुसार केवल कन्वीनियंस ही इस शिफ्ट को आगे नहीं ले रहा बल्कि कन्जम्पशन बिहेवियर भी इसका कारण है। पहले यदि रात को चॉकलेट या अन्य डैजर्ट खाने का मन किया, दुकानें बंद हो चुकी है और वह घर में अवेलेबल नहीं है तो कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब 10 मिनट डिलीवरी ने सब उपलब्ध किया हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या क्विक कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स और चॉकलेट ब्राण्ड्स के मध्य यह लाभ देने वाली श्रेणी है। इसका प्रश्न परतों में है। जैसे कि बिगबास्केट के लिये यह महत्वपूर्ण श्रेणी है। टाटा बैक्ड प्लेटफॉर्म ने इन श्रेणियों के रेवेन्यू में 24 प्रतिशत क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर राइज प्रदर्शित किया है। इस सेगमेंट के 72 प्रतिशत ऑर्डर बिजनेस या अन्य समय के बजाय देर रात आते हैं। पहले लोग 10 बजे बाद चॉकलेट या मीठा खाने की इच्छा को इग्नोर कर देते थे लेकिन अब इन्स्टेंट डिलीवरी ने इच्छा को इग्नोर करने का रास्ता नहीं छोड़ा है। इसका असर शरीर के स्वास्थ्य पर कैसा, कितना पड़ता है या तो चर्चा का अलग विषय है।