जयपुर जेम्स एंड ज्वेलरी बोर्स (JGJB), जो जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) और ज्वैलर्स एसोसिएशन जयपुर (छ्व्रछ्व) की संयुक्त पहल है, विकास के एक नए चरण में प्रवेश करने जा रहा है। इस माह इसके लिए बुकिंग प्रक्रिया शुरू होने तथा शिलान्यास समारोह आयोजित होने की संभावना है। यह परियोजना निर्माताओं, निर्यातकों, व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए एक एकीकृत एवं विश्वस्तरीय व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र (Business Ecosystem) तैयार कर भारत की वैश्विक रंगीन रत्न व्यापार में स्थिति को और मजबूत करेगी। प्रमोद अग्रवाल (डेरावाला), अध्यक्ष, जयपुर जेम एंड ज्वेलरी बोर्स, ने कहा कि जयपुर जैम्स एंड ज्वैलरी बोर्स केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना नहीं है, बल्कि यह जयपुर के रत्न उद्योग से जुड़े कई पीढिय़ों के सपनों को साकार करने का माध्यम है। यह विश्वस्तरीय सुविधा जयपुर को रंगीन रत्नों की वैश्विक राजधानी के रूप में और मजबूत बनाएगी, निर्यातकों एवं कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा करेगी तथा उद्योग को वैश्विक व्यापार के अगले दौर में प्रतिस्पर्धा करने हेतु आवश्यक पैमाना, सुरक्षा और कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।किरिट भंसाली, अध्यक्ष, त्रछ्वश्वक्कष्ट, ने कहा कि जयपुर लंबे समय से रंगीन रत्नों का वैश्विक केंद्र माना जाता रहा है और विश्व के पन्ना (श्वद्वद्गह्म्ड्डद्यस्र), माणिक (क्रह्वड्ढ4), नीलम (स्ड्डश्चश्चद्धद्बह्म्द्ग), टैंजानाइट (ञ्जड्डठ्ठ5ड्डठ्ठद्बह्लद्ग) तथा अन्य बहुमूल्य रत्नों की कटिंग और पॉलिशिंग में महत्वपूर्ण योगदान देता है। वर्षों के दौरान यह शहर एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ वित्त वर्ष 2024-25 में रत्न एवं आभूषण निर्यात 2 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। जयपुर जेम एंड ज्वेलरी बोर्स भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के विकास में एक ऐतिहासिक पड़ाव है। जयपुर सदियों पुरानी कारीगरी और विश्वस्तरीय विनिर्माण क्षमताओं के कारण रंगीन रत्नों का वैश्विक केंद्र माना जाता है। यह बोर्स आधुनिक, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला व्यापारिक वातावरण प्रदान करेगा, जिससे व्यापार सुगमता बढ़ेगी, वैश्विक खरीदार आकर्षित होंगे और रंगीन रत्न मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। सीतापुरा, जयपुर में लगभग 43,828 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होने वाला यह बोर्स आधुनिक व्यापारिक अवसंरचना, सुरक्षित व्यावसायिक सुविधाएँ तथा संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा। इससे व्यापार करने में आसानी बढ़ेगी, खरीदार-विके्रता संवाद को प्रोत्साहन मिलेगा और भारतीय निर्यातकों की वैश्विक बाजार तक पहुँच मजबूत होगी। यह परियोजना ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब ग्लोबल सप्लाई चेन तेजी से बदल रही हैं तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदार पारदर्शी, सुरक्षित और पेशेवर रूप से संचालित सोर्सिंग केंद्रों की तलाश कर रहे हैं। उद्योग को एक ही छत के नीचे लाकर यह सुविधा जयपुर की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी और अंतरराष्ट्रीय रत्न एवं आभूषण बाजार में भारत की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगी। परियोजना ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं, जिनमें प्रमुख नियामकीय अनुमतियाँ प्राप्त करना तथा वास्तु योजना (्रह्म्ष्द्धद्बह्लद्गष्ह्लह्वह्म्ड्डद्य क्कद्यड्डठ्ठठ्ठद्बठ्ठद्द) पूर्ण करना शामिल है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (श्वक्कष्ट) टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है तथा निर्माण कार्य दीपावली 2026 से पहले शुरू होने की संभावना है। चरणबद्ध रूप से कब्जा (क्कशह्यह्यद्गह्यह्यद्बशठ्ठ) वर्ष 2028 से दिया जाना प्रस्तावित है। रंगीन रत्नों एवं रत्न आभूषणों के लिए दुनिया के पहले समर्पित बोर्स के रूप में यह परियोजना निर्यात, निवेश, रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापारिक सहभागिता को बढ़ावा देने में उत्प्रेरक (ष्टड्डह्लड्डद्य4ह्यह्ल) की भूमिका निभाएगी तथा जयपुर को रंगों की वैश्विक राजधानी के रूप में और अधिक स्थापित करेगी।