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18-05-2026

रुपये में गिरावट जारी रही तो ईंधन मूल्य वृद्धि का लाभ खत्म हो जाएगा: एसबीआई रिपोर्ट

  •  रुपये में यदि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और भी गिरावट होती है तो तेल विपणन कंपनियों को वाहन ईंधन कीमतों में की गई बढ़ोतरी से मिलने वाला पूरा लाभ खत्म हो सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने यह कहा। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में यह बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को खुदरा बिक्री पर लागत के मुकाबले हो रहे नुकसान (अंडर-रिकवरी) में करीब 52,700 करोड़ रुपये की राहत दे सकती है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में अपेक्षित कुल नुकसान का लगभग 15 प्रतिशत है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बाद उठाया गया है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि रुपये में अगर आगे भी गिरावट का रुख बना रहता है तो कच्चे तेल के इंपोर्ट की लागत बढ़ जाएगी, जिससे कीमत वृद्धि का पूरा लाभ समाप्त हो सकता है। एसबीआई इकोरैप के मुताबिक, यदि रुपये में मौजूदा औसत स्तर से केवल दो रुपये की और कमजोरी आती है, तो इंपोर्ट लागत इतनी बढ़ जाएगी कि ईंधन मूल्य वृद्धि का लाभ पूरी तरह चला जाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रुपया पहले ही एक महत्वपूर्ण गिरावट स्तर के करीब पहुंच चुका है, जिसके बाद और कमजोरी घरेलू ईंधन कीमत संशोधन के लाभ को काफी हद तक खत्म कर सकती है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे चला गया और अंत में 95.81 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। एसबीआई रिपोर्ट में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हवाले से कहा गया है कि तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जो सालाना करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है।

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रुपये में गिरावट जारी रही तो ईंधन मूल्य वृद्धि का लाभ खत्म हो जाएगा: एसबीआई रिपोर्ट

 रुपये में यदि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और भी गिरावट होती है तो तेल विपणन कंपनियों को वाहन ईंधन कीमतों में की गई बढ़ोतरी से मिलने वाला पूरा लाभ खत्म हो सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने यह कहा। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में यह बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को खुदरा बिक्री पर लागत के मुकाबले हो रहे नुकसान (अंडर-रिकवरी) में करीब 52,700 करोड़ रुपये की राहत दे सकती है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में अपेक्षित कुल नुकसान का लगभग 15 प्रतिशत है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बाद उठाया गया है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि रुपये में अगर आगे भी गिरावट का रुख बना रहता है तो कच्चे तेल के इंपोर्ट की लागत बढ़ जाएगी, जिससे कीमत वृद्धि का पूरा लाभ समाप्त हो सकता है। एसबीआई इकोरैप के मुताबिक, यदि रुपये में मौजूदा औसत स्तर से केवल दो रुपये की और कमजोरी आती है, तो इंपोर्ट लागत इतनी बढ़ जाएगी कि ईंधन मूल्य वृद्धि का लाभ पूरी तरह चला जाएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रुपया पहले ही एक महत्वपूर्ण गिरावट स्तर के करीब पहुंच चुका है, जिसके बाद और कमजोरी घरेलू ईंधन कीमत संशोधन के लाभ को काफी हद तक खत्म कर सकती है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे चला गया और अंत में 95.81 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। एसबीआई रिपोर्ट में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हवाले से कहा गया है कि तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जो सालाना करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है।


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