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25-05-2026

छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को आधुनिक बनाने की योजना को और पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव

  •  खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) को पांच और साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव ला रहा है। इसमें ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी की सीमा को बढ़ाने जैसे बदले हुए दिशा-निर्देश शामिल होंगे। यह बात एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताई। संयुक्त सचिव देवेश देवल ने कहा कि यह केंद्रीय योजना सूक्ष्म उद्यमों को आधुनिक बनाने, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मजबूत करने और साझा बुनियादी ढांचा व ‘इन्क्यूबेशन’ केंद्र बनाने में सफल रही है। योजना वर्ष 2020 में शुरू हुई थी और इसे सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। देवल ने कहा, ‘‘हमें इस योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। हम इसे अगले पांच साल तक बदले हुए दिशा-निर्देशों के साथ जारी रखने का प्रस्ताव भी ला रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मुख्य बदलावों में ऋण से जुड़ी पूंजी सब्सिडी को मौजूदा ऊपरी सीमा (प्रति यूनिट 10 लाख रुपये) से बढ़ाना, महिला उद्यमियों और पहाड़ी इलाकों के उद्यमों को प्राथमिकता देना और ब्रांडिंग व विपणन पर जोर देना शामिल है। अभी, इस योजना के तहत उन व्यक्तियों या समूहों को, जो खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर रहे हैं या उन्हें आधुनिक बना रहे हैं, पात्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी प्रति सूक्ष्म-उद्यम 10 लाख रुपये तक सीमित है। वर्ष 2020 में शुरू होने के बाद से, 1.96 लाख सूक्ष्म उद्यमों ने कुल 19,844 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए ऋण सब्सिडी का लाभ उठाया है। इसमें सरकार ने 5,844 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। देवल ने कहा कि लगभग 65,000 इकाइयों को आधुनिक बनाया गया है। दो लाख इकाइयों का लक्ष्य अगले महीने तक पूरा हो जाएगा। लाभार्थियों की संख्या के मामले में बिहार सबसे आगे है। इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश का स्थान आता है। अनाज, तेल और तिलहन, तथा फल और सब्जियों के प्रसंस्करण का काम सबसे ज्यादा होता है। महिला नीत उद्यम, सभी लाभार्थियों में से लगभग 40 प्रतिशत हैं। शुरुआती पूंजी ( सीड कैपिटल) घटक के तहत, चार लाख महिलाओं को कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों के लिए कुल 380 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। इनमें से 15,000 इकाइयां सूक्ष्म उद्यम का दर्जा पा चुकी हैं और उन्होंने कर्ज से जुड़ी पूंजी सब्सिडी के लिए आवेदन किया है।  बुनियादी ढांचे के मामले में, मंत्रालय ने 80 साझा बुनियादी ढांचा और ‘इनक्यूबेशन सेंटर’ मंजूर किए हैं, जिनमें से 31 अभी चालू हैं। उम्मीद है कि अगले दो-तीन महीनों में 20-25 और सेंटर काम करने लगेंगे और बाकी सेंटर साल के आखिर तक चालू हो जाएंगे। ज्यादातर सेंटर कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों में स्थित हैं।

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छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को आधुनिक बनाने की योजना को और पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव

 खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) को पांच और साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव ला रहा है। इसमें ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी की सीमा को बढ़ाने जैसे बदले हुए दिशा-निर्देश शामिल होंगे। यह बात एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताई। संयुक्त सचिव देवेश देवल ने कहा कि यह केंद्रीय योजना सूक्ष्म उद्यमों को आधुनिक बनाने, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मजबूत करने और साझा बुनियादी ढांचा व ‘इन्क्यूबेशन’ केंद्र बनाने में सफल रही है। योजना वर्ष 2020 में शुरू हुई थी और इसे सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। देवल ने कहा, ‘‘हमें इस योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। हम इसे अगले पांच साल तक बदले हुए दिशा-निर्देशों के साथ जारी रखने का प्रस्ताव भी ला रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मुख्य बदलावों में ऋण से जुड़ी पूंजी सब्सिडी को मौजूदा ऊपरी सीमा (प्रति यूनिट 10 लाख रुपये) से बढ़ाना, महिला उद्यमियों और पहाड़ी इलाकों के उद्यमों को प्राथमिकता देना और ब्रांडिंग व विपणन पर जोर देना शामिल है। अभी, इस योजना के तहत उन व्यक्तियों या समूहों को, जो खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर रहे हैं या उन्हें आधुनिक बना रहे हैं, पात्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी प्रति सूक्ष्म-उद्यम 10 लाख रुपये तक सीमित है। वर्ष 2020 में शुरू होने के बाद से, 1.96 लाख सूक्ष्म उद्यमों ने कुल 19,844 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए ऋण सब्सिडी का लाभ उठाया है। इसमें सरकार ने 5,844 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। देवल ने कहा कि लगभग 65,000 इकाइयों को आधुनिक बनाया गया है। दो लाख इकाइयों का लक्ष्य अगले महीने तक पूरा हो जाएगा। लाभार्थियों की संख्या के मामले में बिहार सबसे आगे है। इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश का स्थान आता है। अनाज, तेल और तिलहन, तथा फल और सब्जियों के प्रसंस्करण का काम सबसे ज्यादा होता है। महिला नीत उद्यम, सभी लाभार्थियों में से लगभग 40 प्रतिशत हैं। शुरुआती पूंजी ( सीड कैपिटल) घटक के तहत, चार लाख महिलाओं को कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों के लिए कुल 380 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। इनमें से 15,000 इकाइयां सूक्ष्म उद्यम का दर्जा पा चुकी हैं और उन्होंने कर्ज से जुड़ी पूंजी सब्सिडी के लिए आवेदन किया है।  बुनियादी ढांचे के मामले में, मंत्रालय ने 80 साझा बुनियादी ढांचा और ‘इनक्यूबेशन सेंटर’ मंजूर किए हैं, जिनमें से 31 अभी चालू हैं। उम्मीद है कि अगले दो-तीन महीनों में 20-25 और सेंटर काम करने लगेंगे और बाकी सेंटर साल के आखिर तक चालू हो जाएंगे। ज्यादातर सेंटर कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों में स्थित हैं।


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