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02-06-2026

डिजी यात्रा के जरिए 10 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी

  •  सरकार ने बताया कि डिजी यात्रा ऐप के जरिए अब तक 10 करोड़ से अधिक सहज और कागज रहित यात्राएं पूरी की जा चुकी हैं। वहीं, आईओएस और एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर इस ऐप को 2.4 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से एयरपोर्ट्स पर प्रवेश प्रक्रिया का औसत समय प्रति यात्री 15 सेकंड से घटकर केवल 5 सेकंड रह गया है। वर्तमान में डिजी यात्रा देश के 38 एयरपोर्ट्स पर सक्रिय है और अगले वर्ष 27 अन्य एयरपोर्ट्स को भी इससे जोड़ा जाएगा। तेज और सुगम यात्री आवाजाही के कारण टर्मिनल अवसंरचना का बेहतर उपयोग हुआ है। इससे एयरपोर्ट्स पर भीड़भाड़ कम हुई है और मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता भी घटी है। नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, डिजी यात्रा आज वैश्विक विमानन क्षेत्र की सबसे सफल डिजिटल पहलों में से एक बन चुकी है। फिजिकल बोर्डिंग पास की आवश्यकता समाप्त होने से यह पहल पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है। इससे भाग लेने वाले एयरपोर्ट्स पर प्रतिदिन हजारों कागजों की बचत हो रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने डिजी यात्रा टीम को 10 करोड़ उपयोग के आंकड़े तक पहुंचने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि यात्री सहज, कागज रहित और संपर्क रहित यात्रा प्रणाली पर लगातार भरोसा जता रहे हैं। डिजी यात्रा को मिली यह स्वीकार्यता ऐसे समय में आई है जब देश में हवाई यात्रा तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2014 में जहां प्रतिदिन डोमेस्टिक एयर ट्रैवलर्स की संख्या 2 लाख से कम थी, वहीं गत तीन वर्षों के दौरान कई बार यह आंकड़ा 5 लाख से अधिक पहुंच चुका है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने के विजन के तहत भारतीय हवाई अड्डों पर वार्षिक यात्री संख्या वर्ष 2030 तक 50 करोड़ और वर्ष 2040 तक लगभग 100 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने आगे कहा कि इस तेज वृद्धि को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए हम डिजी यात्रा, सेल्फ बैगेज ड्रॉप सुविधा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑटोमेशन सिस्टम का विस्तार, शिकायत निवारण के लिए एयर सेवा पोर्टल और हवाई अड्डों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित डिजिटल ट्विन जैसी कई डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहे हैं। नायडू ने कहा कि जहां कई देश अभी भी बायोमेट्रिक-आधारित यात्री प्रक्रिया को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं, वहीं भारत ने बहुत कम समय में डिजी यात्रा को सफलतापूर्वक लागू और विस्तारित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष शुरू होने वाले प्रमुख ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे — नवी मुंबई, जेवर और भोगापुरम — पूरी तरह डिजी यात्रा सक्षम होंगे। फिलहाल डिजी यात्रा 11 भाषाओं को सपोर्ट करती है और इस वर्ष के अंत तक इसमें 11 और क्षेत्रीय भाषाएं जोड़ी जाएंगी।

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डिजी यात्रा के जरिए 10 करोड़ से अधिक यात्राएं पूरी

 सरकार ने बताया कि डिजी यात्रा ऐप के जरिए अब तक 10 करोड़ से अधिक सहज और कागज रहित यात्राएं पूरी की जा चुकी हैं। वहीं, आईओएस और एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर इस ऐप को 2.4 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से एयरपोर्ट्स पर प्रवेश प्रक्रिया का औसत समय प्रति यात्री 15 सेकंड से घटकर केवल 5 सेकंड रह गया है। वर्तमान में डिजी यात्रा देश के 38 एयरपोर्ट्स पर सक्रिय है और अगले वर्ष 27 अन्य एयरपोर्ट्स को भी इससे जोड़ा जाएगा। तेज और सुगम यात्री आवाजाही के कारण टर्मिनल अवसंरचना का बेहतर उपयोग हुआ है। इससे एयरपोर्ट्स पर भीड़भाड़ कम हुई है और मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता भी घटी है। नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, डिजी यात्रा आज वैश्विक विमानन क्षेत्र की सबसे सफल डिजिटल पहलों में से एक बन चुकी है। फिजिकल बोर्डिंग पास की आवश्यकता समाप्त होने से यह पहल पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है। इससे भाग लेने वाले एयरपोर्ट्स पर प्रतिदिन हजारों कागजों की बचत हो रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने डिजी यात्रा टीम को 10 करोड़ उपयोग के आंकड़े तक पहुंचने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि यात्री सहज, कागज रहित और संपर्क रहित यात्रा प्रणाली पर लगातार भरोसा जता रहे हैं। डिजी यात्रा को मिली यह स्वीकार्यता ऐसे समय में आई है जब देश में हवाई यात्रा तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2014 में जहां प्रतिदिन डोमेस्टिक एयर ट्रैवलर्स की संख्या 2 लाख से कम थी, वहीं गत तीन वर्षों के दौरान कई बार यह आंकड़ा 5 लाख से अधिक पहुंच चुका है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने के विजन के तहत भारतीय हवाई अड्डों पर वार्षिक यात्री संख्या वर्ष 2030 तक 50 करोड़ और वर्ष 2040 तक लगभग 100 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने आगे कहा कि इस तेज वृद्धि को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए हम डिजी यात्रा, सेल्फ बैगेज ड्रॉप सुविधा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑटोमेशन सिस्टम का विस्तार, शिकायत निवारण के लिए एयर सेवा पोर्टल और हवाई अड्डों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित डिजिटल ट्विन जैसी कई डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहे हैं। नायडू ने कहा कि जहां कई देश अभी भी बायोमेट्रिक-आधारित यात्री प्रक्रिया को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं, वहीं भारत ने बहुत कम समय में डिजी यात्रा को सफलतापूर्वक लागू और विस्तारित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष शुरू होने वाले प्रमुख ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे — नवी मुंबई, जेवर और भोगापुरम — पूरी तरह डिजी यात्रा सक्षम होंगे। फिलहाल डिजी यात्रा 11 भाषाओं को सपोर्ट करती है और इस वर्ष के अंत तक इसमें 11 और क्षेत्रीय भाषाएं जोड़ी जाएंगी।


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