वेस्ट एशिया में तनाव और होरमुज शिपिंग चैनल में खलल के बावजूद एक्सपोर्ट के लिहाज से भारत ने वित्त वर्ष 27 की मजबूत शुरुआत की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार अप्रैल और मई 2026 के दौरान भारत के गुड्स एक्सपोर्ट में लगभग 15 परसेंट की ग्रोथ दर्ज की गई वहीं नॉन-पेट्रोलियम एक्सपोर्ट में 10-11 परसेंट की ग्रोथ देखने को मिली है। भारत का कुल एक्सपोर्ट अप्रैल 2026 में सालाना आधार पर 13.6' बढक़र 80.8 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। कई प्रमुख ट्रेड रूट और मार्केट ईरान वॉर की चपेट में होने के बावजूद भारतीय एक्सपोरटर्स ने नए मार्केट्स और नई प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार कर एक्सपोर्ट ग्रोथ बनाए रखी। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के अनुसार क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट लचीला बना हुआ है। अप्रैल 2026 में भारत का गुड्स एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 43.56 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 38.28 बिलियन डॉलर था। इसी अवधि में सर्विसेस एक्सपोर्ट भी 32.8 बिलियन डॉलर से बढक़र 37.2 बिलियन डॉलर हो गया। हालांकि इस दौरान भारत का इंपोर्ट बढ़ा। अप्रैल 2026 में भारत का कुल इंपोर्ट बढक़र 88.6 बिलियन डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पहले 82.3 बिलियन डॉलर था। गुड्स इंपोर्ट 65.4 बिलियन डॉलर से बढक़र 71.9 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि सर्विसेस इंपोर्ट मामूली रूप से घटकर 16.66 बिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 16.9 बिलियन डॉलर था। इंपोर्ट बढऩे के कारण भारत का व्यापार घाटा अप्रैल 2026 में 28.4 बिलियन डॉलर रहा, जबकि अप्रैल 2025 में यह 27.1 बिलियन डॉलर था। भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन (या मार्केट) बना हुआ है, जबकि चीन भारत के लिए इंपोर्ट का सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 में भारत ने 1,821 नए उत्पाद-देश निर्यात संयोजनों (Product-Country Export Combinations) में प्रवेश किया। यानी भारत ने ना केवल अपने एक्सपोर्ट मार्केट्स का विस्तार किया है बल्कि प्रोडक्ट कैटेगरी को भी बढ़ाया है जिससे एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) बढ़ाने और रिस्क मैनेज करने में मदद मिली है।